मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़: फिर भी केयर सीएचएल पर मेहरबानी क्यों
KHULASA FIRST
संवाददाता

प्रशासनिक चेतावनियों की उड़ाई जा रही धज्जियां
अंकित शाह 99264-99912 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
चर्चित केयर सीएचएल अस्पताल में लंबे समय से चल रहे कथित अवैध निर्माण कार्य को लेकर फिर प्रशासनिक कार्रवाई सवालों के घेरे में है। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर सीएमएचओ कार्यालय की टीम ने अस्पताल का निरीक्षण कर गंभीर आपत्तियां दर्ज कीं और अस्पताल प्रबंधन को लाइसेंस निरस्तीकरण का एक माह का नोटिस जारी किया।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब जनवरी 2026 में भी ‘अंतिम चेतावनी’ दी जा चुकी थी, तो अब फिर एक और ‘अंतिम चेतावनी’ क्यों?
30 जनवरी 2026 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने अस्पताल प्रबंधन को स्पष्ट किया है कि मरीजों के भर्ती रहने के दौरान निर्माण कार्य जारी रखने पर कार्रवाई की जाएगी।
यदि निर्धारित अवधि में नियमों का पालन नहीं किया गया तो मप्र उपचर्यागृह तथा रुजोपचार संबंधी स्थापनाएं नियम-1997 (संशोधित 2021) के तहत पंजीयन निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
नोटिस में यह भी उल्लेख था कि बिना सक्षम अनुमति निर्माण किया जा रहा है और इससे मरीजों व आम नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने की शिकायतें लगातार मिलती रहीं।
अब महीनों बाद फिर एक नया नोटिस जारी किया गया है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि पहली अंतिम चेतावनी का कोई असर नहीं हुआ तो दूसरी चेतावनी का क्या औचित्य है?
मामला केवल अस्पताल प्रबंधन तक सीमित नहीं है। सवाल उन अधिकारियों पर भी उठ रहे हैं, जिनकी जिम्मेदारी नियमों का पालन करवाना और अवैध निर्माण रोकना है।
यदि अस्पताल परिसर में लंबे समय तक निर्माण कार्य चलता रहा तो स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे?
आलोचकों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो मामला नोटिसों और चेतावनियों के चक्र में नहीं फंसता। अब आवश्यकता अस्पताल के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की है।
मरीजों की जान पर भारी पड़ा निर्माण कार्य?
शिकायतों के अनुसार अस्पताल संचालन के दौरान पुरानी बिल्डिंग में तोड़फोड़, ड्रिलिंग और भारी निर्माण गतिविधियां जारी रहीं। अस्पताल में गंभीर मरीज भी भर्ती थे।
बड़ा प्रश्न यह है कि क्या अस्पताल संचालन के दौरान इस प्रकार का निर्माण कार्य वैध है, क्या नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग से आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई थी, क्या मरीजों की सुरक्षा को लेकर कोई विशेष प्रबंध किए गए थे, किसी दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी, इन सवालों के आज तक सार्वजनिक नहीं हो सके हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अस्पताल को बार-बार नोटिस तो दिए जाते हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। इससे यह धारणा मजबूत हो रही है कि रसूखदार संस्थानों के खिलाफ प्रशासनिक सख्ती केवल कागजों तक सीमित रह जाती है।
बताया जाता है कि अस्पताल में चल रहे निर्माण कार्य के वीडियो और दस्तावेज कई बार संबंधित विभागों तक पहुंचाए गए, लेकिन कार्रवाई अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंची। इससे पूरे मामले में संरक्षण और साठगांठ की आशंकाएं भी व्यक्त की जा रही हैं।
केयर सीएचएल का मामला कोई अकेला उदाहरण नहीं माना जा रहा। शहर में बड़ी संख्या में ऐसे अस्पताल और नर्सिंग होम संचालित होने के आरोप हैं जो आवासीय अनुमति प्राप्त भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां चला रहे हैं या स्वीकृत नक्शों से अलग निर्माण कर चुके हैं।
नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के पास ऐसी सैकड़ों शिकायतें लंबित बताई जाती हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में कार्रवाई नोटिसों और औपचारिक पत्राचार से आगे नहीं बढ़ पाती।
जनता का सवाल... कार्रवाई होगी या एक और अंतिम चेतावनी?
अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जनवरी की अंतिम चेतावनी के बाद भी नियमों का उल्लंघन जारी रहा, तो क्या इस बार वास्तव में लाइसेंस निरस्त होगा या फिर जनता को एक और ‘अंतिम चेतावनी’ देखने को मिलेगी?
जब मरीजों की सुरक्षा, जनस्वास्थ्य और कानून के पालन का सवाल हो, तब केवल नोटिस नहीं बल्कि जवाबदेही और कठोर कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है।
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