भोजशाला को माना मां वाग्देवी का मंदिर: हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला; हिंदुओं को 365 दिन पूजा-अधिकार
KHULASA FIRST
संवाददाता

अयोध्या में राम, भोजशाला में वाग्देवी
अब मथुरा-काशी बाकी
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने बहुचर्चित धार भोजशाला विवाद में हिंदू पक्ष के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित परिसर के धार्मिक स्वरूप को देवी वाग्देवी (मां सरस्वती) मंदिर सहित भोजशाला माना है।
अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की वैज्ञानिक रिपोर्ट, पुरातात्विक साक्ष्यों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और संरचनात्मक विश्लेषण के आधार पर कहा कि वर्तमान संरचना पूर्व-विद्यमान मंदिर के अवशेषों पर निर्मित है।
खंडपीठ ने वर्ष 2003 के उस विवादित आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसमें हिंदुओं के पूजा-अधिकार सीमित किए गए थे और मुस्लिम समुदाय को नमाज की अनुमति दी गई थी। फैसले के बाद हिंदू संगठनों और श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है।
कई संगठनों ने इसे अयोध्या के बाद ‘सांस्कृतिक और धार्मिक न्याय’ की दिशा में बड़ा निर्णय बताया है। फैसले के बाद कई हिंदू संगठनों और पक्षकारों ने कहा कि भोजशाला पर आए निर्णय ने मथुरा और काशी से जुड़े मामलों को भी नई दिशा दी है।
उनका कहना है कि अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा और काशी विश्वनाथ परिसर से जुड़े मामलों में भी हिंदू पक्ष मजबूती से अपनी बात रखेगा।
एएसआई की वैज्ञानिक रिपोर्ट में मंदिर के प्रमाण... एएसआई रिपोर्ट में गणेश, ब्रह्मा, नरसिंह, भैरव, सिंह, हाथी, घोड़ा, सर्प और अन्य पौराणिक आकृतियों सहित 94 मूर्तियां एवं अवशेष मिलने का उल्लेख किया गया।
रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसी आकृतियां मस्जिद स्थापत्य में स्वीकार्य नहीं मानी जातीं।
सर्वेक्षण में 150 से अधिक संस्कृत और प्राकृत शिलालेख मिले, जिनमें परमारकालीन साहित्य, धार्मिक गतिविधियों और संस्कृत शिक्षा के प्रमाण दर्ज हैं। रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान संरचना पूर्व-निर्मित विशाल मंदिर के ऊपर बनाई गई थी, जिसे बाद में परिवर्तित कर मस्जिद के रूप में उपयोग किया गया।
खंडपीठ ने कहा कि ‘भोजशाला एवं कमाल मौला मस्जिद’ 18 मार्च 1904 से संरक्षित स्मारक है और 1958 के अधिनियम के अंतर्गत राष्ट्रीय महत्व का स्मारक माना जाएगा।
देवी वाग्देवी मंदिर का स्वरूप स्वीकार... न्यायालय ने कहा कि उपलब्ध ऐतिहासिक साहित्य, वास्तुशिल्पीय साक्ष्य और एएसआई की रिपोर्ट इस निष्कर्ष की पुष्टि करते हैं कि विवादित स्थल भोजशाला था, जहां देवी सरस्वती का मंदिर स्थित था।
अदालत ने एएसआई निदेशक के 7 अप्रैल 2003 के आदेश के उस हिस्से को निरस्त कर दिया, जिसमें हिंदुओं के पूजा-अधिकार सीमित किए गए थे तथा मुस्लिम समुदाय को नमाज की अनुमति दी गई थी।
एएसआई के पास रहेगा संपूर्ण नियंत्रण... फैसले में कहा गया कि भोजशाला मंदिर एवं संस्कृत शिक्षा के प्रशासन और प्रबंधन पर भारत सरकार तथा एएसआई निर्णय लेंगे। स्मारक का संरक्षण, संवर्धन एवं धार्मिक प्रवेश का नियमन एएसआई के नियंत्रण में रहेगा।
सरस्वती प्रतिमा की वापसी पर विचार संभव... कोर्ट ने कहा कि लंदन संग्रहालय में मौजूद देवी सरस्वती की प्रतिमा को वापस लाकर भोजशाला परिसर में पुनः स्थापित करने संबंधी मांग पर केंद्र सरकार विधि अनुसार विचार कर सकती है।
वहीं अदालत ने कहा कि यदि मुस्लिम पक्ष मस्जिद या नमाज स्थल के लिए आवेदन देता है, तो राज्य सरकार धार जिले में उपयुक्त भूमि आवंटन पर विचार कर सकती है।
‘प्राण प्रतिष्ठा’ पर कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी... निर्णय के पैरा 206 में अदालत ने हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन द्वारा रखे गए तर्क का उल्लेख करते हुए कहा कि विधिवत ‘प्राण प्रतिष्ठा’ के बाद स्थापित देवी-देवता का अस्तित्व मंदिर नष्ट होने के बाद भी समाप्त नहीं होता।
कोर्ट के समक्ष ‘प्राण प्रतिष्ठा’ की धार्मिक अवधारणा का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया, जिसमें बताया गया कि यह केवल मूर्ति स्थापना नहीं, बल्कि दिव्य चेतना से जुड़ने की प्रक्रिया है। निर्णय में ‘तैत्तिरीय उपनिषद’ और ‘शतपथ ब्राह्मण’ जैसे वैदिक ग्रंथों का भी उल्लेख किया गया।
आधुनिक तकनीकों से हुआ सर्वे... न्यायालय ने कहा कि एएसआई द्वारा बहु-विषयक वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया गया, जिसमें पुरातत्वविदों, अभिलेखविदों, रसायनविदों और संरक्षण विशेषज्ञों ने भाग लिया।
जांच में ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (जीपीआर), जीपीएस मैपिंग और स्ट्रेटिग्राफी जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया।
लंदन संग्रहालय की प्रतिमा पर टिप्पणी... अदालत ने कहा कि ब्रिटिश संग्रहालय में मौजूद प्रतिमा को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर देवी सरस्वती की प्रतिमा माना जा सकता है। जैन पक्ष द्वारा उसे ‘अंबिका’ या ‘विद्यादेवी’ बताए जाने के बावजूद कोर्ट ने कहा कि इससे विवादित स्थल को जैन मंदिर सिद्ध नहीं किया जा सकता।
हिंदू संगठनों में उत्साह, 100 वर्षों के संघर्ष की जीत
भोजशाला संघर्ष से जुड़े हर्ष शर्मा ने फैसले को हिंदू समाज की ऐतिहासिक जीत बताया। उन्होंने कहा कि हिंदुओं को मंगलवार को पूजा का अधिकार पहले से था, लेकिन अब 24 घंटे और 365 दिन पूजा का अधिकार मिलने से समाज में विशेष उत्साह है।
उन्होंने कहा कि भोजशाला का संघर्ष लगभग 100 वर्षों से चल रहा था और वे स्वयं पिछले 30 वर्षों से इस आंदोलन से जुड़े रहे हैं। इस दौरान उन्हें जेल जाना पड़ा और पुलिस प्रताड़ना भी सहनी पड़ी।
नवल किशोर शर्मा के योगदान का उल्लेख...हर्ष शर्मा ने कहा कि पूर्व आरएसएस प्रचारक नवल किशोर शर्मा ने प्रचारक का दायित्व छोड़कर भोजशाला आंदोलन को नई दिशा दी। वर्ष 2000 के आसपास धार और झाबुआ क्षेत्र में व्यापक जनजागरण अभियान चलाया गया, जिससे पूरे देश में भोजशाला आंदोलन को लेकर माहौल बना।
उन्होंने कहा कि आज मिली जीत में नवल किशोर शर्मा का लगभग 90 प्रतिशत योगदान है और वर्तमान में वे नर्मदा तट पर संत के रूप में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने सुनाया फैसला...यह ऐतिहासिक फैसला न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने सुनाया। फैसले को लेकर धार सहित प्रदेशभर में चर्चाओं का दौर जारी है।
अयोध्या फैसले का भी दिया हवाला...न्यायालय ने अयोध्या वर्डिक्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि पुरातात्विक साक्ष्य न्यायिक निष्कर्षों का आधार बन सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्णय आस्था नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए।
खंडपीठ ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिकाएं स्वीकार करते हुए मुस्लिम पक्ष की याचिकाएं निरस्त कर दीं। सुनवाई के दौरान सभी वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा गरिमा और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने की भी अदालत ने सराहना की।
संबंधित समाचार

शिकायत के 14 महीने बाद भी रास्ता बंद:आखिर कब होगी कार्रवाई

कलेक्टर का एक्शन:स्वामित्व योजना में लापरवाही पर की बड़ी कार्रवाई; 7 प्रोबेशनर पटवारियों की सेवा समाप्त

सांई मंदिर के पीछे अवैध निर्माण पर नगर निगम ने की कार्रवाई:भारी पुलिस बल और रिमूवल अमले की मौजूदगी में अतिक्रमण ध्वस्त

INDIA ब्लॉक की बैठक के बाद विपक्ष का हमला:राहुल गांधी बोले- मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा हमारा मिशन

मेसर्स कृष्णा एंटरप्राइजेस पर पड़ा छापा 46 ड्रम:लोडिंग वाहन और टैंकर किए जब्त

फ्लैट की रजिस्ट्री-लोन के नाम पर लाखों की धोखाधड़ी:दोस्त के खिलाफ FIR दर्ज

न्यायालय के आदेश की आड़ में बेदखली पीड़ित परिवार का सड़क पर बिखेरा सामान

2013 से ट्रैफिक पुलिस बल की कमी:अब तक क्या किया? हाईकोर्ट ने प्रशासन से मांगा जवाब

मां चंद्रघंटा का संदेश:सौम्यता और शौर्य का संतुलन ही बनाता है मजबूत व्यक्तित्व

दिवंगत पुलिसकर्मियों के परिवारों को संबल:कमिश्नर ने 2 नव आरक्षकों सहित 6 अनुसचिवीय कर्मचारियों को सौंपे नियुक्ति प्रमाण पत्र

भक्ति रस में रमा शहर:मां की आराधना और गरबों की धूम का उत्सव

खुलासा फर्स्ट के आंगन में महाप्रसादी का वितरण जारी:नवरात्रि महापर्व के पावन अवसर पर 10 दिवसीय महोत्सव

प्रॉपर्टी टैक्स के साथ लगेगा इतने प्रतिशत फायर सेस:टैक्स से छूट वाली संपत्तियों को राहत; नए नियमों में स्वयंसेवकों की भर्ती

मंत्रि-परिषद ने पारित किया ‘विकसित मध्य प्रदेश’ का संकल्प:मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक

आदिवासियों के मकान तोड़े जाने के मामले ने पकड़ा तूल:कार्तिकेय सिंह चौहान ने अधिकारियों को दी ये चेतावनी

पिटती पुलिस टूटता मनोबल:खादी के लिए खाकी के हाथ काटने में जल्दबाजी आखिर क्यों

मंदिर की दानपेटी तोड़कर नकदी और चांदी के सिक्के चोरी:बदमाशों ने दो घरों को भी बनाया निशाना

एचआईवी के इतने नए मामले:इस मेडिकल कॉलेज में मिले सबसे ज्यादा संक्रमित; इतने मरीज एआरटी से दूर

बिना नंबर की फॉर्च्यूनर ने बुझा दिया एक घर का चिराग:बाइक को मारी टक्कर, मैकेनिक की हुई मौत; दो नाबालिग साथी हुए गंभीर घायल

इस पूर्व मंत्री ने किसको को दी नसीहत:बोले; ‘ऐसा भी क्या काम, जो जमीर बेचकर करना पड़े’ पद से इस्तीफा देकर साथ आइए, दोनों मिलकर सड़क पर लड़ेंगे जनता की लड़ाई
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!