चारधाम यात्रा: 25 दिनों में 40 श्रद्धालुओं की मौत; यहां गई सबसे ज्यादा जान
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, देहरादून।
चारधाम यात्रा 2026 में इस साल श्रद्धालुओं की संख्या लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। 19 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा में 13 मई तक 12 लाख 64 हजार 217 श्रद्धालु चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं। हालांकि दूसरी ओर यात्रा के दौरान मौतों का आंकड़ा भी चिंता बढ़ा रहा है।
अब तक 40 श्रद्धालुओं की मौत
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) की 14 मई सुबह 10 बजे जारी रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 40 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। इनमें सबसे ज्यादा 22 मौतें केदारनाथ धाम में दर्ज की गई हैं। इसके अलावा बद्रीनाथ धाम में 7, यमुनोत्री धाम में 6 और गंगोत्री धाम में 5 श्रद्धालुओं की मौत हुई है।
इन कारणों से हुई मौत
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अधिकांश मौतें हार्ट अटैक, हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, हाइपरटेंशन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हुई हैं। यात्रा मार्ग ऊंचाई वाले क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जहां ऑक्सीजन का स्तर कम होने और लगातार चढ़ाई की वजह से बुजुर्गों व पहले से बीमार यात्रियों की तबीयत बिगड़ने के मामले सामने आ रहे हैं।
स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की थी
यात्रा शुरू होने से पहले सरकार ने श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की थी। इसमें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को यात्रा से पहले स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी गई थी।
हार्ट अटैक और हाई एल्टीट्यूड से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही
डॉ. सुबोध उनियाल ने कहा कि कई श्रद्धालु शरीर के संकेतों को नजरअंदाज कर तेजी से यात्रा पूरी करने की कोशिश करते हैं, जिससे हार्ट अटैक और हाई एल्टीट्यूड से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं।
400 डॉक्टरों की तैनाती की गई है
सरकार के मुताबिक, यात्रा मार्ग पर 47 अस्पताल बनाए गए हैं और करीब 2820 स्वास्थ्य कर्मियों के साथ 400 डॉक्टरों की तैनाती की गई है। इसके अलावा दून मेडिकल कॉलेज और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में 180 डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि हाई एल्टीट्यूड सिकनेस और आपात स्वास्थ्य स्थितियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।
ट्रॉमा सेंटर बनाने की योजना
सरकार अब यात्रा मार्ग पर डेडिकेटेड ट्रॉमा सेंटर विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है। कौड़ियाला सहित संवेदनशील स्थानों पर ट्रॉमा सेंटर बनाने की योजना है, ताकि दुर्घटना या स्वास्थ्य आपात स्थिति में “गोल्डन ऑवर” के भीतर इलाज उपलब्ध कराया जा सके।
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