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प्रदेश में बीयर का संकट: गर्मी बढ़ी तो सप्लाई घटी; ठेकेदारों पर बढ़ा दबाव, रोज अधिकारियों से गुहार

KHULASA FIRST

संवाददाता

12 मई 2026, 3:37 pm
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प्रदेश में बीयर का संकट

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी के साथ बीयर का संकट गहराता जा रहा है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे बीयर की मांग अचानक तेज हो गई है। लेकिन मांग के अनुपात में सप्लाई नहीं होने से शराब दुकानों पर बीयर की कमी साफ दिखाई दे रही है। हालात यह हैं कि जहां रोजाना करीब 1 लाख 40 हजार पेटी बीयर की जरूरत है, वहीं आपूर्ति एक लाख पेटी से भी नीचे सिमट गई है। यानी लगभग 30 से 35 प्रतिशत की कमी बाजार में बनी हुई है।

इस संकट का सबसे ज्यादा असर उन शराब ठेकेदारों पर पड़ रहा है, जिन्होंने इस साल महंगे दामों पर ठेके लिए हैं। आमतौर पर अप्रैल से जून के बीच का समय उनके लिए सबसे ज्यादा कमाई का होता है, जब बीयर की बिक्री चरम पर रहती है और वे अपनी सालाना ड्यूटी का बड़ा हिस्सा इसी अवधि में वसूल कर लेते हैं। लेकिन इस बार सप्लाई बाधित होने से उनकी पूरी गणित बिगड़ गई है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि ठेकेदार रोजाना आबकारी अधिकारियों को फोन कर बीयर की सप्लाई बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

प्रदेश के आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने हालात को देखते हुए व्यवस्था सुधारने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि रोजाना कम से कम 98 हजार पेटी बीयर दुकानों तक पहुंचाई जाए। इसके लिए प्रदेश के 14 वेयरहाउस का कोटा तय कर दिया गया है, ताकि उपलब्ध संसाधनों के आधार पर अधिकतम सप्लाई सुनिश्चित की जा सके।

आदेश के अनुसार, इंदौर वेयरहाउस से सबसे ज्यादा 28 हजार पेटी प्रतिदिन भेजने को कहा गया है। इसके बाद भोपाल से 13,500 पेटी, उज्जैन से 8 हजार पेटी, खरगोन और रीवा से 6-6 हजार पेटी, जबकि जबलपुर से 5,500 पेटी सप्लाई करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा ग्वालियर, सिवनी और रतलाम वेयरहाउस से रोजाना 5-5 हजार पेटी बीयर भेजने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि जमीनी स्तर पर ठेकेदारों का कहना है कि उन्हें तय कोटे से भी कम बियर मिल रही है, क्योंकि उत्पादन स्तर पर ही कमी बनी हुई है।

इस संकट की एक बड़ी वजह प्रमुख बियर निर्माता कंपनी सोम डिस्टलरी एंड ब्रेवरीज लिमिटेड की सप्लाई बंद होना बताया जा रहा है। यह कंपनी पहले प्रदेश की कुल सप्लाई का लगभग 30 से 35 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराती थी। इसके बंद होने से बाजार में अचानक बड़ा गैप पैदा हो गया है, जिसे अन्य कंपनियां अभी तक भर नहीं पाई हैं।

दूसरी ओर, अवैध तस्करी ने भी हालात को और जटिल बना दिया है। जानकारी के अनुसार, गुजरात में शराबबंदी होने के कारण वहां बीयर की लगातार मांग बनी रहती है। ऐसे में “गुजरात लाइन” चलाने वाले तस्करों का एक नया नेटवर्क सक्रिय हो गया है। अब इंदौर के बजाय अन्य रूटों से बीयर की खेप गुजरात भेजी जा रही है। आरोप है कि इससे मध्य प्रदेश के कुछ वेयरहाउस से निकलने वाली बीयर भी अवैध रूप से बाहर जा रही है, जिससे स्थानीय बाजार में और कमी बढ़ रही है।

कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश में बीयर संकट अब केवल आपूर्ति का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था, उत्पादन क्षमता और अवैध तस्करी जैसे कई पहलुओं से जुड़ा जटिल संकट बन चुका है। यदि जल्द ही सप्लाई चेन को संतुलित नहीं किया गया, तो आने वाले हफ्तों में हालात और बिगड़ सकते हैं। जिसका सीधा असर न सिर्फ उपभोक्ताओं पर, बल्कि राज्य के राजस्व और ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ेगा।

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