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क्रूज हादसा: 9 की मौत; 9 लापता, रेस्क्यू फ़ोर्स ने साहस दिखाकर 28 लोगों को बचाया

KHULASA FIRST

संवाददाता

01 मई 2026, 3:14 pm
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क्रूज हादसा

लाइफ जैकेट में 4 साल के बेटे को छाती से चिपकाए मिली मां

खुलासा फर्स्ट, जबलपुर।
बरगी डेम में गुरुवार शाम पर्यटन विभाग का क्रूज तेज डूब गया। अब तक 9 शव बरामद हुए हैं। 24 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है। प्रशासन के अनुसार, 9 से अधिक लापता हैं। 40 से 45 पर्यटक सवार थे। एसडीईआरएफ के साहस से कई जानें बच गईं।

हादसा किनारे से 300 मीटर दूर हुआ। बरगी सिटी सीएसपी अंजुल मिश्रा ने बताया शुरुआती रेस्क्यू में एसडीईआरएफ ने कई लोगों को बचाया, पर अंधेरा व खराब मौसम से राहत कार्य प्रभावित हुआ।

शुक्रवार सुबह फिर रेस्क्यू किया गया। हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन के साथ राष्ट्रीय टीमें भी तैनात की गई हैं। हाइड्रॉलिक मशीनों और पोकलेन की मदद से क्रूज को निकालने की कोशिश जारी है।

मुख्यमंत्री ने जताया शोक
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस हृदयविदारक घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

एसडीईआरएफ ने अंधेरे में चलाया ऑपरेशन
अंधेरा और बारिश के बीच एसडीईआरएफ टॉर्च की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया। क्रूज को रस्सियों से बांधकर किनारे लाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। सेना भी रेस्क्यू में शामिल है। हैदराबाद से स्पेशल टीम और एक हेलीकॉप्टर बुलाया गया है, जबकि कोलकाता से पैरामिलिट्री टीम पहुंच चुकी है। हाइड्रोलिक मशीन से नदी क्षेत्र को पाटकर क्रूज तक पहुंचने और फंसे लोगों को निकालने की कोशिश जारी है।

जानकारी के अनुसार क्रूज करीब 20 फीट गहरे पानी में फंसा है। जेसीबी और नाव की मदद से उसे लगभग 30 मीटर तक खींचा गया, लेकिन आगे नहीं बढ़ सका। अब पोकलेन मशीन और भारी उपकरणों से उसे किनारे लाने का प्रयास जारी है। साथ ही गड्ढा खोदने की तैयारी भी की जा रही है।

क्रूज के पायलट महेश ने बताया, 'सुरक्षा के इंतजाम तो थे, लेकिन अचानक तेज तूफान के चलते क्रूज अनियंत्रित हो गया। किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला।' महेश को 10 साल का अनुभव है।

आयुध निर्माणी खमरिया के ए3 सेक्शन में कार्यरत कर्मचारी कामराज आर्य परिवार के 15 लोगों के साथ घूमने गए थे। कामराज के माता-पिता भी साथ में थे, लेकिन वह डैम के किनारे बैठे हुए थे। कामराज के साथ उनकी पत्नी, भाभी और बच्चे क्रूज में घूमने गए हुए थे। कामराज मूलत: कर्नाटक के हैं। उनके एक बेटे को बचा लिया गया है। कामराज, उनकी पत्नी और एक बेटा लापता है।

बरगी शहर के पुलिस अधीक्षक अंजुल मिश्रा ने बताया कि 15 लोगों को बचा लिया गया, जबकि करीब 10 लोग अभी भी लापता हैं. मिश्रा ने कहा कि नदी में क्रूज़ बोट पर 29 लोग सवार थे, जब यह अचानक आए तूफान के कारण पलट गई. चार शव बरामद किए गए हैं, जबकि लापता यात्रियों को ढूंढने और बचाने के लिए ऑपरेशन ज़ोरों पर है.

लाइफ जैकेट पहनने का मौका नहीं मिला
क्रूज पायलट महेश ने बताया वह 10 साल से सेवा में है और सभी सुरक्षा उपकरण मौजूद थे, लेकिन तूफान इतनी तेजी से आया कि यात्रियों को लाइफ जैकेट पहनने का मौका नहीं मिला। अधिकारियों के मुताबिक मृतकों और लापता लोगों की संख्या में बदलाव संभव है क्योंकि रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है।

पर्यटन विभाग के अधिकारी बोले- 20 साल पुराना है क्रूज
पर्यटन विभाग के अधिकारी योगेंद्र रिछारिया ने बताया बरगी डैम में एक क्रूज संचालित किया जा रहा है। इसका निर्माण 2006 में किया गया था। इसकी क्षमता 60 यात्रियों की है। वहीं दूसरा क्रूज खराब है।

पर्यटन मंत्री बोले- 22 लोगों को बचाया
पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने कहा यह दुखद हादसा है। 22 लोगों को बचाया गया है। चार के शव मिले हैं। लगातार रेस्क्यू चल रहा है। बाकी लापता है। क्रूज नीचे फंस गया है। एनडीआरएफ की टीम क्रूज को बाहर निकालेगी। इसके बाद मृतकों की वास्तविक संख्या पता चलेगी।

बेटी बोली- मां ने भाई को पकड़ लिया था
दिल्ली से घूमने आई एक फैमिली भी हादसे का शिकार हुई है। सिया ने बताया कि वे अपने नाना-नानी, माता-पिता और छोटे भाई के साथ बरगी डैम घूमने आए थे। सिया के मुताबिक उसकी मां (मेरीना) ने लाइफ जैकेट पहन रखी थी, जबकि छोटे भाई ने नहीं पहनी थी।

हादसे के दौरान मां ने भाई को कसकर पकड़ लिया था। उसने बताया कि बारिश शुरू होते ही क्रूज पलट गया। सिया को अब भी उम्मीद है कि उसकी मां और भाई सुरक्षित बाहर आ जाएंगे, क्योंकि मां ने लाइफ जैकेट पहन रखी थी।

क्रूज 30 मीटर तक खींचा गया, अब आर्मी की मदद ली जाएगी
जेसीबी और नाव की मदद से डूबे क्रूज को घाट से लगभग 30 मीटर दूरी तक लाया गया है। हालांकि आगे खींचने में सफलता नहीं मिल रही है। अब रेस्क्यू ऑपरेशन में आर्मी की मदद ली जा रही है। मौके पर पोकलेन मशीन भी बुलाई जा रही है, जिसके बाद क्रूज को और करीब लाकर उसमें फंसे लोगों को निकालने की कोशिश की जाएगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार घाट के पास एक गहरा गड्ढा भी किया जाएगा ताकि रेस्क्यू कार्य में सुविधा मिल सके।

पूर्व विधायक ने लगाया लापरवाही का आरोप
बरगी के पूर्व विधायक संजय यादव ने हादसे को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं व कहा क्रूज की मरम्मत होनी थी और वह पूरी तरह चलने लायक नहीं था।

हेल्पलाइन नंबर जारी... बरगी बांध में क्रूज पलटने की घटना को देखते हुए कलेक्टर कार्यालय, जबलपुर में कंट्रोल रूम बनाया गया है। कंट्रोल रूम का फोन नंबर 0761-2624355 है, जो रातभर एक्टिव रहेगा। इसका इंचार्ज वीरेन्द्र सिंह को बनाया गया है।

चश्मदीदों का दावा: क्रूज पर 60 से 65 लोग सवार थे
प्रत्यक्षदर्शियों और क्रूज पर मौजूद एडवोकेट रोशन आनंद के सनसनीखेज खुलासे ने पूरे तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। बताया जा रहा है कि क्रूज पर यात्रियों की संख्या को लेकर भारी हेरफेर किया गया। जहां सरकारी आंकड़े 25 से 30 लोगों की बात कह रहे हैं, वहीं चश्मदीदों का दावा है कि क्रूज पर 60 से 65 लोग सवार थे, जिनमें मासूम बच्चों की संख्या अधिक थी।

क्रूज के भीतर लाइफ जैकेट तो मौजूद थे, लेकिन उन्हें अलमारियों में बंद रखा गया था और किसी भी यात्री को चढ़ते समय जैकेट नहीं पहनाई गई। प्रशासन के पास उन सवालों का कोई जवाब नहीं है जो अब इस हादसे की परतों को उधेड़ रहे हैं।

कप्तान ने दिखाई कायरता... मझधार में जब मौत सामने खड़ी थी, तब जिम्मेदारी का निर्वहन करने के बजाय क्रूज का कप्तान यात्रियों को भगवान भरोसे छोड़कर कूद गया। यह कायरता और आपराधिक लापरवाही उस वक्त सामने आई जब तूफानी लहरें क्रूज के भीतर समाने लगी थीं।

अंधेरा और खराब मौसम रेस्क्यू ऑपरेशन में बड़ी बाधा बने, जिसके कारण कई जिंदगियां लहरों में गुम हो गईं। लापता लोगों की सूची में पांच साल के मासूम तमिल, 6 साल के विराज और 9 साल के मयूरम शामिल हैं, जिनके परिजन अब भी किनारे पर टकटकी लगाए बैठे हैं।

इनकी हुई मौत... इस हादसे ने नीतू सोनी (43), सोभाग्यम अलागन (42), दिल्ली की मधुर मैसी (62) और खमरिया की काकुलाझी (38) की जान ले ली है, जिनके शव बरामद किए जा चुके हैं। वहीं कामराज (39), रेशमा सैय्यद (66), पूनम थापा (7), ज्योति श्रीवास (34), आर.एच. सैय्यद और समीम जफ़र जैसे कई लोग अब भी लापता हैं। यह महज एक हादसा नहीं है, बल्कि नियमों को ताक पर रखकर मुनाफे की खातिर मासूमों को मौत के मुंह में धकेलने का संगठित अपराध प्रतीत होता है।

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