अपात्र को बीईओ बनाने का प्रयास: पद हुआ बदनाम; कोई प्राचार्य नहीं बनना चाहता ब्लॉक शिक्षा अधिकारी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
2018 से 2026 के बीच ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर कार्यालय में सामने आए 2.86 करोड़ रुपए के घोटाले के बाद अब शहर का कोई भी प्राचार्य इस पद पर बैठने को तैयार नहीं है।
हालांकि, इस घोटाले में तत्कालीन बीईओ के नाम जरूर आए, लेकिन प्रकरण सिर्फ एक चपरासी के खिलाफ दर्ज करवा दिया गया था।
हालांकि, इस मामले की फिलहाल भी जांच जारी है, लेकिन यह पद इस कदर बदनाम हो गया है कि अब कोई भी जिम्मेदार शिक्षक इस पद पर आने को तैयार नहीं है।
हजारों शिक्षकों के प्रकरण अधर में
शहर में महत्वपूर्ण जिला विकासखंड शिक्षा अधिकारी का पद खाली होने से हजारों शिक्षकों के प्रकरण का निपटान नहीं हो रहा है। शिक्षक संघ लगातार अधिकारियों से मांग कर रहे हैं कि 20 दिन से अधिक समय होने के बावजूद शहर में बीईओ का पद खाली पड़ा है।
दो दिन पहले मप्र राज्य कर्मचारी संघ और आजाद अध्यापक एवं शिक्षक संघ द्वारा जिला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन को ज्ञापन देकर जल्द बीईओ की नियुक्ति की मांग की थी, जिस पर सीईओ जैन ने दो दिन में बीईओ की नियुक्ति करने का आश्वासन दिया था।
सीईओ द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी को जल्द बीईओ की तलाश कर नियुक्त करने की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसके बाद मंगलवार को जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. शांता स्वामी भार्गव ने अपने ऑफिस में इंदौर ब्लॉक के सभी 37 संकुल प्राचार्यों को मीटिंग के लिए बुलाया था।
इस मीटिंग में सभी प्राचार्यों से बात कर बीईओ बनने के लिए लिखित में सहमति मांगी गई, लेकिन जब सभी ने अपने जवाब लिखित में दिए तो उसमें से एक भी प्राचार्य ने बीईओ बनने में सहमति नहीं जताई।
जिला प्रशासन प्राचार्य को क्यों यह पद देने पर तुला?
वर्तमान में ब्लॉक एजुकेशन ऑफिस का पद सहायक संचालक रैंक का है, फिर भी जिला प्रशासन प्राचार्य को क्यों यह पद देने में तुला है, यह बात समझ के बाहर है। जबकि शिक्षा विभाग के सम्भाग कार्यालय में 3 और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय मंे एक सहायक संचालक पदस्थ है, फिर भी अधिकारी इनको यह पद देने से बच रहे है।
खुद प्रभारी ज्वाइंट डायरेक्टर एजुकेशन अनीता चौहान सहायक संचालक हैं। उनके अलावा केसरसिंह डावर और किरण बाला चौहान भी सहायक संचालक हैं। जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. शांता स्वामी भार्गव खुद सहायक संचालक हैं, जबकि उनके ही कार्यालय में पदस्थ शौर्य मल्होत्रा भी
सहायक संचालक हैं। ऐसे में जेडी अनीता चौहान और डीईओ शांता स्वामी भार्गव को फिलहाल भी बड़ी जिम्मेदारी दी जा चुकी है, बाकी बचे हुए तीनों सहायक संचालकों में से किसी एक को बीईओ को अतिरिक्त प्रभार भी दिया जा सकता है, लेकिन ऐसा किया नहीं जा रहा।
अजीब तर्क आए सामने... लिखित में जवाब देने के साथ ही उन्हें यह भी बताना था कि वो क्यों बीईओ नहीं बनना चाहते तो उसमें भी बड़े अजीब तर्क सामने आए। प्राचार्यों ने किसी ने लिखा कि पत्नी को कैंसर है, किसी ने लिखा उन्हें कमर दर्द की समस्या है, किसी ने पारिवारिक कारण बताया, किसी ने बताया ज्यादा लंबी बैठक नहीं कर सकते, किसी ने लिखा कि पैर में रॉड डली हुई है।
सभी ने अलग अलग बहाने बनाए, लेकिन एक ने भी सहमति नहीं जताई। हालांकि डीईओ शांता स्वामी भार्गव ने प्राचार्यों को आश्वस्त करने की कोशिश भी की। उन्हीं प्राचार्यों से कहा कि बीईओ ऑफिस में भी स्कूल टाइम पर ही काम करना है, आप लोग स्कूल भी आते हो, रात में काम नहीं करना है। यहां काम करना नहीं है, कर्मचारियों से काम करवाना है। लेकिन इसके बाद भी कोई भी प्राचार्य नहीं माना।
जिम्मेदारों ने नहीं उठाया फोन... इस मामले पर चर्चा करने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. शांता स्वामी भार्गव, ज्वाइंट डायरेक्टर एजुकेशन अनिता चौहान और जिला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन तीनों ने ही फोन नहीं उठाया।
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