फर्जी कोर्ट आदेश मामले में बड़ा खुलासा: जानिये किसे घोषित किया मुख्य साजिशकर्ता; जमानत याचिका खारिज
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आईएएस संतोष वर्मा से जुड़े फर्जी कोर्ट आदेश मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने इंदौर जिला कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अमन सिंह भूरिया को इस पूरे प्रकरण का मुख्य षड्यंत्रकारी बताया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला अदालत ने भूरिया की जमानत याचिका खारिज कर दी।
फर्जी आदेश केस में नया मोड़
लसूडिया थाने में दर्ज मामले में एक महिला की शिकायत पर संतोष वर्मा के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। जांच के दौरान सामने आया कि कोर्ट से जारी दिखाया गया एक आदेश कूटरचित (फर्जी) था, जिसके जरिए वर्मा को बरी किया गया था। इस आदेश को लेकर एडीजे विजेंद्र सिंह रावत ने जून 2021 में एमजी रोड थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई आदेश उनकी कोर्ट से जारी नहीं हुआ।
जांच में बढ़ते गए आरोपी
शुरुआत में अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई, लेकिन बाद में इसमें आईएएस संतोष वर्मा, एडीजे विजेंद्र सिंह रावत और कोर्ट लिपिक नीतू सिंह चौहान को आरोपी बनाया गया। अब पुलिस जांच में अमन सिंह भूरिया का नाम मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आया है।
चेंबर में करवाई गई थी मुलाकात
पुलिस के मुताबिक, भूरिया ने ही अपने चेंबर में संतोष वर्मा और विजेंद्र सिंह रावत की मुलाकात करवाई थी। केस डायरी में दर्ज बयानों में दोनों ने इस मुलाकात की पुष्टि भी की है।
फोन कॉल और चैट से मजबूत हुए सबूत
जांच में यह भी सामने आया कि 16 सितंबर 2020 से 22 जून 2021 के बीच संतोष वर्मा और भूरिया के बीच दो मोबाइल नंबरों से 32 बार बातचीत हुई। ये बातचीत ज्यादातर न्यायिक कार्य के बाद रात में हुई।
30 सितंबर 2020 को केस ट्रांसफर के दिन दोनों के बीच 8 बार बात हुई। 1 अक्टूबर को रात 8:38 बजे भी संपर्क हुआ। 16 से 25 सितंबर के बीच सुबह से रात तक लगातार बातचीत के रिकॉर्ड मिले। इसके अलावा दोनों के बीच व्हाट्सएप चैट भी जांच एजेंसियों के पास मौजूद है, जो साजिश की पुष्टि करते हैं।
भूरिया की दलील और कोर्ट का फैसला
पुलिस ने 17 अप्रैल को भूरिया को नोटिस जारी कर 28 अप्रैल को मोबाइल सहित पेश होने को कहा था। इसके बाद भूरिया ने आशंका जताते हुए जमानत याचिका दाखिल की और कहा कि जिस मोबाइल की मांग की जा रही है, वह उनका नहीं है।
हालांकि, सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है और न्यायिक दस्तावेजों में कूटरचना जैसे अपराध समाज और न्याय व्यवस्था के लिए खतरा हैं। इसी आधार पर कोर्ट ने भूरिया की जमानत याचिका खारिज कर दी।
मामले की गंभीरता बढ़ी
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह केस सामान्य आपराधिक मामलों से कहीं ज्यादा गंभीर है, क्योंकि इसमें न्यायिक प्रक्रिया से छेड़छाड़ और साजिश का आरोप शामिल है।
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