वाह पुलिस वाह: ड्रग्स की कीमत भी ‘सेट’ कर रहे अधिकारी
KHULASA FIRST
संवाददाता

छोटी बरामदगी को करोड़ों में दिखाकर बटोरी जा रही वाहवाही, आंकड़ों के खेल ने खड़े किए बड़े सवाल
अंकित शाह 99264-99912 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच अब पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। एक तरफ पुलिस लगातार ड्रग्स माफिया पर शिकंजा कसने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर जब्त नशीले पदार्थों की कीमत को लेकर ऐसा खेल सामने आ रहा है, जिसने पूरी कार्रवाई की विश्वसनीयता पर ही संदेह खड़ा कर दिया है।
आरोप हैं कि मामूली मात्रा में पकड़ी गई ड्रग्स को करोड़ों में आंक कर पेश किया जा रहा है, ताकि कागजों में बड़ी सफलता दिखाकर वाहवाही लूटी जा सके। शहर में पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह के निर्देश पर नशे के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। कार्रवाई भी हो रही है, लेकिन इनके आंकड़े ही अब शक के दायरे में हैं।
सूत्रों का कहना है कि जब्त ड्रग्स की कीमत तय करने में कोई तय मानक नहीं अपनाया जा रहा, बल्कि मनमर्जी से रेट तय कर कार्रवाई को बड़ा दिखाया जा रहा है। यही वजह है कि अलग-अलग मामलों में एक ही तरह की ड्रग्स की कीमतों में भारी अंतर देखने को मिल रहा है।
ड्रग्स की कीमत तय करने का आधार क्या?
हाल ही में बाणगंगा थाना क्षेत्र में 129 ग्राम ब्राउन शुगर की बरामदगी को सीधे डेढ़ करोड़ रुपये का बताया गया। यह आंकड़ा कई जानकारों के लिए चौंकाने वाला है। वहीं दूसरी ओर, इंदौर क्राइम ब्रांच ने 159 ग्राम एमडी ड्रग्स की कीमत महज 16 लाख रुपये बताई।
दोनों मामलों में मात्रा और कीमत के इस असंतुलन ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर ड्रग्स की कीमत तय करने का आधार क्या है? ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी पूर्व में हुई कार्रवाइयों में इसी तरह के आंकड़ों का खेल सामने आ चुका है।
सात मार्च 2025 को आजाद नगर में 70 ग्राम एमडी की कीमत 50 लाख रुपये बताई गई थी, जबकि 24 मार्च को 100 ग्राम एमडी के लिए एक करोड़ रुपये का आंकड़ा पेश किया गया। अलग-अलग मामलों में कीमतों के इस भारी अंतर ने पुलिस की मंशा और पारदर्शिता दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या वाकई ड्रग्स के अंतरराष्ट्रीय बाजार में इतनी तेजी से उतार-चढ़ाव होता है या फिर यह पूरा खेल आंकड़ों की बाजीगरी का है? क्या कार्रवाई को बड़ा दिखाने के लिए कीमतों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है? अगर ऐसा है तो यह न सिर्फ जनता को गुमराह करने की कोशिश है, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों को भी गलत तस्वीर दिखाने का मामला बनता है।
गौरतलब है कि इसी तरह का एक विवाद मंदसौर में भी सामने आया था, जहां एक छात्र के पास से भारी मात्रा में अफीम बरामद दिखाकर केस दर्ज किया गया था। बाद में मामला इतना बढ़ा कि अधिकारियों को सफाई देनी पड़ी। ऐसे मामलों ने यह साफ कर दिया है कि ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरी उसमें पारदर्शिता भी है।
हेरोइन क्या होती है?
हेरोइन दुनिया की सबसे खतरनाक नशीली पदार्थों में गिनी जाती है। इसे अफीम से तैयार किया जाता है, जिसमें रासायनिक प्रक्रिया के जरिए एसिटिक तत्व मिलाए जाते हैं। शुरुआत में इसका इस्तेमाल चिकित्सा उद्देश्यों के लिए किया गया था, लेकिन समय के साथ यह अवैध नशे का बड़ा साधन बन गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक किलो हेरोइन की कीमत लगभग पांच करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है।
कोकीन कितनी महंगी होती है?
कोकीन को कोका पौधे की पत्तियों से तैयार किया जाता है और इसका असर बेहद तेज व खतरनाक होता है। यह सीधे दिमाग पर असर डालती है और लत लगने का खतरा बहुत ज्यादा होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 10 करोड़ रुपये प्रति किलो तक होती है। हाल ही में कश्मीर में पुलिस ने 30 किलो कोकीन जब्त की थी, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 100 करोड़ रुपये बताई गई।
चरस और ब्राउन शुगर की कीमत... चरस, जो गांजे के पौधे से तैयार होती है, इसकी कीमत करीब पांच लाख रुपये प्रति किलो तक होती है। वहीं ब्राउन शुगर, जो अफीम से तैयार एक खतरनाक नशीला पदार्थ है, इसमें हेरोइन और स्मैक जैसे तत्व भी मिलाए जाते हैं। इसका असर बेहद घातक होता है और ज्यादा मात्रा में सेवन जानलेवा साबित हो सकता है। बाजार में इसकी कीमत करीब 10 से 20 लाख रुपये प्रति किलो के बीच रहती है।
मादक पदार्थ और अंतरराष्ट्रीय अनुमानित मूल्य
गांजा: 20 से 25 हजार रु. प्रति किलोग्राम
हेरोइन: 8 से 12 हजार रु. प्रति ग्राम
एलएसडी: 4 से 10 हजार रु. प्रति डॉट
एमडी: 4 से 5 हजार रु. प्रति ग्राम
ब्राउन शुगर: 600 से 800 रु. प्रति ग्राम
एलप्राजोलम: 80 से 90 हजार
रुपए प्रति किलोग्राम
कोकीन: 7 से 10 हजार रु. प्रति ग्राम
चरस: 4 लाख रुपए प्रति किलोग्राम
कोडीन: 200 रुपए प्रति शीशी
(100 एमएल)
हाईब्रिड गांजा (ओजी) : दो से पांच लाख रुपए प्रतिकिलो ग्राम
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