‘सेना’ की निगरानी में ‘रामलला’: ऑपरेशन सिंदूर में कमाल करने वाले एयर मार्शल के हवाले अब राम मंदिर ट्रस्ट 5885 दावेदार; एक का हुआ चयन
KHULASA FIRST
संवाददाता

अयोध्या में चढ़ावा चोरी के 3 महीने बाद राम मंदिर ट्रस्ट का पहला सीईओ हुआ तैनात, रिटायर्ड फौजी पर भरोसा
ट्रस्ट का भी हुआ पुनर्गठन, एक महिला सहित 3 नए ट्रस्टी बनाए गए, इनमें से एक रामजी की कानूनी लड़ाई में वकील रहे
उत्तर प्रदेश में ही रहने वाले रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा पर सबने जताया भरोसा, फाइटर पायलट से सीधे रामजी के सीईओ बने
चंपतराय की जगह गोविंददेव गिरिजी महाराज बने ट्रस्ट के महासचिव, सीईओ गिरि को ही करेंगे रिपोर्ट
राम मंदिर आंदोलन के सबसे बड़े चेहरे व विहिप के पूर्व मुखिया अशोल सिंघल के रिश्तेदार बनाए गए ट्रस्टी
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जग प्रसिद्ध ‘रामलला विराजमान’ अब एक फौजी की देखरेख में अष्टयाम अवधपुरी में आनंद से रहेंगे। रामलला की प्राकट्यस्थली अयोध्या व राघवेंद्र सरकार का मंदिर और मंदिर का ट्रस्ट, सब कुछ अब देश के रिटायर्ड एयर मार्शल की निगरानी में होगा।
एक फौजी की मौजूदगी में राम भक्तों को भरोसा है कि रामजी के नाम से आने वाला करोड़ों का चढ़ावा व लाखों के दान की अब बंदरबांट नहीं होगी। सनातन धर्म के मानबिंदु मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान रामजी का मंदिर व अयोध्या को बीते महीनों में शर्मसार होना पड़ा था।
यहां दान चोरी की बड़ी घटना सामने आई थी। इस कलंकित करने वाली घटना के बाद देश ही नहीं विश्वभर में भारत व हिंदू धर्म को नीचा देखना पड़ा। टॉस्क फोर्स बना। जांच हुई। दोषियों का खुलासा हुआ। चोरी किया गया दान-चढ़ावा जब्त किया गया। गिरफ्तारियां हुईं।
ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय का इस्तीफा हुआ। ट्रस्ट के पदाधिकारियों को हटाया गया। भविष्य में ऐसी दुःखद घटना की पुनरावृत्ति न हो, उसके लिए अब ट्रस्ट का भी पुनर्गठन कर दिया गया। कॉरपोरेट जगत की तरह मंदिर के लिए भी एक पूर्णकालिक सीईओ तय कर लिया गया।
एक फौजी के हाथ में कमान देकर मंदिर ट्रस्ट ने अपने इरादे साफ कर दिए कि अब मंदिर का समूचा प्रबंधन कड़क अनुशासन व निगरानी में होगा। तीन नए ट्रस्टी में पहली बार एक महिला को भी जगह दी गई।
राम मंदिर आंदोलन के मुख्य किरदार विहिप के स्व. अशोक सिंघल के रिश्तेदार व रामजी के जन्मस्थान की लड़ाई कोर्ट में लड़ने वाले वकील को ट्रस्ट में जगह मिली है। आने वाले उत्तर प्रदेश चुनाव के मद्देनजर रिटायर्ड एयर मार्शल की मंदिर में तैनाती पर राजनीति भी तेज हो गई है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अयोध्या में हुई बैठक में सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया गया है।
चयन प्रक्रिया में चयन समिति को कुल 5,585 आवेदन मिले थे, जिनमें से छंटनी के बाद 3 नाम फाइनल करके ट्रस्ट के सामने रखे गए थे। यह महत्वपूर्ण बैठक अयोध्या में मणिरामदास छावनी स्थित ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के आवास पर हुई।
इसमें ट्रस्ट का पुनर्गठन भी हुआ। इस बैठक में तीन नए ट्रस्टी- अयोध्या के अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय, दिल्ली के महेश भागचंदका और शिकोहाबाद की निर्मला यादव को भी शामिल किया गया।
मंदिर के प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए पहली बार पूर्णकालिक सीईओ का पद सृजित कर यह कमान सौंपी गई है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या राम मंदिर के इतिहास में पहली बार सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है। इसके पीछे सबसे अहम कारण मंदिर की प्रशासनिक और प्रबंधन व्यवस्था में सुधार है।
मंदिर के भव्य निर्माण और रोजाना आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की व्यवस्था को संभालने के लिए अब तक ट्रस्ट के संत और पारंपरिक पदाधिकारी देखरेख कर रहे थे। एक फौजी अधिकारी के आने से मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में सख्त अनुशासन, पारदर्शिता और कॉरपोरेट जैसी कार्यशैली आएगी।
चढ़ावे पर पारदर्शिता और सुरक्षा की निगरानी, मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी और चोरी के मामलों के बाद प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण मजबूत करने की सख्त जरूरत महसूस की गई थी। एक उच्च पदस्थ सैन्य अधिकारी की मौजूदगी सुरक्षा और वित्तीय प्रबंधन में चूक की गुंजाइश को खत्म करेगी।
इसके लिए पहले सीईओ की चयन प्रक्रिया भी पारदर्शी व लंबी रही। इस पद के लिए 5,500 से अधिक आवेदन आए थे, जिन्हें तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने जांचा-परखा। तीन सदस्यीय समिति ने छंटनी के बाद इंटरव्यू और योग्यता के आधार पर तीन नाम सुझाए थे, जिनमें से मुहर जितेंद्र मिश्रा के नाम पर लगी।
जानकारों का मानना है कि एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (जिन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी सैन्य गतिविधियों में पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व किया था) की छवि एक कड़क और ईमानदार अधिकारी की रही है, जो श्रद्धालुओं के बीच ट्रस्ट की साख को और मजबूत कर सकती है।
दूसरी ओर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे विपक्षी दलों ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का तर्क है कि हालिया वित्तीय विवादों और गड़बड़ियों से ध्यान भटकाने के लिए पूर्व सैन्य अधिकारी को आगे लाया गया है।
यह नियुक्ति इस बात का संकेत है कि अब राम मंदिर का प्रबंधन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे अत्यधिक पेशेवर, सुरक्षित और आधुनिक प्रशासनिक तंत्र के जरिये चलाया जाएगा।
ऑपरेशन सिंदूर में किया था पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व
जितेंद्र मिश्रा को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के तौर पर कमीशन मिला था। उन्होंने वायुसेना में 38 साल से ज्यादा समय तक सेवा दी। वह फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट रहे हैं। उनका 3,000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव है।
जनवरी 2025 में मिश्रा ने भारतीय वायुसेना की महत्वपूर्ण ऑपरेशनल कमानों में शामिल पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख का पद संभाला था। इसके बाद उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व किया। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था।
भगवान श्रीराम मुझे इस कार्य के लिए सामर्थ्य प्रदान करें: जितेंद्र मिश्रा
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के राम मंदिर ट्रस्ट का पहला सीईओ बनने के बाद प्रतिक्रिया सामने आई है। इसमें वे भगवान श्रीराम का शुक्रिया अदा करते दिखे हैं। अपने चयन को वे प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद बता रहे हैं।
उन्होंने कहा चार दशक तक देश की सेवा करने के बाद अब मुझे प्रभु श्रीराम और रामभक्तों की सेवा का अवसर मिला है। इसके लिए मैं सभी लोगों का शुक्रिया अदा करता हूं। उन्होंने भविष्य की योजनाओं को लेकर कहा कि सीईओ के पद पर अपनी सेवा देने के बाद इस विषय में ट्रस्ट के लोगों के साथ बातचीत कर आगे बढ़ेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि वे प्रभु श्रीराम के भक्तों की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे।
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