मसौदा तैयार: इसके लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य; रिश्ता खत्म करने पर अपनानी होगी कानूनी प्रक्रिया
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) का मसौदा लगभग तैयार हो चुका है। इसे जल्द ही राज्य कैबिनेट के सामने पेश किया जा सकता है।
मसौदे में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कई अहम प्रावधान शामिल किए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। वहीं, रिश्ता खत्म करने के लिए भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी।
लिव-इन का रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य
लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले दोनों बालिग व्यक्तियों को जिले के रजिस्ट्रार कार्यालय में अपने संबंध का पंजीयन कराना होगा। रजिस्ट्रेशन के लिए केवल आयु संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। सरकार का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना बताया गया है।
रिश्ता खत्म करने के लिए भी होगी कानूनी प्रक्रिया
मसौदे में लिव-इन संबंध समाप्त करने के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है। यदि कोई पंजीकृत लिव-इन पार्टनर भविष्य में किसी अन्य व्यक्ति से विवाह करना चाहता है, तो उसे पहले अपने लिव-इन रजिस्ट्रेशन को निरस्त कराना होगा।
यदि दोनों पक्ष सहमत हों तो प्रक्रिया आसान होगी, लेकिन किसी एक पक्ष के विरोध की स्थिति में मामला अदालत तक जा सकता है। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय न्यायालय का होगा और दोनों पक्षों को उसका पालन करना होगा।
शादी होने पर स्वतः समाप्त होगा रजिस्ट्रेशन
यदि लिव-इन में रह रहे दोनों पार्टनर बाद में आपस में विवाह कर लेते हैं, तो उनका लिव-इन रजिस्ट्रेशन स्वतः समाप्त माना जाएगा।
रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर क्या होगा?
लिव-इन रजिस्ट्रेशन की जिम्मेदारी संबंधित जोड़े की होगी। हालांकि, यदि कोई पहले से शादीशुदा व्यक्ति लिव-इन में रहता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ पहले से लागू आपराधिक कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकेगी।
मॉनिटरिंग व्यवस्था पर अभी भी सवाल
मसौदे में रजिस्ट्रेशन की निगरानी प्रणाली को लेकर अभी पूरी स्पष्टता नहीं है। यदि कोई व्यक्ति पहले से पंजीकृत लिव-इन संबंध में रहते हुए दोबारा किसी अन्य के साथ रजिस्ट्रेशन कराता है, तो इसकी जानकारी तत्काल सामने कैसे आएगी, इस पर अभी विस्तृत व्यवस्था स्पष्ट नहीं की गई है।
उत्तराधिकार के नियम भी हुए सरल
यूसीसी मसौदे में उत्तराधिकार (Inheritance) से जुड़े प्रावधानों को भी सरल बनाया गया है। पहले जहां इस विषय से संबंधित करीब 100 प्रावधान थे, वहीं अब इन्हें घटाकर 30 कर दिया गया है।
सरकार का दावा है कि इससे कानून अधिक सरल और व्यावहारिक होगा। मसौदे में घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है।
कैबिनेट और मानसून सत्र में पेश होने की तैयारी
मुख्यमंत्री स्तर पर और विधि विभाग की समिति इस मसौदे को अंतिम रूप दे चुकी है। यूसीसी समिति की अध्यक्ष रंजना देसाई के साथ भी अंतिम चर्चा पूरी हो चुकी है। अब सरकार इसे आगामी मानसून सत्र में विधेयक के रूप में पेश करने की तैयारी कर रही है।
कानूनी चुनौती की भी संभावना
यदि यह विधेयक विधानसभा से पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाता है, तो विशेष रूप से लिव-इन रिलेशनशिप और उत्तराधिकार से जुड़े प्रावधानों को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। सरकार इस संभावना को ध्यान में रखते हुए कानूनी तैयारी भी कर रही है।
मसौदे पर बंटी राय
यूसीसी के इस मसौदे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। समर्थकों का मानना है कि इससे लिव-इन संबंधों में पारदर्शिता और कानूनी स्पष्टता आएगी, जबकि आलोचकों का कहना है कि इससे लोगों के निजी जीवन में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ सकता है। ऐसे में आगामी मानसून सत्र में इस मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक और कानूनी बहस होने की संभावना है।
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