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धार पुलिस छावनी में तब्दील: तिरंगे के साए में शांति की अपील; फ्लैग मार्च से पुलिस ने नापे संवेदनशील क्षेत्र, चप्पे-चप्पे पर पहरा

KHULASA FIRST

संवाददाता

22 मई 2026, 4:40 pm
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धार पुलिस छावनी में तब्दील

खुलासा फर्स्ट, धार।
भोजशाला पर इंदौर हाई कोर्ट के फैसले के बाद पहले शुक्रवार को लेकर शहर की फिजा पूरी तरह बदल गई है। हालांकि, प्रशासन किसी हाल में माहौल बिगड़ने देने के मूड में नहीं दिख रहा।

यही वजह रही बुधवार शाम शहर पुलिस छावनी में तब्दील नजर आया। तिरंगे के साए में पुलिस और प्रशासन ने शक्ति प्रदर्शन किया, जिसने संदेश दिया कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने पर नरमी नहीं होगी।

पुलिस कंट्रोल रूम से निकला विशाल फ्लैग मार्च प्रमुख मार्गों और संवेदनशील इलाकों से गुजरा। डीजे पर गूंजते देशभक्ति गीतों और तिरंगे के बीच प्रशासन ने सीधे तौर पर शांति और सौहार्द की अपील की।

वाग्देवी की शोभायात्रा रद्द: हिंदू समाज दोपहर 1 से 3 बजे तक हवन-पूजन और महाआरती करेगा। इसमें जिले भर से बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग शामिल होंगे।

भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने बताया वाग्देवी की शोभायात्रा भी निकालने वाले थे, जिसे किसी वजह से रद्द कर दिया गया है।

अश्वरोही दल और वज्र वाहन हुए शामिल
कलेक्टर राजीवरंजन मीना और एसपी सचिन शर्मा के साथ भारी बल, अश्वरोही दल, वज्र वाहन और अधिकारियों का लंबा काफिला शहर में घूमा। शुक्रवार के लिए प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की है। संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी है, जबकि सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने वालों पर कडी नजर। कलेक्टर ने शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग की अपील की है।

पहली बार पूर्ण स्वाभिमान के साथ होगी महाआरती
अशोक जैन ने बताया कि 721 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद आज हिंदू समाज पूरे स्वाभिमान और सम्मान के साथ भोजशाला में मां सरस्वती का पूजन और महाआरती करेगा। इतिहास का जिक्र कर उन्होंने कहा 1305 ई. में आक्रांता अलाउद्दीन खिलजी ने मंदिर पर अवैध कब्जा कर इसे अपवित्र कर दिया था, जिसके बाद से हिंदू समाज निरंतर संघर्ष कर रहा था।

हाई कोर्ट द्वारा हिंदुओं को पूजन का अधिकार दिए जाने के बाद आज का दिन बेहद ऐतिहासिक है।

मुस्लिम पक्ष पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
मुस्लिम पक्ष गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। हाई कोर्ट के फेसले को एकतरफा बताते हुए विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की है। सदर अब्दुल समद ने कहा कमाल मौला मस्जिद में लगभग 700 वर्षों से जुमे की नमाज हो रही है। इस परंपरा को प्रभावित किए जाने से समाज में दुख है, लेकिन लड़ाई संवैधानिक और कानूनी दायरे में ही लड़ी जाएगी।

शहर काजी वकार सादिक ने कहा मुस्लिम समाज न्यायपालिका का सम्मान करता है और अब सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद है। पहले मुस्लिम पक्ष ने भी भोजशाला में नमाज अदा करने की घोषणा की थी, जिसे देर शाम टाल दिया गया।

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