भागीरथपुरा जहरीला जलकांड: उजाड़ा एक और परिवार; निगम की खूनी लापरवाही
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा की गलियों में पसरा मातम नगर निगम की उस मानसिकता का खुलासा है, जिसने जनता की जान को मजाक बना दिया है। नर्मदा की मुख्य पाइपलाइन में मल-मूत्र मिलने की जिस गंभीर लापरवाही को महीनों नजरअंदाज किया गया, उसने अब तक तीन दर्जन से अधिक घरों के मुखिया छीन लिए हैं। इस खूनी खेल का ताजा शिकार बने हैं 54 वर्षीय रामनरेश यादव।
शुक्ला गली निवासी रामनरेश यादव जनवरी के उस मनहूस वक्त से ही मौत से जंग लड़ रहे थे, जब नलों से आया दूषित पानी पिया जो उनकी रगों में जहर बनकर फैल गया। संक्रमण की शुरुआत होते ही परिजनों ने छीपाबाखल स्थित डॉ. शेख के क्लिनिक में भर्ती किया था।
कई दिन डॉ. शेख की निगरानी में रहे लेकिन मल-मूत्र का संक्रमण इतना घातक था कि सुधार नहीं हुआ बल्कि पैरों में भयंकर सूजन आने लगी और पेट दर्द असहनीय हो गया। जब स्थिति डॉ. शेख के नियंत्रण से बाहर हो गई तो उन्होंने 11 फरवरी को यादव को मरीमाता चौराहे के शशि हॉस्पिटल रैफर कर दिया।
शशि हॉस्पिटल की जांच रिपोर्टों ने जो खुलासा किया, उसने परिवार के पैरों तले जमीन खिसका दी। डॉ. राकेश के अनुसार, दूषित पानी के संक्रमण ने रामनरेश के पूरे शरीर को अपनी चपेट में ले लिया था और उनकी दोनों किडनियां डैमेज हो चुकी थीं। अस्पताल में बेसुध रामनरेश के शरीर से जब 5-6 लीटर जहरीला पानी निकाला गया, तब हर बूंद के साथ परिवार की उम्मीदें भी दम तोड़ रही थीं।
इलाज में परिवार की पूरी जमापूंजी स्वाहा हो गई। महज 10 दिन में निजी अस्पताल के बिलों ने करीब डेढ़ लाख रुपए निगल लिए। घर की तिजोरी खाली हो गई और पिता की सांसें टूटने लगीं, तब विवश होकर परिजनों ने 21 फरवरी को सरकारी मदद के भरोसे ट्रू केयर हॉस्पिटल में शिफ्ट किया लेकिन मौत का फंदा इतना कस चुका था कि 24 फरवरी की तड़के 4 बजे रामनरेश ने हमेशा के लिए आंखें मूंद लीं।
उनकी पत्नी गीताबाई के विलाप ने पूरे मोहल्ले का कलेजा चीर दिया। उन्होंने भर्राई आवाज में बताया संक्रमण का प्रहार इतना क्रूर था कि मौत के बाद भी रामनरेश की आंखों और नाक से दूषित पानी का रिसाव होता रहा। यह नगर निगम प्रशासन के उस दूषित तंत्र की आखिरी निशानी थी।
परीक्षा फॉर्म नहीं भर सकी छोटी बेटी
रामनरेश यादव की बड़ी बेटी प्रिया ने खुलासा फर्स्ट को बताया पिता की बीमारी ने उनकी छोटी बहन प्राची का भविष्य बर्बाद कर दिया। कनकेश्वरी कॉलेज में बीकॉम प्रथम वर्ष की छात्रा प्राची पिता को बचाने की भागदौड़ और आर्थिक तंगी के चलते 10 फरवरी को परीक्षा फॉर्म तक नहीं भर सकी। उसका साल बर्बाद हो गया और सबसे छोटी बेटी पूर्वी, जो आठवीं की परीक्षा दे रही है, के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। बेटा न होने के कारण उनके भतीजे नीतेश यादव ने अंतिम संस्कार किया।
दोषियों पर हत्या का मुकदमा कब: भागीरथपुरा की ये गलियां चीख-चीख कर सवाल पूछ रही हैं क्या लापरवाह अधिकारियों और इंजीनियरों पर हत्या का मुकदमा दर्ज होगा, जिनकी अनदेखी से पाइपलाइनें महीनों तक मल-मूत्र की गंदगी से मिली रहीं?
क्या इन बेबस बेटियों को पिता और खोया भविष्य वापस मिल पाएगा? दो महीने बीतने के बाद भी क्षेत्र में संक्रमण का कहर थमा नहीं है और मौतों का सिलसिला जारी है।
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