पत्रकारिता की आड़ में व्यवसाय या पार्टी का प्रचार न करें, अमिताभ अग्निहोत्री: स्टेट प्रेस क्लब मप्र ने किया सम्मान
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
यदि आप व्यवसाय करना चाहते हैं तो सीधे वही कीजिए, कोई पार्टी पसंद है तो उसे ही जॉइन कर लीजिए, लेकिन कृपा करके पत्रकारिता की आड़ में व्यवसाय या पार्टी का प्रचार बंद कर दीजिए, क्योंकि ऐसा करके आप ईमानदारी से पत्रकारिता कर रहे पत्रकारों के सम्मुख संकट पैदा कर देते हैं।
ये बातें अपनी विशिष्ट शैली के लिए पहचाने जाने वाले वरिष्ठ पत्रकार, राष्ट्रवाणी चैनल के संपादक एवं एडिटर्स क्लब ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट अमिताभ अग्निहोत्री ने स्टेट प्रेस क्लब, मप्र द्वारा उनके सम्मान में आयोजित भोज में वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों के सम्मुख कही।
छोटे मीडिया संस्थानों और पत्रकारों की आवाज है एडिटर्स क्लब ऑफ इंडिया
अग्निहोत्री ने एडिटर्स क्लब ऑफ इंडिया की स्थापना की पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि देश में वर्तमान में मौजूद संगठन बड़े और मुख्यतः अंग्रेजी अखबारों को ज्यादा तवज्जो देते हैं। बड़े अखबारों को ना तो शासन के संरक्षण की आवश्यकता है और न हीं उन्हें शासन द्वारा दी जा रही ही विशेष सुविधाओं का कोई प्रलोभन है।
एडिटर्स क्लब ऑफ इंडिया उन छोटे पत्र-पत्रिकाओं, पत्रकारों और संपादकों के हितों के संरक्षण के लिए बना है जो शासन-प्रशासन के हाथों प्रताड़ित किए जाते हैं और जिनके हक में आवाज उठाने वाला कोई नहीं होता। वर्तमान में इस नए संगठन का विस्तार कार्य जारी है। शीघ्र ही इसके बैनर तले अनेक पत्रकार हितैषी कार्यक्रम देशभर में आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अमिताभ अग्निहोत्री का स्वागत वरिष्ठ पत्रकार डॉ. प्रकाश हिंदुस्तानी, डॉ. सुभाष खंडेलवाल, अभिलाष शुक्ला एवं दीपक माहेश्वरी ने किया। समाजसेविका डॉ. रजनी भंडारी ने उन्हें पुस्तक भेंट की, जबकि स्टेट प्रेस क्लब मप्र के अध्यक्ष प्रवीण कुमार खारीवाल एवं मुख्य महासचिव नवनीत शुक्ला ने उन्हें स्मृति चिह्न भेंट किया।
शीतल राय एवं सोनाली यादव ने उन्हें स्मारिका भेंट की। पंकज क्षीरसागर ने इस अवसर पर विशेष रूप उपस्थित जयंत भिसे का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन आलोक वाजपेई ने किया।
सत्ता केंद्रों के समक्ष शरणागत होना पत्रकारिता पेशे को बदनाम करना
अग्निहोत्री ने वर्तमान में कतिपय पत्रकारों एवं मीडिया संस्थानों के प्रमुखों द्वारा सत्ता के केंद्रों के समक्ष शरणागत होने पर तंज कसते हुए कहा कि ऐसे लोग पत्रकारिता के पेशे को बदनाम करते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को साहब या मंत्री को महाराज कहना पत्रकारों की भाषा नहीं है। अग्निहोत्री ने कहा कि डिजिटल मीडिया के आने से पत्रकारिता को नए आयाम मिले हैं। इसके जरिए आप अपनी बात को बिना किसी दबाव के लिख और कह सकते हैं।
पीड़ित पक्ष के साथ खड़े रहना पत्रकार का दायित्व- वरिष्ठ पत्रकार अग्निहोत्री ने कहा कि पत्रकार में सच को सच और गलत को गलत लिखने का माद्दा होना चाहिए। उसकी लेखनी और सवालों में वह दम होना चाहिए, जो सत्ता केंद्रों को सोचने पर विवश करें। पत्रकार की प्राथमिकता जनता की समस्याओं को उठाने और पीड़ित पक्ष के साथ खड़ा होने की होनी चाहिए।
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