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एज्यूर शॉपिंग मॉल के निर्माण कार्य में अदालत ने फंसाया पेंच: नियमों के विपरीत हो रहे निर्माण के बाद भी निगम अधिकारी कार्रवाई करने में असहाय

KHULASA FIRST

संवाददाता

11 मार्च 2026, 5:07 pm
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एज्यूर शॉपिंग मॉल के निर्माण कार्य में अदालत ने फंसाया पेंच

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम के अफसरों की मेहरबानी से नियमों को ताक पर रखकर एज्यूर शॉपिंग मॉल का निर्माण भमोरी क्षेत्र में बदस्तूर जारी है। जबकि मॉल के निर्माण में नियम विरुद्ध कई प्लॉटों का संयुक्तीकरण किया जा रहा है। मामले का खुलासा होने के बाद निगम ने नक्शा निरस्त कर दिया, लेकिन अदालत का पेंच फंसने के बाद निगम के जिम्मेदार कार्रवाई करने में असहाय साबित हो रहे हैं।

निगम बिल्डिंग परमिशन विभाग के अफसरों की मिलीभगत से शहर में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण जारी हैं। इनकी शिकायतों के बाद भी निगम अवैध निर्माण रोकने की जहमत नहीं उठाता है, बल्कि बिल्डिंग परमिशन के अफसर इनसे मिलीभगत कर अपनी जेब भरने लगते हैं। यही वजह है कि अवैध निर्माण हो जाने के बाद बिल्डिंग अफसर नोटिस-नोटिस का खेल खेलकर कार्रवाई करने से बचते रहते हैं।

ऐसा ही इन दिनों निगम जोन 7 में एज्यूर शॉपिंग मॉल के निर्माण को लेकर भी देखा जा सकता है। बताया जाता है कि इसका निर्माण एसीएस बिल्डर डेवलपर प्रालि के अंकित कटारिया द्वारा किया जा रहा है। निर्माणकर्ता द्वारा खुलेआम कई प्लॉटों का संयुक्तीकरण कर शॉपिंग मॉल बनाया जा रहा है।

इसकी शिकायत निगम अफसरो तक पहुंची तो उन्होंने नोटिस जारी कर नक्शा निरस्त कर दिया, लेकिन माल के कर्ताधर्ता ने अदालत से निगम के नक्शा निरस्त करने के फैसले को ही निरस्त करा दिया। इसके बाद निर्माणकर्ता की मनमानी जारी है।

विकास कार्य में बाधा बन गया है मॉल
बताया जाता है कि निगम बिल्डिंग परमिशन के अधिकारियों ने एज्यूर शॉपिंग मॉल के कर्ताधर्ता अंकित कटारिया से मिलीभगत कर अपनी कमाई शुरू कर दी है। इसके चलते जितनी बार शिकायत होती है निगम अफसर उतनी ही अधिक राशि वसूलकर मामले को रफादफा कर देते हैं, जबकि एज्यूर शॉपिंग मॉल निगम के ही विकास कार्य में बड़ी बाधा बन गया है।

बताया जाता है कि निगम ने मास्टर प्लान के तहत तीस मीटर चौड़ी सड़क निर्माण का निर्णय लिया है। जबकि निगम अफसर पहले ही 18 मीटर चौड़ी सड़क के हिसाब से मॉल का नक्शा पास कर चुके हैं। निगम अफसरों ने आधा निर्माण होने के बाद अपनी गलती सुधारने के लिए नक्शा निरस्त कर दिया, लेकिन मॉल के कर्ताधर्ता ने अदालत से ऑर्डर लेेकर निगम अफसरों को असहाय कर दिया।

निगम की अनुमति पर सवाल
बताया जाता है कि मॉल का निर्माण प्लॉट नंबर 14, 15 और 16 का संयुक्तीकरण कर किया जा रहा है। इसका निर्माण एसीएस बिल्ड डेवलपर प्रालि के अंकित कटारिया द्वारा किया जा रहा है। वहीं मास्टर प्लान 2021 में यहां की सड़क 30 मीटर चौड़ी दर्शाई गई है, लेकिन इसके बाद भी निगम के बिल्डिंग परमिशन विभाग ने शॉपिंग मॉल के निर्माण को अनुमति दे दी, जिससे नियमों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

निगम ने किए नक्शे पास
सूत्रों की मानें तो नगर निगम के बिल्डिंग परमिशन विभाग द्वारा ऐसे सात अन्य नक्शे भी पास किए गए हैं। इनमें छोटू नजान और शिवप्रसाद तिवारी, भूखंड क्रमांक 10 पर सोनम गोडखे, भूखंड क्रमांक 9 पर राजेश गर्ग, भूखंड क्रमांक 7 और 8 पर बलराज तथा भूखंड क्रमांक 23 पर गिरधर महल और मेघदूत टॉवर शामिल बताए जा रहे हैं।

निगम अफसरों द्वारा इन नक्शों को दी गई मंजूरियों को लेकर अब नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं और मामले की जांच की मांग भी की जा रही है। निगम जनकार्य प्रभारी राजेंद्र राठौर से सड़क निर्माण में बाधक बन रहे एज्यूर शॉपिंग मॉल के संबंध में जानकारी ली तो उन्होंने कहा कि यदि सड़क निर्माण में शॉपिंग मॉल बाधक बना तो उसे तोड़ा जाएगा। यह सड़क 2021 के मास्टर प्लान के तहत बनाई जा रही है। जबकि शॉपिंग मॉल को निर्माण की मंजूरी वर्ष 2024 में दी गई है।

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