भोजशाला वाग्देवी मंदिर: पांच याचिकाओं और तीन इंटरवेंशन पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने दिया फैसला
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने बहुचर्चित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना है। वर्षों पुराने इस संवेदनशील मामले में पांच याचिकाओं और तीन इंटरवेंशन पर सुनवाई पूरी होने के बाद डबल बेंच ने फैसला सुरक्षित रखा था।
प्रशासन अलर्ट मोड पर
फैसले के बाद धार और इंदौर जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। शुक्रवार होने के कारण संवेदनशीलता और बढ़ गई है, क्योंकि इसी दिन मुस्लिम समाज भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज अदा करता है।
शांति बनाए रखने की अपील
प्रशासन ने दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अपुष्ट जानकारी साझा नहीं करने की अपील की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर विशेष निगरानी रखी जा रही है और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
सभी पक्षों ने अलग-अलग दावे
भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद मामले की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में हिंदू, मुस्लिम और जैन पक्ष ने अपने-अपने तर्क पेश किए। सभी पक्षों ने अलग-अलग दावे किए।
हिंदू पक्ष के प्रमुख तर्क
हिंदू पक्ष: भोजशाला पर प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट लागू नहीं होता। यह एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है। प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम 1951 की सूची में भोजशाला का नाम दर्ज है। वर्ष 2024 में अश्विनी उपाध्याय केस में दिए न्याय दृष्टांत को भोजशाला मामले में लागू नहीं किया जा सकता।
7 अप्रैल 2003 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा जारी आदेश को निरस्त करने की मांग। कोर्ट से आग्रह किया कि भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय कर इसे पूर्ण रूप से हिंदू समाज को सौंपा जाए। इससे मां सरस्वती की पूजा और हवन वर्षभर निर्बाध रूप से किया जा सके।
मुस्लिम पक्ष ने क्या कहा
वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन ने कोर्ट में कहा कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि भोजशाला मंदिर है, मस्जिद है या जैनशाला। विवादित स्थल का धार्मिक स्वरूप तय करने का अधिकार सिविल कोर्ट को है। हाई कोर्ट अनुच्छेद 226 के तहत रिट अधिकार क्षेत्र में सुनवाई कर रहा है।
वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने एएसआई सर्वे पर सवाल उठाते हुए कहा कि उपलब्ध कराई गई वीडियोग्राफी स्पष्ट नहीं है। रंगीन तस्वीरें भी नहीं दी गईं। उन्होंने अयोध्या फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां रामलला विराजमान की मूर्ति मौजूद थी। भोजशाला में कोई स्थापित मूर्ति नहीं है।
जैन समाज का दावा
जो प्रतिमा मां वाग्देवी की बताई जा रही है, वह जैन समुदाय की आराध्य मां अंबिका की है। सीहोर में मां अंबिका के मंदिर में ठीक वैसी ही प्रतिमा है, जो भोजशाला में मिली थी। इसे जैन तीर्थ घोषित किया जाना चाहिए।
1200 पुलिसकर्मियों को बुलाया गया
एसपी सचिन शर्मा ने बताया कि जिलेभर से करीब 1200 पुलिसकर्मियों को बुलाया गया है। धार शहर में 12 लेयर सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। इसके अलावा रिजर्व पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स को भी तैनात रखा गया है।
2022 में फिर सुर्खियों में आया था विवाद
यह विवाद वर्ष 2022 में फिर सुर्खियों में आया था, जब रंजना अग्निहोत्री सहित अन्य लोगों ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाने की मांग की गई थी
याचिका में भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने, हिंदू समाज को पूर्ण पूजा-अर्चना अधिकार देने, नमाज पर रोक, ट्रस्ट गठन और ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाने की मांग की गई थी।
विवादित परिसर का वर्ष 2024 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वे किया था। इसके बाद 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी के अवसर पर सुप्रीम कोर्ट ने दिनभर निर्बाध पूजा-अर्चना की अनुमति दी थी। हाईकोर्ट में इस मामले की नियमित सुनवाई 6 अप्रैल से शुरू होकर 12 मई तक चली थी।
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