सुरंग के रास्ते सीधे पहुंचेंगे बाबा के लोक: जाम से मिलेगी मुक्ति; इतने मीटर लंबा होगा अंडरग्राउंड कॉरिडोर रेलवे लाइन के नीचे भी बनेगा अंडरपास
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, उज्जैन।
सिंहस्थ 2028 में करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में शहर की ट्रैफिक व्यवस्था प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। सावन सोमवार पर हाल ही में करीब साढ़े सात लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने के बाद इंदौर-उज्जैन हाईवे से हरिफाटक तक कई जगह घंटों जाम लगा था।
अब इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए हरिफाटक पार्किंग से महाकाल लोक तक करीब 650 मीटर लंबा भूमिगत कॉरिडोर बनाया जा रहा है। 91.74 करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति वाले इस प्रोजेक्ट का करीब 15 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसे 15 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
पार्किंग में वाहन, टनल से सीधे महाकाल लोक
प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद श्रद्धालु हरिफाटक क्षेत्र में वाहन पार्क कर सकेंगे। इसके बाद वे जमीन के नीचे बने कॉरिडोर से सीधे महाकाल लोक पहुंचेंगे। दर्शन के बाद वापसी के लिए भी इसी कॉरिडोर का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
इससे श्रद्धालुओं को मुख्य सड़कों के ट्रैफिक से गुजरने की जरूरत कम होगी और हरिफाटक ब्रिज पर वाहनों व पैदल श्रद्धालुओं का दबाव घटाने में मदद मिलेगी।
महाकालेश्वर मंदिर के कारण उज्जैन में सालभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। सावन, महाशिवरात्रि, त्योहारों और सिंहस्थ जैसे अवसरों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है।
इंदौर-उज्जैन रोड, आगर रोड और गऊघाट यानी पुराने उज्जैन-बड़नगर मार्ग से आने वाले श्रद्धालुओं का बड़ा दबाव हरिफाटक की ओर रहता है। यही वजह है कि हरिफाटक ब्रिज ट्रैफिक के लिए बड़ा बॉटलनेक बन जाता है।
650 मीटर लंबी टनल, आने-जाने के लिए अलग बॉक्स
यह सामान्य अंडरपास नहीं होगा, बल्कि करीब 650 मीटर लंबा भूमिगत कॉरिडोर तैयार किया जाएगा। इसका करीब 450 मीटर हिस्सा जमीन से लगभग 10 मीटर नीचे बनेगा।
कॉरिडोर में दो अलग-अलग बॉक्स होंगे। प्रत्येक की चौड़ाई करीब 9 मीटर होगी। एक बॉक्स का इस्तेमाल जाने और दूसरे का लौटने के लिए किया जाएगा। इससे श्रद्धालुओं की आवाजाही दो अलग दिशाओं में रहेगी और भीड़ प्रबंधन आसान होगा।
डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि जरूरत के मुताबिक बैरिकेडिंग और क्राउड मैनेजमेंट किया जा सके। दोनों बॉक्स इतने चौड़े होंगे कि आवश्यकता पड़ने पर बड़े वाहन भी यहां से गुजर सकें। हालांकि प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाना और हरिफाटक क्षेत्र का ट्रैफिक दबाव कम करना है।
बारिश का पानी निकालने के लिए अलग ड्रेनेज सिस्टम
भूमिगत कॉरिडोर में बारिश के दौरान जलभराव न हो, इसके लिए अलग ड्रेनेज सिस्टम बनाया जा रहा है। दोनों बॉक्स में अंडरग्राउंड ड्रेनेज लाइन होगी, जिससे पानी एक अलग संपवेल तक पहुंचाया जाएगा।
टनल के कुछ हिस्सों को ऊपर से खुला रखने की भी योजना है, ताकि प्राकृतिक रोशनी और हवा का आवागमन बना रहे। आपात स्थिति से निपटने के लिए अलार्म और इमरजेंसी सिस्टम भी प्रस्तावित है।
करीब हर 100 मीटर पर ऐसी व्यवस्था रखने की योजना है, जिससे जरूरत पड़ने पर श्रद्धालु पुलिस, एंबुलेंस या अन्य आपात सेवाओं तक सूचना पहुंचा सकें।
अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य
प्रोजेक्ट की अनुबंधित अवधि 15 महीने रखी गई है और इसे अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। हरिफाटक पार्किंग क्षेत्र से निर्माण शुरू हो चुका है। शुरुआती चरण में जमीन से करीब 8 से 10 मीटर नीचे स्लोप तैयार किया जा रहा है।
फिलहाल करीब 15 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। आगे टनल के बड़े हिस्से का भूमिगत निर्माण होना है। प्रोजेक्ट के दायरे में एक थाना, स्कूल और कुछ अन्य भवन भी आ रहे हैं। इनके हटाने, यूटिलिटी शिफ्टिंग और जमीन से जुड़े काम निर्माण की गति को प्रभावित कर सकते हैं।
रेलवे ट्रैक के नीचे से गुजरेगी टनल
प्रोजेक्ट का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा रेलवे लाइन के नीचे प्रस्तावित अंडरपास है। इसके निर्माण की जिम्मेदारी रेलवे की होगी। इसके लिए राज्य शासन की ओर से रेलवे को 31 करोड़ रुपए दिए गए हैं।
शासन ने 28 अक्टूबर 2025 को प्रोजेक्ट के लिए 91.74 करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति दी थी। टनल निर्माण की अनुबंधित लागत 35.37 करोड़ रुपए है।
रेलवे लाइन के नीचे निर्माण के लिए 31 करोड़ रुपए निर्धारित हैं। बाकी राशि भू-अर्जन, भवनों और यूटिलिटी शिफ्टिंग सहित अन्य कार्यों में खर्च होगी।
रेलवे ट्रैक के नीचे निर्माण के दौरान रेल यातायात और सुरक्षा मानकों का पालन सबसे अहम रहेगा। यही हिस्सा प्रोजेक्ट की तकनीकी चुनौती और समयसीमा के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
महाकाल क्षेत्र में पहले से दो टनल संचालित
महाकाल मंदिर परिसर और आसपास श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए पहले से दो टनल संचालित हैं, जबकि दो अन्य पर काम चल रहा है। मौजूदा व्यवस्था में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग टनल का इस्तेमाल किया जाता है।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, श्रद्धालुओं को 13 से 15 कतारों के जरिए प्रवेश दिया जाता है। एक दिन में 7 लाख तक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जबकि सामान्य दिनों में औसतन करीब 2 लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं।
मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार, प्रवेश और निकास के लिए दो टनल फिलहाल संचालित हैं। इसके अलावा हैरिटेज होटल से शहनाई द्वार स्थित न्यू वेटिंग हॉल तक भी एक टनल बनाई जा रही है। यह करीब 6 मीटर चौड़ी होगी और 24 मीटर चौड़ी सड़क को पार करते हुए मंदिर क्षेत्र तक पहुंचेगी।
सिंहस्थ में बढ़ेगी कॉरिडोर की अहमियत
कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के अनुसार, हरिफाटक ब्रिज से बनने वाला भूमिगत रास्ता सीधे महाकाल लोक तक पहुंचेगा। श्रद्धालु पार्किंग में वाहन खड़ा करने के बाद ट्रैफिक में फंसे बिना भूमिगत कॉरिडोर से महाकाल क्षेत्र तक पहुंच सकेंगे।
सिंहस्थ 2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए यह कॉरिडोर उज्जैन के ट्रैफिक और क्राउड मैनेजमेंट में अहम भूमिका निभा सकता है। खासतौर पर पीक सीजन में हरिफाटक ब्रिज पर दबाव कम करना इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा उद्देश्य है।
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