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ब्लड बैंक में घोटाला: प्रोत्साहन के नाम पर बांट दिए 43.91 लाख रुपए; 9 साल से चल रहा था खेल

KHULASA FIRST

संवाददाता

28 फ़रवरी 2026, 1:29 pm
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ब्लड बैंक में घोटाला

खुलासा फर्स्ट, मंदसौर।
स्थित जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में लाखों रुपए के वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। यहां 35 डॉक्टरों और 26 कर्मचारियों ने कथित तौर पर “प्रोत्साहन राशि” के नाम पर 43.91 लाख रुपए आपस में बांट लिए। हैरानी की बात यह है कि यह सिलसिला अप्रैल 2016 से जनवरी 2025 तक लगातार चलता रहा।

नियम कुछ और, वसूली कुछ और
निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को जरूरत पड़ने पर ब्लड बैंक से रक्त लेने के लिए 1050 रुपए प्रति यूनिट और डोनर देना अनिवार्य है। नियमानुसार यह पूरी राशि रोगी कल्याण समिति (रोकस) में जमा होनी चाहिए थी, लेकिन जांच में सामने आया कि केवल 750 रुपए ही जमा किए गए, जबकि शेष 300 रुपए प्रति यूनिट को “प्रोत्साहन” बताकर डॉक्टरों और कर्मचारियों में बांट दिया गया।

14,639 यूनिट रक्त से आया 1.53 करोड़
पड़ताल में सामने आया कि करीब 9 साल की अवधि में 14,639 यूनिट रक्त के बदले 1.53 करोड़ रुपए प्राप्त हुए। इसमें से 43.91 लाख रुपए का कथित तौर पर बंदरबांट किया गया। इस मामले में तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. एके मिश्रा और डॉ. डीके शर्मा के नाम भी सामने आए हैं। आरोप है कि दोनों ने अपने बेटे-बेटी के खातों में कुल 13.70 लाख रुपए का भुगतान करवाया।

ऐसे शुरू हुआ ‘प्रोत्साहन’ मॉडल
बताया गया कि वर्ष 2016 में तत्कालीन ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. सौरभ मंडवारिया ने प्रोत्साहन राशि का प्रस्ताव तैयार किया। इसके बाद तत्कालीन सीएस डॉ. एके मिश्रा ने नोटशीट बनाकर एड्स कंट्रोल के एक पुराने पत्र का हवाला देते हुए तत्कालीन कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह से वेतन मद के नाम पर स्वीकृति ले ली।

इसके तहत ब्लड बैंक प्रभारी को 150, टेक्नीशियन को 100 और असिस्टेंट को 50 रुपए प्रति यूनिट दिए जाने लगे। मामला उजागर होते ही यह भुगतान बंद कर दिया गया।

एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने का दौर
पूर्व सिविल सर्जन जहां ब्लड बैंक से आए प्रस्तावों की बात कह रहे हैं, वहीं ब्लड बैंक प्रभारी का कहना है कि निजी चिकित्सकों की मांग के बाद प्रस्ताव भेजा गया था और कर्मचारियों की कमी के चलते मौजूदा स्टाफ को ही यह राशि दी गई। डॉक्टरों और टेक्नीशियनों का दावा है कि उन्हें नियमों की जानकारी नहीं थी और यह भुगतान वरिष्ठ अधिकारियों की मंजूरी से हुआ।

प्रशासन ने मानी गड़बड़ी
मामले पर डॉ. जीएस चौहान ने साफ कहा कि वेतन पाने वाले कर्मचारियों को किसी भी तरह की प्रोत्साहन राशि देने का कोई प्रावधान नहीं है। इस राशि से अतिरिक्त स्टाफ रखकर सेवाएं बेहतर की जा सकती थीं। वहीं मंदसौर कलेक्टर अदिति गर्ग ने कहा कि संबंधित लोगों पर कार्रवाई प्रस्तावित की गई है और भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए पूरी व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है।

कार्रवाई की तैयारी
प्रशासनिक स्तर पर रिकवरी की प्रक्रिया और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। जांच के बाद तय होगा कि यह लापरवाही थी या सुनियोजित वित्तीय अनियमितता।

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