मां के त्योहार में बच्चों ने बिखेरे खुशियों के रंग: पहले फर्ज फिर त्योहार; सेल्यूट खाकी की बेटी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
होली जैसे उल्लास और पारिवारिक मेल-मिलाप के पर्व से ठीक पहले जब अधिकांश लोग अपने घरों में रंग-गुलाल की तैयारियों में जुटे होते हैं, उसी समय शहर की सड़कों पर कुछ ऐसी महिलाएं भी डटी रहती हैं जो अपने परिवार से दूर रहकर कर्तव्य निभा रही होती हैं। इंदौर में होली पर सुरक्षा व्यवस्था संभालती महिला पुलिसकर्मियों का यही जज्बा देखने को मिला।
अपने बच्चों और परिवार को घर पर छोड़कर वे घंटों तक सड़कों पर तैनात रहीं और शहर की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती नजर आईं। उनके इस समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा को जितना भी सलाम किया जाए, वह कम है।
घर की जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी ये महिला पुलिसकर्मी अपने शहर और देश के प्रति कर्तव्य को सर्वोपरि मानती हैं। घर में वे मां, पत्नी और बहू की भूमिका निभाती हैं, लेकिन जब वर्दी पहनकर सेवा के लिए घर की दहलीज पार करती हैं तो ड्यूटी ही उनका पहला धर्म बन जाता है।
कई बार यह भी तय नहीं होता कि वे कब घर लौटेंगी, फिर भी चेहरे पर थकान नहीं, बल्कि कर्तव्य निभाने का संतोष दिखाई देता है।
शहर की सुरक्षा बन जाती है प्राथमिकता: परिवार के लिए फर्ज और ममता की जिम्मेदारियां अपनी जगह होती हैं, लेकिन वर्दी पहनते ही उनके लिए शहर की सुरक्षा पहली प्राथमिकता बन जाती है। होली के इस पर्व पर भी इंदौर की सड़कों पर यही तस्वीर दिखाई दी—जहां एक ओर लोग रंगों में सराबोर थे, वहीं दूसरी ओर महिला पुलिसकर्मी मुस्तैदी से व्यवस्था संभालती नजर आईं।
कभी मां होने का फर्ज निभाती हैं तो कभी पत्नी और बहन की जिम्मेदारी। यदि कामकाजी महिला हो तो उसके कार्यक्षेत्र के साथ-साथ जिम्मेदारियां भी कई गुना बढ़ जाती हैं। इसके बावजूद वह हालातों से हार नहीं मानती, बल्कि डटकर उनका सामना करती है। शायद यही कारण है कि नारी को शक्ति का प्रतीक कहा जाता है।
होली के इस अवसर पर इंदौर की सड़कों पर डटी इन महिला पुलिसकर्मियों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि ममता और जिम्मेदारी के साथ-साथ कर्तव्य निभाने का साहस भी उनमें किसी से कम नहीं।
ड्यूटी के बीच बेटे ने लगाया रंग, नम हुई आंखें
विजय नगर थाने में पदस्थ सब इंस्पेक्टर श्रद्धा पवार कई वर्षों से थानों में ड्यूटी दे रही हैं। कभी वीआईपी मूवमेंट तो कभी विशेष सुरक्षा व्यवस्था, ऐसे में उन्हें अपने परिवार के साथ बहुत कम समय मिल पाता है। बावजूद इसके श्रद्धा अपने परिवार और नौकरी दोनों जिम्मेदारियों को बराबरी से निभाने की कोशिश करती हैं।
कोई भी त्योहार हो, सबसे पहले उन्हें अपनी ड्यूटी याद आती है। होली के दिन भी जब श्रद्धा पवार घर से ड्यूटी के लिए निकलीं तो उनके बेटे अभ्युदय सिंह ने मासूमियत से कहा मां, आप ड्यूटी पर जाओ… हम वहीं आकर आपके साथ होली खेल लेंगे। बेटे की परीक्षा थी वो छठी क्लास में पढ़ाई करता है, इस कारण परीक्षा की तैयारी भी जरूरी थी।
लेकिन कुछ घंटों बाद जब बेटा चौराहे पर पहुंचा तो श्रद्धा को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उनका उनकी ड्यूटी के दौरान गुलाल लगाने पहुंच जाएगा। उसने मां को गुलाल लगाया तो यह पल भावुक कर देने वाला था। बेटे को सामने देखकर सब इंस्पेक्टर श्रद्धा पवार की आंखें नम हो गईं। मां ने बेटे से रंग लगवाया और उसे जल्द घर जाकर होली खेलने का भरोसा दिया। ड्यूटी खत्म होने के बाद वे घर लौटीं और परिवार के साथ होली का त्योहार मनाया।
ड्यूटी पर मां, रंग लेकर पहुंचा बेटा
शहर में लगातार बढ़ती ट्रैफिक समस्या पहले से ही पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में यदि कोई बड़ा त्योहार आ जाए तो यातायात पुलिस की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। होली के दिन भी शहर के प्रमुख चौराहों पर पुलिस की सख्त बैरिकेडिंग और चेकिंग के बीच यातायात व्यवस्था संभालना आसान नहीं था।
इसी बीच यातायात विभाग में पदस्थ महिला आरक्षक लता गौहित्र सुबह से ही अपने ड्यूटी पॉइंट पर मुस्तैदी से तैनात थीं। एक ओर चौराहे पर वाहनों की लंबी कतारें और सख्त चेकिंग की जिम्मेदारी, तो दूसरी ओर घर पर इंतजार करता उनका पांच वर्षीय बेटा वेदांत।
इस बार वेदांत अपने पूरे परिवार के साथ होली खेलना चाहता था, लेकिन मां की ड्यूटी के कारण यह संभव नहीं हो सका। ऐसे में वह खुद ही अपनी मां के पास ड्यूटी पॉइंट पर पहुंच गया और मां को रंग लगा दिया। बेटे के हाथों से रंग लगते ही दिनभर की थकान जैसे पलभर में उतर गई।
थाने में ममता के रंग, नन्ही बेटी ने लगाया गुलाल
शहर के महिला थाने में पदस्थ सब इंस्पेक्टर खुशबू परमार को भी होली के दिन अपनी तीन साल की बेटी को घर छोड़कर ड्यूटी पर आना पड़ा। त्योहार का दिन होने के बावजूद वर्दी का फर्ज उन्हें थाने तक खींच लाया। खुशबू की बेटी प्रीशा अभी महज तीन साल की है और अब उसे धीरे-धीरे त्योहारों की समझ आने लगी है।
इस बार वह अपनी मां के साथ होली खेलना चाहती थी, लेकिन सुबह से ड्यूटी पर होने के कारण मां घर नहीं पहुंच सकी। बाद में जब परिवार को थोड़ा समय मिला तो वे प्रीशा को लेकर थाने के पास पहुंच गए। वहां बेटी ने अपनी मां को गुलाल लगाकर होली खेली।
उस पल में वर्दी की सख्ती के बीच ममता की कोमलता साफ झलक रही थी। हालांकि मां के मन में बेटी के साथ त्योहार मनाने की चाह जरूर थी, लेकिन फर्ज के आगे उन्होंने अपनी चाह को पीछे रख दिया।
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