फिल्मी उम्मीदें बनाम असली शादी: सुहागरात पर पत्नी नहीं शरमाई तो पति पहुंचा फैमिली कोर्ट
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्यप्रदेश के भोपाल में शादी के बाद रिश्तों में आई दरार की वजहें चौंकाने वाली हैं। कहीं पत्नी का सहज व्यवहार पति को खटक गया तो कहीं पति ने करवा चौथ का व्रत नहीं रखा तो पत्नी को लगा कि प्यार कम हो गया।
एक मामले में दुल्हन की एंट्री और गृह प्रवेश फिल्मी अंदाज में नहीं हुआ, वहीं हनीमून का प्लान भी उसकी उम्मीद के मुताबिक नहीं था।
काउंसलर्स के सामने पहुंचे इन मामलों में एक बात कॉमन थी-पति-पत्नी असल रिश्ते को फिल्मों और सोशल मीडिया पर दिखने वाली ‘परफेक्ट लव स्टोरी’ के पैमाने पर परख रहे थे।
जब सुहागरात का सहज व्यवहार बना शक की वजह
डेढ़ साल पहले शादी करने वाले एक दंपति के रिश्ते में शादी के महज एक महीने के भीतर ही तनाव शुरू हो गया।
जानकारी के मुताबिक, शादी के समय पति की उम्र करीब 33 और पत्नी की 29 साल थी।
पति की शिकायत थी कि सुहागरात में पत्नी न तो घूंघट लेकर बैठी और न ही उसके करीब आने पर वैसी झिझक या शर्म दिखाई, जैसी उसने फिल्मों में देखी थी।
पत्नी के इस सहज व्यवहार को पति ने गलत अर्थ में ले लिया। उसे पत्नी के चरित्र पर शक होने लगा। इसके बाद वह बार-बार पत्नी से सवाल करने लगा। धीरे-धीरे विवाद इतना बढ़ा कि मामला फैमिली कोर्ट तक पहुंच गया।
काउंसलिंग के दौरान सामने आया कि पति इस स्थिति से इतना प्रभावित हुआ कि वह डिप्रेशन में चला गया। फिलहाल मनोचिकित्सकीय मदद से उसका इलाज भी कराया जा रहा है।
करवा चौथ पर ‘फिल्मी प्यार’ नहीं मिला तो पत्नी नाराज
दूसरा मामला भी फिल्मी अपेक्षाओं से जुड़ा है। इस दंपति की शादी को करीब एक साल हुआ है। पहले करवा चौथ पर पत्नी ने पति से भी उसके लिए व्रत रखने की उम्मीद की।
उसका कहना था कि फिल्मों और टीवी सीरियल्स में पति अपनी पत्नी के लिए व्रत रखते हैं, इसलिए उसके पति को भी ऐसा करना चाहिए। पति ने व्रत रखने से इनकार कर दिया
पत्नी की दूसरी शिकायत यह थी कि उसका पहला करवा चौथ बेहद सामान्य तरीके से बीता। न वैसा तामझाम था, न घर में फिल्मी अंदाज की रौनक और न ही कोई खास सरप्राइज।
पति ने उसे सिर्फ एक मोबाइल फोन गिफ्ट किया। पत्नी को उम्मीद थी कि पहला करवा चौथ उसके लिए बेहद खास होगा और वह इस पूरे सेलिब्रेशन को अपनी सोशल मीडिया रील्स में भी दिखाएगी। उम्मीद और वास्तविकता के बीच का यह अंतर विवाद की वजह बन गया।
‘धांसू एंट्री’ नहीं हुई, हनीमून भी मनपसंद नहीं था
तीसरे मामले में पत्नी की शिकायत कुछ और थी। उसने शादी से पहले अपने मन में शादी की एक पूरी फिल्मी तस्वीर बना रखी थी।
पत्नी चाहती थी कि शादी में उसकी और पति की एंट्री बेहद शानदार और यादगार हो। लेकिन पति ने इसे ‘फिल्मी चोंचले’ बताते हुए ऐसा करने से मना कर दिया।
इसके बाद ससुराल में गृह प्रवेश भी बेहद सामान्य तरीके से हुआ। पत्नी के मुताबिक, उसने तब भी बात को नजरअंदाज किया।
लेकिन जब पति ने उसके लिए उसकी पसंद का हनीमून डेस्टिनेशन तक प्लान नहीं किया, तो उसका नाराज होना बढ़ गया। पत्नी ने जब इस बारे में बात की तो पति ने उसे डांट दिया।
इसके बाद पत्नी घर छोड़कर मायके चली गई। पति ने पत्नी के व्यवहार से आहत होकर अक्टूबर में फैमिली कोर्ट में मामला पहुंचाया।
हालांकि, काउंसलिंग के दौरान दोनों के बीच बातचीत हुई और अब इस मामले में सुलह हो चुकी है। दंपती दोबारा साथ हैं।
फिल्मों की दो घंटे की कहानी, लेकिन शादी जिंदगीभर की
काउंसलर्स के मुताबिक, फिल्मों में प्रेम और शादी को अक्सर बेहद खूबसूरत, रोमांटिक और नाटकीय अंदाज में दिखाया जाता है। समस्या तब शुरू होती है, जब लोग पर्दे पर दिखाई जाने वाली कहानी को अपनी शादी का पैमाना मान लेते हैं।
फिल्म में रोमांस कुछ घंटों का होता है, लेकिन वास्तविक जीवन में रिश्ते को रोज निभाना पड़ता है। हर दंपती का स्वभाव, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक माहौल और पसंद अलग होती है।
ऐसे में यह जरूरी नहीं कि पार्टनर वही करे, जो किसी फिल्म के किरदार ने किया था।
सोशल मीडिया ने बढ़ाई ‘परफेक्ट कपल’ बनने की चाह
काउंसलर्स का मानना है कि फिल्मों के साथ सोशल मीडिया ने भी रिश्तों में अवास्तविक उम्मीदें बढ़ाई हैं। आज शादी, करवा चौथ, बर्थडे, हनीमून से लेकर रोजमर्रा के रिश्तों तक को सोशल मीडिया पर दिखाने का चलन बढ़ा है। ऐसे में कई लोग अपनी निजी जिंदगी की तुलना दूसरों की सोशल मीडिया पोस्ट और रील्स से करने लगते हैं।
नतीजा यह होता है कि जो चीज सामान्य वैवाहिक जीवन का हिस्सा हो सकती है, वही किसी को रिश्ते में कमी नजर आने लगती है।
‘रिश्ता फिल्मी सीन नहीं, रोज निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है’
प्रतिभा राजगोपाल, निदेशक, मीडिएशन सेंटर के मुताबिक, पति-पत्नी के बीच विवाद की वजह हमेशा कोई बड़ी घटना नहीं होती। कई बार रिश्ते को लेकर बनी अवास्तविक उम्मीदें छोटी-छोटी बातों को बड़ा बना देती हैं।
जरूरी है कि फिल्मी किरदार और वास्तविक जीवन के रिश्तों के बीच अंतर समझा जाए। शादी में संवाद, विश्वास, एक-दूसरे की पसंद का सम्मान और वास्तविक परिस्थितियों को स्वीकार करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
फिल्मों में ‘परफेक्ट कपल’ दिख सकता है, लेकिन असल जिंदगी में मजबूत रिश्ता वही है, जिसमें दोनों एक-दूसरे की वास्तविकता को समझकर साथ चलना सीखें।
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