प्रदेशभर में लागू होगी बॉयोमैट्रिक अटेंडेंस: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे उपस्थिति का निरीक्षण
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सभी विभाग अपने कार्य क्षेत्र की कठिनाइयों और चुनौतियों को चिन्हित कर उनका निराकरण करें। विभाग और जिले जिन क्षेत्रों में पीछे हैं, उनमें सुधार के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं। मप्र को सभी क्षेत्रों में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना हमारा प्रयास हो।
जनहित में किए जाने वाले सभी नवाचारों को राज्य सरकार प्रोत्साहित करेगी। मंत्रालय, विंध्याचल और सतपुड़ा भवन में बॉयोमैट्रिक उपस्थिति की समीक्षा कर कहा बॉयोमैट्रिक अडेंटेंस प्रदेश के सभी शासकीय कार्यालयों में लागू की जाए। इससे शासकीय कार्य कुशलता और समय बद्धता में वृद्धि होगी। वे स्वयं कार्यालयों में अधिकारियों, कर्मचारियों द्वारा समय के पालन का निरीक्षण करेंगे।
मुख्यमंत्री विभिन्न शासकीय कार्यक्रमों और योजनाओं के क्रियावयन के संबंध में शुक्रवार को मंत्रालय में आयोजित नोडल विभागों की समीक्षा कर रहे थे। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।
कपास पर मंडी शुल्क में कटौती- खंडवा और बुरहानपुर की मंडियों में कपास उत्पादक किसानों से लिया जा रहा मंडी शुल्क एक रुपए से घटाकर 55 पैसे करने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश के कपास उत्पादक किसानों को उपज बेचने में कठिनाई न हो इसके लिए कपास का मंडी शुल्क पड़ोसी महाराष्ट्र राज्य के बराबर 55 पैसे किया जा रहा है।
स्वामित्व योजना में महिलाओं के नाम से कराई जाए रजिस्ट्री
मुख्यमंत्री ने कहा ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि की नि:शुल्क रजिस्ट्री के कार्य का लाभ सभी ग्रामवासियों को दिलवाने के लिये अभियान के स्वरूप में संचालित किया जाए। जनप्रतिनिधियों- पंचायत प्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित करें।
स्वामित्व योजना में महिलाओं के नाम रजिस्ट्री कराएं। ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र हितग्राहियों को जमीन के नि:शुल्क पट्टे वितरित किए जाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि घोषित करने की प्रक्रिया को सरल बनाना आवश्यक है।
कलेक्टर समय सीमा निर्धारित कर संवेदनाशीलता और सक्रियता से कार्य करें। इससे पलायन कम करने में भी मदद मिलेगी। शहरी क्षेत्र से सटे गांवों के लिए प्रक्रिया का क्रियान्वयन क्षेत्र का नियोजन कर किया जाए।
इससे क्षेत्र के सौंदर्यीकरण में मदद मिलेगी और स्थानीय निवासियों को स्कूल, खेल के मैदान, मूलभूत आवश्यकताओं की दुकानों और धर्मशालाओं जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
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