सारी मूंग खरीद लो मामा: मोहन ने शिवराज से लगाई गुहार
KHULASA FIRST
संवाददाता

मूंग खरीदी पर पेंच: 25% कोटे से किसान नाराज, सीएम मोहन ने कृषि मंत्री शिवराज से मांगा समाधान
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय कृषिमंत्री शिवराजसिंह चौहान के समक्ष किसानों की चिंता रखते हुए केंद्र से मूंग खरीद का दायरा बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने बताया प्रदेश सरकार ने शत प्रतिशत मूंग खरीदने के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा है और पूरी कोशिश है कि फैसला किसानहित में हो। भोपाल में मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषिमंत्री की मुलाकात ऐसे समय हुई, जब मध्य प्रदेश में मूंग की समर्थन मूल्य पर खरीदी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र से प्रदेश की पूरी मूंग फसल खरीदने का आग्रह किया, जबकि केंद्र की ओर से अभी 25% खरीदी की स्वीकृति का पत्र दिया गया है। इसी मुद्दे पर कांग्रेस भी केंद्र और राज्य सरकार पर दबाव बढ़ा रही है। प्रदेश में लगातार मूंग उत्पादक किसान और उनके संगठन भारतीय किसान संघ, किसान मजदूर संगठन, किसान आर्मी और कांग्रेस से जुड़े संगठन बड़े आंदोलन कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री के लिए यह स्थिति पसोपेश की बन गई है। बताया जा रहा है कि शिवराज से किसान नेताओं की भी मुलाकात हुई। इसमें कहा गया कि केंद्र तो 25% मूंग ही खरीदेगा, शेष राज्य सरकार चाहे तो खरीद ले। इसके बावजूद उन्होंने कहा है कि खरीदी का दायरा बढ़ाने की कोशिश करेंगे।
...तो 15 लाख टन खुले बाजार में बेचना पड़ेगी... उपलब्ध सरकारी एवं कृषि विभाग के अनुमानों के आधार पर प्रदेश में वर्ष 2026 के ग्रीष्मकालीन मूंग सीजन का अनुमानित उत्पादन लगभग 20 लाख टन माना जा रहा है। यह अनुमान करीब 10 लाख हेक्टेयर में बोई गई फसल पर आधारित है। यदि केंद्र सरकार केवल 25% मूंग ही समर्थन मूल्य पर खरीदती है, तो उसका अर्थ होगा लगभग
कुल अनुमानित उत्पादन 20 लाख टन, 25% संभावित एमएसपी खरीदी लगभग 5 लाख टन। यानी शेष 15 लाख टन मूंग किसानों को खुले बाजार में बेचनी पड़ सकती है, यदि राज्य या केंद्र खरीद का दायरा नहीं बढ़ाते हैं, तो। समर्थन मूल्य लगभग 8800 रुपए है और खुले बाजार में यह लगभग 6500 रुपए क्विंटल ही है।
भाकिसं के नर्मदापुरम संभाग के नेता सर्वेश दीवान ने बताया खुले बाजार में बेचने पर किसानों को भारी नुकसान होगा। यदि केंद्र सरकार द्वारा मूंग नहीं खरीदनी है, तो उसे खुले बाजार और मंडी में समर्थन मूल्य पर खरीदी के आदेश जारी कर देना चाहिए। राज्य सरकार भी यह कर सकती है। सरकार ऐसा क्यों नहीं करती, यह समझ से बाहर है।
गेहूं खरीदी सीमित होने से किसानों को हुआ था नुकसान
गेहूं की खरीदी के मामले में भी केंद्र ने सीमित खरीदी की नीति अपनाई थी, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ। हालांकि बाद में खरीदी की सीमा बढ़ाई गई, फिर भी 5 लाख से अधिक किसानों का गेहूं नहीं खरीदा। यही कारण है कि प्रदेश के किसान संगठन 100% मूंग की एमएसपी पर खरीदी की मांग कर रहे हैं।
उनका कहना है कि सीमित खरीदी से बाजार में कीमतें गिर सकती हैं और किसानों को आर्थिक नुकसान होगा। केंद्र की नीति के कारण खुले बाजार में भाव 1 हजार रुपए लगभग गिर गए तथा अभी और भी नीचे जा रहे हैं। तो क्या यह सरकार की सोची-समझी रणनीति है?
भावांतर पर गेहूं खरीदी की मांग भी यथावत
गेहूं के बाद मूंग की खरीदी को लेकर मोहन सरकार को किसानों के आक्रोश का सामना करना पड़ा रहा है। गेहूं में समर्थन मूल्य पर खरीदी करने का कोटा भी केंद्र ने बहुत कम निर्धारित किया था, लेकिन मुख्यमंत्री ने साहसपूर्ण निर्णय लेते हुए इसे बढ़ाया और निर्धारित सीमा से अधिक गेहूं सरकार ने खरीदा, जबकि करीब 5 लाख किसानों को धोखे में रखते हुए उनका गेहूं नहीं खरीदा।
इन बचे हुए किसानों का गेहूं भावांतर पर सरकार खरीदे, यह मांग भी लगातार बनी हुई है। इसी के साथ मूंग की खरीदी भी आ गई है। सरकार एक हेक्टेयर रकबे में पैदा हुई मूंग का मात्र 25%, यानी लगभग तीन क्विंटल ही खरीदेगी, जबकि एक हेक्टेयर में उत्पादन लगभग 12 से 15 क्विंटल का है।
खरीदी सीमा नहीं बढ़ी तो तेज होगा आंदोलन
अब किसानों की निगाह केंद्र और राज्य सरकार के अगले फैसले पर टिकी है कि 25 प्रतिशत की सीमा बढ़ाकर पूरी मूंग खरीदी जाएगी या नहीं।
यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला तो किसान आंदोलन और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। राज्य सरकार का तर्क है कि यदि केवल 25 प्रतिशत मूंग ही एमएसपी पर खरीदी गई तो बड़ी मात्रा में उपज किसानों को खुले बाजार में कम कीमत पर बेचनी पड़ेगी, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान होगा। इसी कारण प्रदेश सरकार लगातार केंद्र के साथ समन्वय कर खरीद सीमा बढ़ाने का प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से और अपने सरकार के स्तर पर किसानों का नुकसान नहीं होने देना चाहते।
जिम्मेदार केंद्र, दबाव प्रदेश सरकार पर
राजनीतिक दृष्टि से यह मामला केवल कृषि नीति का नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर जिम्मेदारी और नेतृत्व का भी है। किसानों के लिए राज्य सरकार पहला जवाबदेह चेहरा मुख्यमंत्री का होता है, जबकि समर्थन मूल्य पर खरीद की नीति केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित होती है।
ऐसे में यदि खरीद सीमित रहती है, तो राजनीतिक दबाव का सामना न चाहते हुए भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को करना होगा, जबकि इस सबके लिए पूरी तरह से केंद्र जिम्मेदार है। लंबे समय तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शिवराजसिंह चौहान अब केंद्र में कृषिमंत्री है, इसलिए किसान संगठनों को उनसे भी समाधान की अपेक्षा स्वाभाविक है। यदि केंद्र खरीद का दायरा बढ़ाता है, तो उसका राजनीतिक श्रेय दोनों नेताओं को मिल सकता है।
कोटा बढ़ा तो अधिकतम किसानों को होगा लाभ
इस बीच समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी की प्रक्रिया 1 जुलाई से शुरू हो चुकी है। स्लॉट बुकिंग, पंजीयन और खरीदी की व्यवस्थाएं जारी हैं, जबकि राज्य सरकार केंद्र से अतिरिक्त अनुमति मिलने की प्रतीक्षा कर रही है। यदि केंद्र खरीद कोटा बढ़ाता है, तो अधिक किसानों को एमएसपी का लाभ मिल सकेगा।
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