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खामेनेई का खात्मा: ईरान में मातम; अमेरिकी हमले में बेटी, दामाद, पोती की भी मौत

KHULASA FIRST

संवाददाता

01 मार्च 2026, 1:39 pm
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खामेनेई का खात्मा

माहे-मुकद्दस रमजान में अमेरिका ने ईरान के सुप्रीम लीडर को उतारा मौत के घाट, मुस्लिम राष्ट्र खामोश

अमेरिकी हमले में खामेनेई के साथ ईरान की सुप्रीम सैन्य-सुरक्षा की लीडरशिप भी हुई खत्म, 30 बम गिराए

खामेनेई के उत्तराधिकारी का हुआ ऐलान, दूसरे बेटे बने सुप्रीम लीडर, तेहरान में सड़कों पर उतरे लाखों लोग, 40 दिन का शोक

ईरान में अमेरिका-इजराइल से बदला लेने के लग रहे नारे, अमेरिका तख्ता पलट की तैयारी में, सऊदी अरब भी शंका के घेरे में

अमेरिकी हमले की रूस-चीन ने की कड़ी निंदा, अरब देशों ने खामोशी की अख्तियार, मिडिल ईस्ट में हाहाकार

ट्रंप ने खामेनेई को बताया इतिहास का सबसे क्रूर नेता, रूस बोला- शांति दूत ने दिखाया असली रंग

खाड़ी देशों का हवाई रूट्स पूरी तरह ठप, यूरोप जाने वाली भारतीय उड़ानें भी रद्द, हजारों भारतीय मिडिल ईस्ट में फंसे

नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बहाना वही परमाणु बम का। बहाना वही जो कभी इराक, कभी अफगानिस्तान, कभी सीरिया, कभी लीबिया से लड़ने और पर्दे के पीछे अपनी हुकूमत कायम करने के लिए बनाया था। बहाने बनाने वाला मुल्क भी वही अमेरिका। समूचे विश्व का ‘पटेल’ बनने की इस मुल्क के लीडर की सनक ने दुनिया के वो हालात कर दिए हैं कि आज न सिर्फ मध्य पूर्व के देश, बल्कि पूरी दुनिया के लिए तीसरे युद्ध के हालात पैदा कर दिए।

उस पर भी तुर्रा ये कि हम दुनिया में शांति कायम करने के भागीरथी काम में जुटे हैं और हमें शांति का नोबल दीजिए। एक बड़े मुस्लिम राष्ट्र में तख्ता पलट की अमेरिकी जिद के चलते अब बहरीन ही नहीं, दुबई, अबूधाबी जैसे देश में भी धमाके हो रहे हैं। पूरा यूएई खतरे की जद में आ गया, जो सबसे महफूज माना जाता था।

भारत भी इस सबसे अछूता नहीं। लाखों भारतीय खाड़ी देशों में बसे हुए हैं। हजारों एयरपोर्ट पर फंसे हुए हैं। हवाई रूट्स ठप पड़े हैं। तेल की कीमतों में उछाल आ गया है। सऊदी अरब व इजराइल के कहने से ईरान पर हमले की खबर ने मुस्लिम राष्ट्र की फूट को उजागर कर दिया है। एक इस्लामिक मुल्क पर हमले और धार्मिक नेता की हत्या के बाद भी नापाक मुल्क पाकिस्तान भी दुम दबाकर खामोश हो गया है।

आ खिरकार वही हुआ जिसका डर व अंदेशा था। अमेरिकी सनक ने एक बार फिर समूची दुनिया को युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दादागीरी का निशाना इस बार शिया बहुल मुस्लिम राष्ट्र ईरान बना। वह भी रमजान जैसे पाक व अल्लाह की इबादत वाले माह में।

अमेरिका ने इस मुस्लिम मुल्क पर एक के बाद एक कई बम व मिसाइलों से हमला किया। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामनेई का खात्मा हो गया। खामेनेई मुस्लिम धर्मगुरु भी थे। अमेरिका ने खामनेई के घर खामनेई कंपाउंड पर 30 से ज्यादा भारी बम बरसाए। इस हमले में न सिर्फ खामेनेई बल्कि ईरान की सुरक्षा व सैन्य मामलों की सुप्रीम लीडरशिप भी खत्म हो गई। दुःख की बात ये भी रही कि घर पर हुए हमले में खामनेई की बहू, बेटी और पोती भी मारी गई। पूरे ईरान में मातम पसर गया है।

खामेनेई की मौत से न केवल मुस्लिम राष्ट्र, बल्कि पूरी दुनिया सन्न रह गई। अब ईरान की सड़कों पर बदला-बदला के नारे के साथ लाखों लोग उतर आए हैं, लेकिन दमदार व मालदार मुस्लिम राष्ट्र होने का दावा करने वाले तमाम मुल्कों ने इस अमेरिकी दादागीरी पर खामोशी अख्तियार कर ली है।

पाकिस्तान की भी बोलती बंद है, जो इस्लामिक मुल्कों का खैरख्वाह होने का जब-तब दावा करता है। इस हमले का आरोप इजराइल व अमेरिका पर तो ऐलानिया है, लेकिन ईरान पर हमले करने का दबाव बनाने वाले मुल्क में सऊदी अरब का नाम भी सामने आया है।

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि सऊदी ने ट्रंप पर जबरदस्त दबाव बनाया हुआ था। ईरान पर हमले और खामेनेई के साथ इस शिया बहुल देश की सर्वोच्च लीडरशिप के खात्मे का चीन व रूस ने कड़ा विरोध करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया है।

‘लड़ेंगे-मरेंगे, समझौता नहीं करेंगे’ के नारे के साथ पूरे ईरान में गुस्सा पसर गया है। धार्मिक नेता की मौत के बदले के लिए लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। खामेनेई के उत्तराधिकारी के रूप में उनके दूसरे बेटे मोजतबा खामनेई का चयन करने की जानकारी सामने आई है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने मुल्क से वादा किया है कि दुश्मन से पछतावा जरूर करवाएंगे। ईरानी संसद की सिक्योरिटी कमेटी ने भी बयान जारी किया है कि शुरू उन्होंने किया है, खत्म हम करेंगे। ईरान के इस्फहान व तेहरान में लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं।

लोग खामेनेई की मौत के खिलाफ अपने गुस्से का इजहार कर रहे हैं। जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ने खामेनेई को दुनिया के इतिहास का सबसे क्रूर नेता बताया। जबकि रूस ने कहा कि शांति दूत ने ईरान में अपना असली रंग दिखा दिया।

रक्षा मंत्री को ट्रेस कर रहा था अमेरिका, खामेनेई भी मारे गए
खामेनेई की मौत का इल्म किसी को नहीं था। युद्ध का आगाज ही हुआ था और स्वयं खामनेई ने अपने को खासा महफूज कर रखा था। इसी महफूजी के दम पर ईरान ने वक्त से पहले मिडिल ईस्ट के देशों में अमेरिकी बेस कैंप पर मिसाइलों व ड्रोन से हमला शुरू कर दिया था।

खामेनेई को रत्तीभर इल्म नहीं था कि अमेरिका उन्हें ट्रेस कर रहा है। शनिवार सुबह जब उन्होंने ईरान की सुप्रीम लीडरशिप से अहम बैठक बुलाई तो उसमें शामिल होने अली शमखानी भी शामिल हुए।

शमखानी ईरान की आर्मी के चीफ हैं। अमेरिका की खूफिया एजेंसिया इन्हीं को ट्रेस करते हुए अयातुल्लाह खामेनेई के घर तक जा पहुंचा। जिस वक्त ये हाईलेवल बैठक हुई तभी अमेरिका ने 30 से ज्यादा भारी बम खामनेई कंपाउंड पर बरसा दिए।

इस हमले में मोहम्मद शिराजी, अली शखनाई, नासिर जदेहस्ज, मोहम्मद पाकेपुर, सालेह असादी, हुसैन जबल अमेलियन आदि भी मारे गए। ये सबके सब ईरान की सुरक्षा व सैन्य मामलों से जुड़े लीडर थे।

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