ओडिशा में बाढ़ से 67 हजार प्रभावित: बिहार में गंगा-गंडक उफान पर; 50 हजार से ज्यादा घर पानी में; हिमाचल की 67 सड़कें बंद
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
देश के कई हिस्सों में मानसून का असर जारी है। उत्तर प्रदेश और बिहार समेत चार राज्यों में तेज बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। उत्तर प्रदेश के 47 जिलों में आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है।
वहीं, ओडिशा में बाढ़ से 67 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि राजस्थान में बारिश थमने के बाद कई शहरों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर पहुंच गया।
ओडिशा में 67 हजार से ज्यादा लोग बाढ़ की चपेट में
ओडिशा के तीन जिलों में 67 हजार से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। मौसम विभाग ने राज्य के उत्तरी और तटीय इलाकों में 2 सितंबर तक भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। ऐसे में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हालात और बिगड़ने की आशंका है।
बिहार में गंगा-गंडक खतरे के निशान से ऊपर
बिहार में गंगा और गंडक नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। बाढ़ का पानी कई इलाकों में फैल गया है। राज्य में 50 हजार से ज्यादा घरों के पानी में डूबने की जानकारी सामने आई है। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
हिमाचल में 67 सड़कें बंद
हिमाचल प्रदेश में बारिश और खराब मौसम का असर यातायात पर भी पड़ा है। राज्य में 67 सड़कें बंद हैं। इससे कई इलाकों में लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
राजस्थान में बारिश थमी, 15 शहरों में पारा 35° पार
राजस्थान में मानसून आने के बाद शुक्रवार को पहली बार ऐसा दिन रहा, जब राज्य में कहीं भी बारिश दर्ज नहीं हुई। बारिश थमने के साथ तापमान में भी बढ़ोतरी हुई। अलवर समेत राज्य के 15 शहरों में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर दर्ज किया गया।
मानसून के बीच देश के अलग-अलग राज्यों में मौसम का अलग-अलग असर देखने को मिल रहा है। कहीं भारी बारिश और बाढ़ से जनजीवन प्रभावित है, तो कहीं बारिश थमने के बाद तापमान बढ़ रहा है।
मंदाकिनी फिर उफान पर, चित्रकूट में बाढ़ जैसे हालात
भाद्रपद मास के पहले दिन करीब नौ घंटे हुई मूसलाधार बारिश से चित्रकूट में मंदाकिनी नदी एक बार फिर उफान पर आ गई। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से रामघाट समेत निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। घाट किनारे की कई दुकानों में पानी घुस गया, जबकि आसपास की गलियां और सड़कें जलमग्न हो गईं।
रामघाट क्षेत्र में हालात सबसे ज्यादा खराब नजर आए। नदी का पानी दुकानों तक पहुंचने के बाद व्यापारियों को अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा। कई जगह पानी इतना भर गया कि सड़कों पर नावें चलती दिखाई दीं। घाट पर स्थापित कई प्रतिमाएं भी पानी में डूबने लगी हैं।
धार्मिक स्थलों के रास्तों पर भी जलभराव
लगातार बारिश के कारण चित्रकूट के प्रमुख धार्मिक स्थलों आरोग्यधाम, गुप्तगोदावरी और सती अनुसुइया जाने वाले रास्तों पर भी पानी भर गया। इससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ।
श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण परिक्रमा मार्ग पर पुरानी लंका तिराहे के पास भी भारी जलभराव देखा गया। कई रास्तों पर पानी जमा होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
पानी के साथ बहता दिखा गृहस्थी का सामान
मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने के बाद निचले इलाकों में पानी के साथ गृहस्थी का सामान बहता हुआ भी दिखाई दिया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, मानसून के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर हर साल निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना रहता है।
प्रशासन से सुरक्षा और जल निकासी के इंतजाम की मांग
लगातार बारिश के बाद चित्रकूट के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से जल निकासी की बेहतर व्यवस्था और निचले इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।
वहीं, लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने घाट क्षेत्र में आवाजाही रोकने और लोगों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। रामघाट की सीढ़ियां पानी में डूब चुकी हैं और नदी का पानी घाट किनारे की दुकानों तक पहुंच गया है।
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