देवास ब्लास्ट के बाद बड़ा खुलासा: वेयरहाउस में छिपा ‘बारूद’; फैक्ट्री से मेल खाते कंटेनर और संदिग्ध केमिकल बरामद
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, देवास।
पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में पांच मजदूरों की मौत के बाद जांच का दायरा अब पास के वेयरहाउस तक पहुंच गया है। ब्लास्ट साइट से करीब 1–2 किमी दूर स्थित गोदाम में ऐसे सबूत मिले हैं, जो अवैध गतिविधियों और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। फिलहाल वेयरहाउस को सील कर दिया गया है।
फैक्ट्री जैसे ही कंटेनर मिले, बढ़ा शक
जांच में सामने आया कि वेयरहाउस के भीतर वही स्टील कंटेनर रखे थे, जिन जैसे कंटेनरों में फैक्ट्री में विस्फोट हुआ था। वीडियो फुटेज में 4 से 6 कंटेनर दिखाई दे रहे हैं, जबकि आशंका जताई जा रही है कि और भी कंटेनर अंदर छिपे हो सकते हैं। इसी तरह के कंटेनर ब्लास्ट के समय मजदूरों के पास मौजूद थे, जिससे बड़ा हादसा हुआ।
‘REGULAR’ लिखे कट्टे-दोनों जगह एक जैसे सुराग
फैक्ट्री और वेयरहाउस, दोनों जगह सफेद कट्टों पर लाल रंग से ‘REGULAR’ लिखा मिला। फैक्ट्री में जहां हजारों कट्टे पाए गए, वहीं वेयरहाउस में इनकी संख्या लाखों में बताई जा रही है। इससे संकेत मिलता है कि तैयार पटाखों की पैकिंग और सप्लाई का काम भी इसी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।
गत्तों के नीचे छिपी संदिग्ध बोरियां
वेयरहाउस में गत्तों के नीचे छिपाकर रखी गई सफेद बोरियां भी बरामद हुई हैं। अधिकारियों को आशंका है कि इनमें पोटाश या अन्य विस्फोटक केमिकल हो सकते हैं। ऐसी ही सामग्री ब्लास्ट वाली फैक्ट्री में भी पाई गई थी, जिससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि यहां भी पटाखा निर्माण या उससे जुड़ी प्रक्रिया चल रही थी।
पैकिंग सेटअप ने खोले नए राज
गोदाम के अंदर लंबी टेबल-कुर्सियां, कार्टन और पैकिंग सामग्री की व्यवस्था मिली है। इससे संकेत मिलता है कि यहां बड़े स्तर पर पैकिंग या संभवतः निर्माण का काम होता था। अनुमान है कि फैक्ट्री में तैयार माल को यहां लाकर पैक कर सप्लाई किया जाता था।
अधिकारियों के दावों पर उठे सवाल
प्रारंभिक जांच में पुलिस अधिकारियों ने यहां केवल स्टॉक होने की बात कही थी, लेकिन सामने आए वीडियो और तस्वीरों ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाद में वरिष्ठ अधिकारियों को दोबारा विस्तृत जांच के निर्देश देने पड़े।
सरपंच ने पहले ही दी थी चेतावनी
ग्राम पंचायत की सरपंच कविता गौड़ ने दावा किया कि उन्होंने मार्च 2026 में ही इस वेयरहाउस में पटाखा निर्माण की शिकायत की थी। उनके अनुसार यहां पहले भी छोटा विस्फोट हो चुका था, लेकिन प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई।
लाइसेंस प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
विस्फोटक नियम 2008 के तहत पंचायत की सहमति जरूरी होती है, लेकिन सरपंच के विरोध के बावजूद फैक्ट्री को अनुमति मिलना जांच का बड़ा विषय बन गया है। हाईवे, पेट्रोल पंप और आबादी के पास फैक्ट्री संचालन को लेकर प्रशासनिक निर्णयों पर भी सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल पुलिस और प्रशासन पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटे हैं। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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