लापरवाही की लहर पर सवार मौत: लाइफ जैकेट वाले बच गए; 9वां शव निकाला, राज्य में क्रूज संचालन पर रोक
KHULASA FIRST
संवाददाता

बरगी डेम हादसा : ऑरेंज अलर्ट के बाद भी गहरे पानी में उतार दिया क्रूज
एक के बाद एक हादसों से दहला मध्य प्रदेश, धार के बाद बरगी और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर मंडराया काल
सड़क पर सुरक्षित नहीं जिंदगी, पानी में भी नहीं बचाव के साधन, मातम में बदले खुशी के पल
बुधवार को धार में 16 जिंदगियां हो गईं काल-कवलित, गुरुवार को बरगी में 9 मौत, श्योपुर के 6 लोग दिल्ली एक्सप्रेस-वे पर जिंदा जल गए
बरगी डेम घटना पर सरकार ने युद्ध स्तर पर चलाया बचाव राहत कार्य, 24 को सुरक्षित बचाया, 9 अब भी लापता
इमरजेंसी की कोई तैयारी नहीं, फिर भी खराब मौसम में पानी में उतार दिया क्रूज, आधे लोगों के पास ही थी लाइफ जैकेट
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बुधवार से शुरू हुए एक के बाद एक हादसों से मध्य प्रदेश दहल गया। पहले बुधवार को प्रदेश के पश्चिमी हिस्से धार में दिल दहलाने वाली सड़क दुर्घटना हुई, जिसमें 16 निर्दोष जिंदगियां काल-कवलित हो गईं। सरकार इस सदमे से अभी पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि गुरुवार को प्रदेश का दक्षिण-पूर्वी हिस्सा एक और दर्दनाक हादसे का शिकार हो गया।
इस बार काल जमीन पर नहीं, गहरे पानी पर मंडराया और ताजा खबर के मुताबिक अब तक 9 लोग असमय मौत के मुंह में समा गए। 9 अब भी लापता हैं, जिन्हें युद्ध स्तर पर तलाशा जा रहा है, लेकिन आसार ये ही हैं कि अब कोई चमत्कार ही इन जिंदगियों को पुनर्जीवन दे सकता है।
अभी प्रदेश इन दो हादसों से गमगीन था ही कि एक खबर बाहर से आई, जिसमें प्रदेश के ही 6 लोग जिंदा जल गए। ये घटना मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेस-वे पर हुई। प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने असमय मौत के मुंह में समाए लोगों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट करने के साथ पीड़ित परिवारों को मुआवजा भी दिया। सरकार यहीं नहीं रुकी, उसने इन हादसों की गहरी पड़ताल भी शुरू कर दी है और दोषियों की जिम्मेदारी तय करने का काम शुरू कर दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो।
ब रगी का बांध! यानी अथाह जल। माई नर्मदा का जल यहां सागर का स्वरूप ले लेता है। इसी गहरे जल में गुरुवार को लहरें उठ रही थीं। हवा तेज थी। आसमान में जरूर सूरज चमक रहा था, लेकिन मौसम विभाग ने प्रकृति के एकाएक पलटवार का ऑरेंज अलर्ट जारी कर रखा था। बावजूद इसके जिम्मेदारों ने पर्यटकों से भरा क्रूज, यानी बड़ी नौका गहरे पानी में उतार दी। इस बड़ी नाव में 40 से 45 लोग सवार थे। इनमें ज्यादातर परिवार थे।
यानी मासूम बच्चे व महिलाएं। ये नाव किनारे से महज 300 मीटर का फासला भी तय नहीं कर पाई और गहरे जल में अकस्मात समा गई। इसके साथ ही हंसती-खेलती जिंदगियां भी पानी में समा गईं। घटना के बाद 4 शव निकाले जा सके थे और शुक्रवार सुबह तक 9वां शव निकाला गया।
अभी 9 लोगों की तलाश की जा रही है। हादसे का प्रमुख कारण मौसम विभाग की चेतावनी को नजरअंदाज करना माना जा रहा है। मौसम विभाग ने एक दिन पहले ही बरगी के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। 45 किमी की रफ्तार से हवा चल रही थी, जिससे बांध के ठहरे हुए पानी में पहले हिलोरें उठीं और फिर ये ही हिलोरें तेज लहरों में बदल गईं।
क्रूज इन लहरों से पार न पा सका और सबके सामने देखते ही देखते पानी में समा गया। क्रूज चलाने वाले पायलट ने भी स्वीकारा कि हम बैलेंस न बना सके। ये अक्षम्य अपराध है और सरकार को इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना चाहिए। दूसरा कारण लाइफ जैकेट को लेकर बरती गई लापरवाही है।
नौकायन के नियमों के तहत यात्रियों को लाइफ जैकेट पहनाने की जिम्मेदारी क्रूज ऑपरेटर की रहती है, लेकिन बरगी हादसा गवाह है कि आधे से ज्यादा लोगों के पास लाइफ जैकेट थी ही नहीं। जिन्होंने लाइफ जैकेट पहनी थी, उनकी जान बच गई।
क्रूज डूब रहा था, जिम्मेदारों के पास देखने के अलावा कोई चारा नहीं
बरगी में क्रूज के जरिये पर्यटकों को लुभाने वाले सिस्टम के पास ऐसे कोई साधन-संसाधन भी नहीं थे, जो ऐसे हादसों में तुरंत जान बचाने के काम आएं। ऐसे समय, जब एक-एक पल जान बचाने के लिए जरूरी है, तब कोलकाता व हैदराबाद से संसाधन मंगवाना बहुत बड़ा अपराध है।
सेना तक को बचाव में उतारना बताता है कि पर्यटन स्थल पर सैर-सपाटे के लिए दिए जा रहे निमंत्रण कितने जानलेवा हैं। हादसा स्थल के आसपास रोशनी तक की व्यवस्था नहीं थी। अंधेरे के कारण बचाव कार्य में भारी परेशानी सामने आई।
एनडीआरएफ की टीम को बुलाने में भी लेटलतीफी की बात सामने आई है। सरकार जरूर वक्त रहते चौकन्ना हुई और उसने अपने दो मंत्रियों को तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना किया, ताकि बचाव कार्य में कोई ढिलाई न आए।
धार हादसा... आरटीओ- पुलिस क्या कर रही थी?
धार हादसे में भी ये बात सामने आई कि नेशनल हाईवे पर सड़क सुरक्षा के इंतजाम बेहद नाकाफी थे। डिवाइडर भी तय मापदंड के अनुरूप नहीं थे। नतीजे में 16 लोग मर गए। 25 से ज्यादा अब भी अस्पतालों में जीवन-मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। जांच में सामने आया कि घटनास्थल पर रोड सेफ्टी नियमों को ताक में रख दिया गया था।
लोडिंग वाहन चालक की लापरवाही भी सामने आई है, जिसने मवेशी व सामान ढोने वाले वाहन में लोगों को ठूंसकर भरा था। पुलिस व आरटीओ की भूमिका पर भी घटना के बाद से ही सवाल उठ रहे हैं, जिसके कारण इलाके में आक्रोश उपजा हुआ है। उधर, मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेस-वे पर हुआ हादसा भी जांच का विषय हो गया है।
श्योपुर का एक पूरा परिवार जिंदा जल गया। 6 लोग वैष्णोदेवी के दर्शन कर लौट रहे थे। आर्टिगा कार में ये सब लोग सवार थे। कार एकाएक आग का गोला बन गई और दरवाजे ऑटोमेटिक लॉक हो गए। मृतकों के शव बुरी तरह जल गए।
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