मोर्चा अध्यक्ष बनने नेत्रियों में छिड़ी जंग: ताई वृंदा के पक्ष में; इंदौर से लेकर दिल्ली तक चल रही लॉबिंग
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भाजपा में महिला मोर्चा में नए शहर व जिलाध्यक्षों की नियुक्ति होनी है और पद पाने के लिए नेत्रियों में जंग छिड़ गई हैं। नेत्रियां न केवल अपने राजनीतिक आकाओं, बल्कि अन्य संपर्कों से भी पद पाने के लिए इंदौर से लेकर दिल्ली तक लॉबिंग कर रही हैं।
उधर, आठ बार की सांसद और लोकसभा अध्यक्ष रहीं सुमित्रा महाजन ने 65 वर्षीय वृंदा गौड़ को शहर अध्यक्ष बनवाने के लिए कमर कस ली है।
एक ओर भाजपा संसद-विधानसभा और निकायों में 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण देने के लिए बिल लाई थी, जिसका सबसे ज्यादा स्वागत भाजपा की महिला मोर्चा ने ही किया था।
उसी मोर्चे के लिए इंदौर में पद पाने की लड़ाई शुरू हो गई है। इंदौर में नई शहर अध्यक्ष व जिलाध्यक्ष की नियुक्ति होनी हैं, जिसके लिए नेत्रियां इंदौर से लेकर दिल्ली तक लॉबिंग कर रही हैं।
वे अपने राजनीतिक आकाओं के अलावा संपर्कों के माध्यम से भी पद पाने की जुगाड़ लगा रही हैं।
शहर अध्यक्ष शैलजा मिश्रा का कार्यकाल पूरा हो चुका है और उनकी जगह अध्यक्ष बनने के लिए नेत्रियां सक्रिय हो गई हैं। वरिष्ठ नेत्री वृंदा गौड़ का नाम शहर अध्यक्ष के रूप में चल रहा है, जिनके लिए पूर्व सांसद व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने दिल्ली तक फोन घनघना दिए हैं।
वे 65 वर्ष की हैं लेकिन बताया जा रहा है कि वे मोर्चा में काफी सक्रिय हैं। अनेक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी रही है। इसी आधार पर वे पद पाने का प्रयास कर रही हैं।
ये भी दौड़ में
श्रेष्ठा जोशी, ज्योति पंडित के नाम भी हैं। देपालपुर की हेमलता डांगर मौजूदा महामंत्री हैं और अब जिलाध्यक्ष बनना चाहती हैं। यहीं की पूजा मंडोवरा भी दावेदार हैं जो वर्तमान में सांस्कृतिक प्रकोष्ठ की जिला संयोजक हैं।
राऊ से किरण सूर्यवंशी और शारदा कुशवाह, सांवेर से पूजा यादव भी मजबूत दावेदारी जता रही हैं। सूर्यवंशी वर्तमान में अध्यक्ष है, जो फिर से बनने की इच्छुक हैं। वे तगड़ी लॉबिंग कर रही हैं।
महू की दो नेत्रियां आमने-सामने
महू मूल की राज्यसभा सदस्य कविता पाटीदार और विधायक उषा ठाकुर के बीच मोर्चा को लेकर ठन गई है। उषा को पसंद नहीं है कि उनकी विधानसभा में कोई और हस्तक्षेप करे। जबकि पाटीदार का गृह क्षेत्र है तो वह अपना प्रभाव बरकरार रखना चाहती हैं।
ठाकुर की नाराजगी की एक वजह ये भी है कि विधानसभा चुनाव में बगावत करने वालों को सांसद पाटीदार का अप्रत्यक्ष संरक्षण था। इसी वजह से बाद में उन पर कोई कार्रवाई भी नहीं हुई, जिससे वे खासी नाराज हैं।
अब वे किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं चाहती हैं, लेकिन पाटीदार चाहती है कि उनसे जुड़े नेताओं की संगठन में जिम्मेदारी मिले। वे जिलाध्यक्ष के लिए माया पटेल (गुर्जर) का नाम आगे बढ़ा रही हैं।
ठाकुर इस पद के लिए मानपुर की सीमा पटेल को प्रोजेक्ट कर रही हैं। संगठन सकते में है। वह नहीं चाहता कि नियुक्ति के बाद कोई विवाद हो। हो सकता है कि महू की किसी नेत्री को पद न मिले। दोनों नेत्रियों के बीच पहले भी विवाद हो चुका है।
उषा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर की मौजूदगी में विकास कार्यों का लोकार्पण कार्यक्रम रखा था, जिसके शिलालेख पर राज्यसभा सदस्य कविता पाटीदार का नाम नहीं था। इस पर काफी विवाद हो चुका है।
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