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ट्विशा शर्मा केस में CBI को मिले अहम सुराग: जांच में हुआ बड़ा खुलासा

KHULASA FIRST

संवाददाता

01 जून 2026, 12:19 pm
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ट्विशा शर्मा केस में CBI को मिले अहम सुराग

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच कर रही सीबीआई को कई अहम सुराग मिले हैं। जांच में आरोपी समर्थ सिंह की फरारी को लेकर ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनके बाद एजेंसी ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है।

FIR के बाद भी भोपाल में मौजूद था समर्थ
सीबीआई जांच में सामने आया है कि 15 मई को एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद समर्थ शहर नहीं छोड़ पाया था। वह करीब तीन दिन तक भोपाल में अलग-अलग स्थानों पर छिपा रहा। इसके बाद वह जबलपुर पहुंचा, जहां लगभग पांच दिनों तक फरारी काटता रहा।

अब जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि इस दौरान समर्थ के संपर्क में कौन-कौन लोग थे, उसे शरण किसने दी और फरारी के दौरान उसकी गतिविधियां क्या थीं।

डॉक्टर से भी पूछताछ की तैयारी
मामले की हर कड़ी जोड़ने में जुटी सीबीआई ने उस डॉक्टर को भी तलब किया है, जिसने कथित तौर पर ट्विशा को गर्भपात की सलाह दी थी। एजेंसी गर्भावस्था, मेडिकल रिकॉर्ड और उससे जुड़े घटनाक्रमों की भी बारीकी से जांच कर रही है।

फंदे से अस्पताल तक की पूरी टाइमलाइन खंगाल रही एजेंसी
सीबीआई यह भी पता लगा रही है कि ट्विशा का शव सबसे पहले किसने देखा, उसे फंदे से किसने उतारा और अस्पताल तक किस परिस्थिति में पहुंचाया गया। जांच अधिकारी घटना की मिनट-टू-मिनट टाइमलाइन तैयार कर रहे हैं, ताकि किसी भी विरोधाभास को परखा जा सके।

आत्महत्या की थ्योरी पर सवाल
पूछताछ के दौरान समर्थ सिंह लगातार मौत को आत्महत्या बता रहा है, लेकिन जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार जब उससे आत्महत्या के संभावित कारणों के बारे में विस्तार से सवाल किए गए तो वह स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया।

सीबीआई को उसके बयानों में कई विरोधाभास मिले हैं, जिसके चलते एजेंसी अब तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की दोबारा पड़ताल कर रही है।

हो सकता है क्राइम सीन री-क्रिएशन
सूत्रों के मुताबिक सीबीआई घटना स्थल का क्राइम सीन री-क्रिएशन और डिजिटल एनालिसिस भी कर सकती है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि घटनास्थल पर वास्तव में क्या हुआ था और उपलब्ध साक्ष्य कथित आत्महत्या की थ्योरी से मेल खाते हैं या नहीं।

ट्विशा शर्मा मौत मामला अब केवल मौत की वजह तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि फरारी, साक्ष्यों के संरक्षण, मेडिकल पहलुओं और घटनाक्रम की पूरी श्रृंखला की जांच का केंद्र बन चुका है।

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