संविधान विशेषज्ञ का निधन: 97 साल की उम्र में ली आखिरी सांस; भारतीय संसदीय परंपराओं के युग का अंत
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
देश के प्रख्यात संवैधानिक विशेषज्ञ, पूर्व लोकसभा महासचिव और पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. सुभाष सी. कश्यप का गुरुवार को 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय संसदीय परंपराओं, संवैधानिक अध्ययन और लोकतांत्रिक विमर्श के क्षेत्र में एक युग का अंत माना जा रहा है।
100 से अधिक पुस्तकों की रचना की
डॉ. कश्यप देश के सबसे प्रतिष्ठित संवैधानिक विद्वानों में गिने जाते थे। उन्होंने संविधान, संसद और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर 100 से अधिक पुस्तकों की रचना की। उनकी चर्चित पुस्तकों में ‘आवर पार्लियामेंट’ और ‘आवर कॉन्स्टिट्यूशन’ शामिल हैं, जिन्हें संविधान और संसदीय प्रणाली को समझने के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ माना जाता है।
37 वर्षों तक संसद की सेवा
डॉ. कश्यप वर्ष 1953 में संसद सचिवालय से जुड़े थे। उन्होंने भारत की प्रथम लोकसभा से लेकर नौवीं लोकसभा तक विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 1983 से 1990 तक वे लोकसभा के महासचिव रहे। इस दौरान उन्होंने भारतीय संसदीय प्रक्रियाओं को मजबूत बनाने और संसदीय परंपराओं को व्यवस्थित स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
स्वतंत्रता आंदोलन से भी रहा जुड़ाव
वर्ष 1929 में उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के चांदपुर में स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार में जन्मे डॉ. कश्यप ने कम उम्र में ही देशभक्ति और सामाजिक चेतना का परिचय दिया। किशोरावस्था में उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की तथा बिजनौर और मेरठ में छात्र आंदोलनों का नेतृत्व भी किया।
संविधान और लोकतंत्र के प्रखर व्याख्याता
संविधान, संसद, चुनाव सुधार और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर उनकी गहरी समझ के कारण उन्हें देशभर में सम्मान प्राप्त था। वे अक्सर राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी स्पष्ट और संतुलित राय रखते थे तथा संवैधानिक विषयों पर उनकी टिप्पणियां नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शक मानी जाती थीं।
देशभर में शोक की लहर
डॉ. सुभाष कश्यप के निधन पर राजनीतिक, शैक्षणिक और संवैधानिक जगत से जुड़े लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्हें भारतीय लोकतंत्र और संसदीय व्यवस्था का सच्चा प्रहरी बताते हुए उनके योगदान को सदैव याद रखने की बात कही जा रही है।
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