कांग्रेस विधायक की भाजपा नेता से गोपनीय मुलाकात से सनसनी: राज्यसभा चुनाव से पहले किस बात की चिंता; तेज हुई प्रदेश में सियासी हलचल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्यप्रदेश कांग्रेस एक बार फिर उसी डर से घिर गई है जो 2020 में उसे सत्ता से बाहर कर गया था। राज्यसभा चुनाव से पहले पार्टी को अपने ही 7 विधायकों के क्रॉस वोटिंग की आशंका सता रही है। ऊपर से कांग्रेस विधायक की बीजेपी नेता वीडी शर्मा से गुपचुप मुलाकात ने सियासी हलचल और तेज कर दी है।
विधायक की वीडी शर्मा से मुलाकात
परसवाड़ा (बालाघाट) के कांग्रेस विधायक मधु भाऊ भगत ने 6 मई को भोपाल में बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा से मुलाकात की। यह मुलाकात गोपनीय रखी गई, लेकिन सूत्रों के अनुसार बात राज्यसभा में क्रॉस वोटिंग को लेकर ही थी।
विधायक भगत ने मुलाकात से साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि शाम को काम के बाद निकलते वक्त इंदौर के कुछ दोस्त मिले, पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा से दुआ-सलाम हुई। वीडी शर्मा को तो उन्होंने दो-चार महीने से देखा भी नहीं।
दिल्ली में दिग्गजों की बैठक, 7 नाम चर्चा में
5 मई को दिल्ली में पूर्व सीएम कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की अहम बैठक हुई। बैठक में करीब सात विधायकों के क्रॉस वोटिंग की आशंका जताई गई। इनमें से अधिकांश ग्वालियर-चंबल क्षेत्र यानी ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाले इलाके के बताए जा रहे हैं।
बैठक में आशंका जताई गई कि बीजेपी में जा चुके पुराने कांग्रेसी विधायकों के जरिए इन विधायकों से संपर्क साधा जा रहा है। नेताओं ने आपस में जिम्मेदारियां बांटकर इन विधायकों से बात करने और नजर रखने का फैसला किया।
राज्यसभा का पेचीदा गणित
जून में मध्यप्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव संभावित है। दिग्विजय सिंह, जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह का कार्यकाल खत्म हो रहा है। एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों के वोट चाहिए। विधायक संख्या के हिसाब से दो सीटें बीजेपी और एक कांग्रेस के खाते में जानी चाहिए।
कांग्रेस के पास भले ही 66 विधायक हैं, लेकिन असल में वोट करने लायक संख्या सिर्फ 63 है। विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा की सशर्त विधायकी, दतिया विधायक राजेंद्र भारती की सजा के बाद सदस्यता जाना और बीना विधायक निर्मला सप्रे का पहले ही बीजेपी के पाले में होना। इन तीन के वोट कांग्रेस की झोली में नहीं आएंगे। यानी 6 वोट भी खिसके तो राज्यसभा की एक सीट हाथ से निकल जाएगी।
कमलनाथ का नाम आगे
कांग्रेस अब किसी बड़े चेहरे को मैदान में उतारकर विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति पर विचार कर रही है। पहले मीनाक्षी नटराजन का नाम सबसे आगे था, लेकिन अब कमलनाथ का नाम उभर रहा है। हालांकि पार्टी बीजेपी के उम्मीदवारों का नाम सामने आने के बाद ही अंतिम फैसला करेगी।
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