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चक्काजाम कांग्रेस का जनविरोधी आंदोलन, भाजपा

KHULASA FIRST

संवाददाता

08 मई 2026, 7:32 pm
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चक्काजाम कांग्रेस का जनविरोधी आंदोलन, भाजपा

तुलसीराम सिलावट बोले- झूठ के लिए माफी मांगें पटवारी, भाजपा खरीदेगी गेहूं का एक-एक दाना, श्रवण सिंह चावड़ा ने घेरा- कर्जमाफी के झूठे वादे कर कांग्रेस ने किसानों को बनाया डिफाल्टर

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कांग्रेस द्वारा घोषित किसान चक्काजाम आंदोलन को भाजपा नेताओं ने किसानों के नाम पर किया जा रहा राजनीतिक स्वार्थ करार दिया। भाजपा कार्यालय पर आयोजित पत्रकार वार्ता में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और जिला अध्यक्ष श्रवण सिंह चावड़ा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि सड़कों पर जाम लगाकर एंबुलेंस और अग्निशमन जैसी आपात सेवाओं को रोकना जनविरोधी कृत्य है। मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को आंदोलन के बजाय किसानों से उस छल और झूठ के लिए माफी मांगनी चाहिए, जो उनकी सरकार ने सत्ता में रहते हुए किया था।

सिलावट ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार किसानों के कल्याण के लिए संकल्पित है। भाजपा सरकार किसानों से गेहूं का एक-एक दाना खरीदने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

कांग्रेस के समय में गेहूं का उत्पादन केवल 60 लाख टन था, जो अब बढ़कर 200 लाख टन के पार पहुंच गया है। कांग्रेस के 55 साल के कार्यकाल में समर्थन मूल्य बेहद कम था, जबकि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इसमें 1600 रुपए प्रति क्विंटल तक की रिकॉर्ड वृद्धि हुई है।

वर्तमान में प्रदेश सरकार किसानों को बोनस सहित 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से भुगतान कर रही है। बारदानों की समस्या सुलझने के बाद अब खरीदी तेज गति से जारी है।

जिला अध्यक्ष चावड़ा ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि 15 माह की कमलनाथ सरकार ने कर्जमाफी के झूठे वादों से किसानों को डिफाल्टर की श्रेणी में ला खड़ा किया था।

भाजपा सरकार ने इन किसानों के लगभग 2800 करोड़ रुपए के ब्याज का भुगतान कर उन्हें राहत दी है। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को कांग्रेस ने वर्षों तक दबाकर रखा, जबकि भाजपा सरकार ने किसान सम्मान निधि और एमएसपी में वृद्धि कर कृषि को सशक्त बनाया है।

आज प्रदेश दलहन उत्पादन में देश में प्रथम और खाद्यान्न उत्पादन में दूसरे स्थान पर है, जो सरकार की किसान हितैषी नीतियों का परिणाम है।

कांग्रेस को आंदोलन करने से पहले आत्मचिंतन करना चाहिए और किसानों को गुमराह करना बंद करना चाहिए।

विधायक-नेत्री विवाद में मंत्री सिलावट की जुबान फिसली, अपनों को ही घेरा
आलोट से भाजपा विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय और कांग्रेस की महिला अध्यक्ष रीना बौरासी के बीच जारी घमासान अब सियासी मजाक का केंद्र बन गया है। इस विवाद में प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट की एक भारी चूक ने भाजपा को असहज स्थिति में डाल दिया।

जब पत्रकारों ने बौरासी द्वारा विधायक पर लगाए आरोपों पर सवाल किया, तो मंत्री सिलावट उलझ गए। उन्होंने पहले तो इसे कांग्रेस का अंदरूनी मामला बताया और बाद में यह कहकर सबको चौंका दिया कि आरोप सही होंगे तभी तो लगाए गए हैं, इसकी निष्पक्ष जांच के बाद कार्रवाई होगी।

मंत्री के इस बयान पर मंच पर मौजूद भाजपा ग्रामीण जिलाध्यक्ष श्रवण चावड़ा और अन्य नेता हतप्रभ रह गए। उन्होंने तुरंत मंत्री के कान में फुसफुसाते हुए याद दिलाया कि डॉ. मालवीय अपनी ही पार्टी के विधायक हैं।

इसके बाद मंत्री ने संभलने की कोशिश की और सफाई देते हुए कहा कि जो आरोप विधायक पर लगे हैं, वे पूरी तरह बेबुनियाद हैं और मालवीय द्वारा की गई शिकायत सही है।

दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ, जब बौरासी ने विधायक मालवीय पर यौन शोषण और संपत्ति कब्जाने जैसे गंभीर आरोप जड़े।

इसके जवाब में डॉ. मालवीय ने कड़ा रुख अपनाते हुए बौरासी को 10 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस थमाया है।

इसमें साफ कहा गया है कि सात दिनों में साक्ष्य पेश न करने पर कानूनी कार्रवाई होगी। मंत्री की इस जुबान फिसलने की घटना ने अब राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।

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