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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन इस शहर में: मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री आज करेंगे तैयारियों की समीक्षा; कृषि मंत्रियों की बैठक में होगी अहम मुद्दों पर चर्चा

KHULASA FIRST

संवाददाता

03 मई 2026, 1:10 pm
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन इस शहर में

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन शिखर सम्मेलन 2026 की तैयारियां अब तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान आज शहर में बैठक कर इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन की रूपरेखा पर चर्चा करेंगे। बताया जा रहा है कि यह बैठक शहर के एक प्रमुख होटल में आयोजित होगी, जिसमें ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की बैठक से जुड़ी तैयारियों, व्यवस्थाओं और एजेंडे पर मंथन किया जाएगा।

12-13 जून को होगा बड़ा आयोजन
इंदौर में 12 और 13 जून 2026 को ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की अहम बैठक आयोजित होगी। इससे पहले 9 से 11 जून तक अधिकारियों के स्तर पर तकनीकी बैठकें होंगी। इस दौरान 11 देशों के प्रतिनिधि खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ खेती, डिजिटल एग्रीकल्चर और तकनीकी सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे। इस बार सम्मेलन की थीम रेजिलिएंस, इनोवेशन, सहयोग और सतत विकास रखी गई है, जो वैश्विक कृषि चुनौतियों से निपटने के लिए साझा रणनीति बनाने पर केंद्रित होगी।

इन देशों की होगी भागीदारी
ब्रिक्स समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ इस बार मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और इंडोनेशिया भी शामिल होंगे। यह मंच उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच कृषि व्यापार और निवेश को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।

इंदौर को क्यों मिला मौका
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ही इस सम्मेलन के लिए इंदौर का नाम प्रस्तावित किया था। इसके बाद इस मेजबानी को अंतिम रूप दिया गया। अब राज्य और केंद्र मिलकर इसे सफल बनाने में जुटे हैं।

किसान हित पर भी नजर
बैठक के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि दोनों नेता किसान हितों को लेकर सक्रिय हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जहां भावांतर योजना, गेहूं खरीदी पर बोनस, दिन में बिजली और किसान हेल्पलाइन जैसी पहलें शुरू की हैं, वहीं शिवराज सिंह चौहान भी देशभर में किसानों से संवाद और कृषि सुधारों को लेकर सक्रिय नजर आ रहे हैं।

ग्लोबल मंच पर इंदौर
यह सम्मेलन न सिर्फ इंदौर बल्कि मध्यप्रदेश के लिए भी बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे शहर को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने के साथ ही कृषि क्षेत्र में निवेश और नई तकनीकों के आदान-प्रदान के अवसर बढ़ेंगे।

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