‘पहले सुनिए, फिर न्याय दीजिए’...: सीजेआई सूर्यकांत ने बताया भरोसेमंद न्याय का मंत्र
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आम नागरिक के लिए न्याय का मतलब केवल केस में राहत, मुआवजा, बरी होने या सजा मिलने तक सीमित नहीं है। न्याय का अनुभव उस समय से शुरू हो जाता है, जब कोई व्यक्ति कानूनी सहायता केंद्र, कोर्ट परिसर या तालुका स्तर के विधिक सेवा प्राधिकरण तक पहुंचता है। इसलिए सबसे जरूरी है कि उसे महसूस हो कि उसकी बात सुनी गई, उसे सम्मान मिला और उसके साथ उचित व्यवहार हुआ।
इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि विधिक सेवा व्यवस्था में संवाद केवल बैठकों और सम्मेलनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। राष्ट्रीय स्तर से लेकर राज्य, जिला, तालुका और पैरा-लीगल वालंटियर्स तक लगातार संवाद जरूरी है।
स्थानीय भाषा में पहुंचे न्याय व्यवस्था
सीजेआई ने कहा कि हर क्षेत्र और समुदाय की समस्याएं अलग होती हैं, इसलिए समाधान भी स्थानीय जरूरतों के मुताबिक होना चाहिए। मध्यप्रदेश के आदिवासी परिवार, गोवा के मछुआरे, गुजरात के प्रवासी मजदूर या मुंबई में कानूनी सहायता मांगने वाली महिला की परिस्थितियां एक जैसी नहीं हो सकतीं। ऐसे में विधिक सेवाओं को स्थानीय भाषा और बोली में लोगों तक पहुंचाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जब तक लोगों की भाषा में उनसे संवाद नहीं होगा और उनकी समस्या उन्हीं के शब्दों में नहीं सुनी जाएगी, तब तक उनकी परेशानी को पूरी तरह समझना और उचित समाधान देना मुश्किल रहेगा।
न्याय के लिए सभी को मिलकर करना होगा काम
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्याय तक पहुंच केवल कानून बनाने से सुनिश्चित नहीं होती। इसके लिए न्यायपालिका, सरकार, विधिक सेवा संस्थाओं और समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने संवाद, गरिमा और समावेशन को न्याय व्यवस्था के तीन महत्वपूर्ण आधार बताया। इनसे संविधान में निहित समान न्याय के वादे को वास्तविक रूप दिया जा सकता है।
पैरा-लीगल वालंटियर्स निभाएं समाजसेवक की भूमिका
सीजेआई ने पैरा-लीगल वालंटियर्स की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उन्हें केवल न्यायिक व्यवस्था की कड़ी या मानदेय पाने वाले व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि समाजसेवक के रूप में काम करना चाहिए। गांवों, कस्बों और मोहल्लों तक सरकारी योजनाओं और कानूनी अधिकारों की जानकारी पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका है।
उन्होंने कहा कि योजनाएं बनाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ वास्तविक हकदार तक पहुंचे।
पहले व्यवहार से बनती है न्याय व्यवस्था की छवि
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि किसी व्यक्ति की न्याय व्यवस्था के बारे में पहली धारणा उसके साथ हुए व्यवहार से बनती है। अस्पताल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि मरीज के साथ डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों का व्यवहार उसके इलाज के अनुभव को प्रभावित करता है। इसी तरह विधिक सहायता केंद्र, कोर्ट या गांव में पैरा-लीगल वालंटियर के पास पहुंचने वाले व्यक्ति के साथ कैसा व्यवहार हुआ, इससे उसके मन में पूरी न्याय व्यवस्था की छवि बनती है।
अहिल्याबाई होलकर के न्याय मॉडल का जिक्र
सीजेआई ने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के न्याय मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका शासन आम लोगों से सीधे जुड़ा था। वे किसानों, विधवाओं और व्यापारियों से सीधे मिलती थीं। उन्होंने कहा कि आज की विधिक सेवा व्यवस्था के लिए भी यह संदेश महत्वपूर्ण है कि न्याय को आम नागरिक के करीब ले जाना होगा और उसकी समस्या को सीधे समझना होगा।
अनुच्छेद 39ए का वादा जमीन तक पहुंचाना होगा
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 39ए में समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता का जो वादा किया गया है, वह तभी सार्थक होगा जब इसका लाभ उस घर तक पहुंचे, जिसके लिए यह व्यवस्था बनाई गई है। सम्मेलन में होने वाली चर्चा और तैयार होने वाली योजनाओं का वास्तविक असर आम नागरिक के जीवन में दिखाई देना चाहिए।
इंदौर में जुटे न्यायिक अधिकारी
8 और 9 अगस्त को आयोजित वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली, मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट के न्यायाधीश, न्यायिक अधिकारी, विधिक सेवा प्राधिकरणों के पदाधिकारी और पैरा-लीगल वालंटियर्स शामिल हुए हैं।
कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन सीजेआई सूर्यकांत और अन्य न्यायाधीशों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस मनमोहन, केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल सहित कई न्यायिक एवं प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
तकनीकी सत्र में ‘अदालतों से आगे मध्यस्थता : संवाद, सामुदायिक समाधान और समावेशी भागीदारी की संस्कृति का निर्माण’ विषय पर चर्चा होगी। इसमें मध्यस्थता के जरिए विवादों के सामुदायिक समाधान और न्याय तक पहुंच को और प्रभावी बनाने पर मंथन किया जाएगा।
मेयर और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने किया स्वागत
वेस्ट जोन कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए सीजेआई सूर्यकांत के इंदौर पहुंचने पर मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने उनकी अगवानी की। भार्गव ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश का इंदौर आगमन शहर के लिए गौरव का विषय है।
वहीं, इंदौर में प्रथम आगमन पर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष यादव ने भी देवी अहिल्या विमानतल पर उनका स्वागत किया। इस दौरान अधिवक्ताओं की समस्याओं और न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
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