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बंगाल ने सुन ली पुकार: पलटानों दरकार; किसका होगा बंगाल, नतीजों को लेकर देशभर में उबाल

KHULASA FIRST

संवाददाता

30 अप्रैल 2026, 3:54 pm
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बंगाल ने सुन ली पुकार

6 में से 5 एक्जिट पोल बता रहे पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार

पश्चिम बंगाल में दूसरे व अंतिम दौर में भी रिकॉर्डतोड़ हुआ मतदान, हिंसा की कोई घटना नहीं

बंपर वोटिंग, मतलब क्या बंगाल में ‘खेला’ हो गया? ममता बनर्जी की विदाई के बढ़े आसार

टीएमसी का भी दो तिहाई सीट का दावा, ममता ने खारिज किए एक्जिट पोल के रिजल्ट्स

एक्जिट पोल कर रहे इशारा, असम में हेमंत सरकार दोबारा, तमिलनाडु में अभिनेता विजय भी बनेंगे किंगमेकर

नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 93 फीसदी, दूसरे व अंतिम चरण में 92 प्रतिशत से भी ज्यादा हुई वोटिंग क्या इशारा कर रही है? क्या बंगाल में खेला हो गया? क्या बंगाल का चुनाव जनता वर्सेस ममता हो गया? नो वोट टू ममता हो गया?

क्या ‘भद्रलोक’ से ममता की विदाई हो रही है और पहली बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है? किसके हाथ होगी सत्ता की चाबी? भाजपा कैंप का मिजाज तो बता रहा है कि इस बार सत्ता की चाबी उनके पास आ रही है। दावे के मैदान में तो ममता व उनकी पार्टी टीएमसी भी हैं।

पार्टी नेताओं का दावा है कि वे 2021 से ज्यादा वोट प्रतिशत व सीट ला रहे हैं, लेकिन देश के इस अहम मुकाबले पर आए एक्जिट पोल टीएमसी के दावे को धो रहे हैं। 5 राज्यों के चुनाव बाद सामने आए 6 प्रमुख एक्जिट पोल में से 5 के आंकड़े प. बंगाल में भाजपा की सरकार बनवा रहे हैं।

एक्जिट पोल ये भी इशारा कर रहे हैं कि बंगाल के बगल असम में भाजपा दोबारा सत्ता में आ रही है। यानी हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार फिर एक बार बनने जा रही है। एक्जिट पोल पुड्डुचेरी में भी एनडीए की सरकार बनवा रहे हैं। एक्जिट पोल कांग्रेस को भी निराश नहीं कर रहे।

इनकी मानें तो पार्टी अपने गठबंधन के साथ केरल में सत्ता में आ रही है। एक्जिट पोल दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में सुपरस्टार थलपति विजय किंगमेकर बनकर उभर रहे हैं। थलपति विजय के अकेले ही सत्ता में आने के संकेत दिए गए हैं। एक एक्जिट पोल तो विजय के दल को 120 सीट तक दे रहा है। तमिलनाडु में वैसे तो एक्जिट पोल एक बार फिर स्टालिन की सरकार बनना बता रहे हैं।

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम व पुड्डुचेरी की जनता ने अपनी राय ईवीएम में दर्ज कर दी है। नतीजे 4 मई को आएंगे, लेकिन तब तक के लिए राजनीतिक दलों में धुकधुकी शुरू हो गई है। नतीजों को लेकर सबसे ज्यादा उबाल बंगाल को लेकर है।

मतदान के बाद आए पूर्वानुमान बता रहे हैं कि पश्चिम बंगाल ने शायद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वह पुकार सुन ली, जो वह हर चुनावी सभा में जोर-शोर से कर रहे थे-पलटानों दरकार। एक्जिट पोल बता रहे हैं कि सरकार पलटने की जो दरकार पीएम ने ‘भद्रलोक’ से की थी, वह असर कर गई।

27 अप्रैल को बैरकपुर की अपनी आखिरी चुनावी सभा में प्रधानमंत्री की 4 मई को पुनः लौटकर आने व मिठाई के साथ झालमुरी बांटने की बात सही साबित होती नजर आ रही है। दावे-प्रतिदावे अब 4 दिन तक ऐसे ही चलेंगे, लेकिन एक्जिट पोल अगर सही साबित होते हैं तो इस बार बंगाल इतिहास रचने जा रहा है।

इतिहास तो तमिलनाडु में भी बनता दिख रहा है। तमिल सुपरस्टार थलपति विजय सत्ता के भी सुपरस्टार बन सकते हैं। चुटीली संवाद अदायगी वाले हेमंत विश्वसरमा भी दोबारा सत्ता में आ रहे हैं और राहुल गांधी के लिए भी राहत की बात है कि केरल में उनकी पार्टी सत्ता में आ रही है।

इस बार ममता को निशाने पर नहीं रखा
एक्जिट पोल के इन नतीजों ने भाजपा खेमे को उत्साह से लबरेज कर दिया है। खासकर बंगाल के एक्जिट पोल ने पार्टी के बड़े नेता व कार्यकर्ताओं का सीना 56 इंच कर दिया है। बंगाल के पार्टी नेताओं में दीदी की विदाई के नारे गुंजाना शुरू कर दिए हैं और दावा यहां तक है कि ममता को भवानीपुर में भी शुभेंदु अधिकारी हराएंगे।

भाजपा नेता ही नहीं, चुनावी रणनीतिकार भी मान रहे कि बंगाल का इस बार का चुनाव पूरी तरह से बदला हुआ था। एक तो बंपर वोटिंग, दूसरा भयरहित मतदान। हिंसा का न होना और चुनाव को केंद्र सरकार की उन योजनाओं पर फोकस करना, जिनका लाभ ममता राज में राज्य को नहीं मिल रहा था। इनमें आयुष्मान से इलाज व सातवां वेतन आयोग को सरकार बनते ही तुरंत लागू करने की भाजपाई घोषणा ने चुनाव को नया रंग दे दिया।

पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती का असर
इस बार भाजपा ने ममता बनर्जी को व्यक्तिगत निशाने पर लेने के बजाय ममता सरकार की नाकामियों व महिला सुरक्षा को मुद्दा बनाया था। चुनाव के दौरान ढाई लाख से ज्यादा पैरामिलिट्री जवानों की तैनाती ने भी बंपर वोटिंग में अहम भूमिका निभाई। इसमें चुनाव आयोग की सख्ती भी प्रमुख रही।

इसी सख्ती का नतीजा था कि इस बार एक भी बूथ एजेंट को बूथ से बाहर करने की घटना नहीं हुई और न ही कोई हत्या हुई। इस बदलाव ने आम वोटर्स को मतदान के लिए प्रेरित किया और उसी का परिणाम रहा कि महिलाओं के मतदान का प्रतिशत 91 फीसदी तक पहुंच गया।

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