आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों पर बड़ा फैसला: देश की शीर्ष अदालत का निर्देश-खतरनाक और रेबीज संक्रमित कुत्तों को दया मृत्यु दें; लोगों की जान की सुरक्षा सर्वोपरि
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और रेबीज के खतरे को लेकर मंगलवार को बड़ा और सख्त फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई कुत्ता रेबीज से संक्रमित है या बेहद आक्रामक और खतरनाक है, तो कानून के तहत उसे इंजेक्शन देकर “यूथेनेशिया” यानी दया मृत्यु दी जा सकती है। अदालत ने साफ कहा कि “लोगों की जान की सुरक्षा सर्वोपरि है” और जो अधिकारी कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है।
डॉग लवर्स और कुछ एनजीओ की सभी याचिकाएं खारिज
जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की बेंच ने डॉग लवर्स और कुछ एनजीओ की सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। ये याचिकाएं कोर्ट के पहले दिए गए आदेशों को चुनौती देने के लिए दायर की गई थीं, जिनमें स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए गए थे।
चिंताजनक आंकड़ों का जिक्र
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने देशभर से सामने आए चिंताजनक आंकड़ों का जिक्र किया। अदालत ने कहा कि अकेले श्रीगंगानगर में एक महीने के भीतर कुत्तों के काटने की 1084 घटनाएं सामने आईं, जिनमें कई छोटे बच्चों को गंभीर चोटें आईं। वहीं तमिलनाडु में साल 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही लगभग दो लाख डॉग बाइट केस दर्ज किए गए। कोर्ट ने कहा कि स्थानीय प्रशासन की लापरवाही अब स्वीकार नहीं की जा सकती।
9 अहम निर्देश भी जारी
अदालत ने राज्यों और नगर निकायों के लिए 9 अहम निर्देश भी जारी किए। कोर्ट ने हर जिले में कम से कम एक पूरी तरह कार्यरत एबीसी सेंटर (एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर) बनाने, एंटी-रेबीज दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और ज्यादा आबादी वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सेंटर खोलने को कहा। साथ ही नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को राष्ट्रीय राजमार्गों से आवारा पशुओं को हटाने के लिए विशेष अभियान चलाने और मॉनिटरिंग व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए।
कानूनी संरक्षण दिया जाएगा
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश लागू करने वाले नगर निगम और सरकारी अधिकारियों को कानूनी संरक्षण दिया जाएगा ताकि उनके खिलाफ अनावश्यक एफआईआर या दंडात्मक कार्रवाई न हो। साथ ही सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जरूरत पड़ने पर अन्य संवेदनशील इलाकों में भी इन निर्देशों को लागू किया जा सकेगा।
जुलाई 2025 में स्वतः संज्ञान
यह मामला जुलाई 2025 में स्वतः संज्ञान से शुरू हुआ था, जब देशभर में आवारा कुत्तों के हमलों और मौतों की घटनाओं पर अदालत ने चिंता जताई थी। इसके बाद अगस्त 2025 में दिल्ली-एनसीआर से सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर होम भेजने का आदेश दिया गया था, हालांकि बाद में कोर्ट ने उसमें संशोधन करते हुए गैर-आक्रामक और रेबीज मुक्त कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद वापस उसी क्षेत्र में छोड़ने की अनुमति दी थी। अब ताजा फैसले के बाद साफ संकेत मिल गए हैं कि अदालत इस मुद्दे पर जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के पक्ष में है।
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