संतान-मोह या मृत्यु-पाश: 17वें संस्कार की अनदेखी कहीं बुझा न दे घर का चिराग
KHULASA FIRST
संवाददाता

राजकुमार जैन स्वतंत्र लेखक खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सड़क पर बिखरे कांच के टुकड़े, धातु का मलबा, मृत मानव शरीर और वहां पड़ा डिस्पोजल ग्लास जिस पर लिखा था ‘हैप्पी बर्थडे प्रखर’। यह दृश्य महज एक दुर्घटना स्थल का नहीं, बल्कि उन सपनों के अंत का है जो कुछ ही घंटे पहले एक जन्मदिन की पार्टी में खिलखिला रहे थे। अभी तो केक का स्वाद भी जुबां से नहीं उतरा था, बधाइयों का शोर थमा भी नहीं था कि काल ने ऐसा क्रूर अट्टहास किया कि सबकुछ शांत हो गया।
हाल ही में इंदौर के तेजाजी नगर बायपास पर हुई हृदयविदारक घटना, जिसमें तीन होनहार युवाओं की जान चली गई, ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। 100 किमी प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार, एयरबैग्स के खुलने के बावजूद जीवन का न बच पाना, और कार से मिली शराब की बोतलें ये सब एक भयावह कहानी बयां करते हैं।
यह लेख किसी की आलोचना के लिए नहीं, बल्कि एक विनम्र सामाजिक चेतावनी और अभिभावकों से करबद्ध प्रार्थना के रूप में लिखा गया है। सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी: चेतावनी या इल्जाम?
इंदौर की सड़कों पर मौत का जो तमाशा रोजाना हो रहा है, वह अब हादसा नहीं कहा जा सकता। यह एक निरंतर घट रही त्रासदी है, जिसके जिम्मेदार कोई और नहीं, हम स्वयं हैं। हादसों के बढ़ते आंकड़े किसी चेतावनी की तरह नहीं, बल्कि एक इल्जाम की तरह हमारे सामने खड़े हैं।
यातायात पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 2025 के पहले 10 महीनों में 1600 से अधिक सड़क हादसों में 122 मौतें हुई हैं। ये आंकड़े महज फाइलों में दर्ज संख्याएं नहीं हैं। ये उन घरों की कहानी हैं जहाँ अब किलकारियां नहीं गूँजतीं, उन माताओं की पथरायी आँखें हैं जो दरवाजे की ओर ताकती रह जाती हैं, और उन पिता की कहानी है जिनके बुढ़ापे की लाठी टूट चुकी है।
आज शहर में नियम तोड़ना एक ‹स्टेटस सिंबल› बन गया है। हेलमेट पहनना ‹बोझ› लगता है और लाल बत्ती पर रुकना ‘समय की बर्बादी’। समाज में एक विकृत मानसिकता घर कर गई है जहाँ नियम मानने वाले को डरपोकव नियम तोड़कर भागने वाले को स्मार्ट समझा जाता है। जब अनुशासन को कमजोरी और अंधाधुंध रफ्तार को शान समझा जाने लगे, तो समझ लीजिए कि समाज पतन की ओर अग्रसर है।
17वां संस्कार: यातायात नियम पालन (जीवन रक्षा संस्कार)
भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म दर्शन, गर्भाधान से लेकर अंत्येष्टि तक, 16 संस्कारों की एक सुव्यवस्थित परंपरा पर आधारित है। इन संस्कारों का उद्देश्य मनुष्य के जीवन को अनुशासित, मर्यादित और उद्देश्यपूर्ण बनाना है। किंतु, आज के मशीनी युग में, जहाँ हमारे बच्चे आधुनिक और शक्तिशाली इंजन से लैस तीव्रगामी वाहनों से खेल रहे हैं, वहां 16 संस्कार अधूरे सिद्ध हो रहे हैं।
गर्भाधान से लेकर विवाह तक के संस्कार तो हम बड़े धूम-धाम से करते हैं, लेकिन यदि सड़क सुरक्षा का संस्कार नहीं दिया गया, तो अंतिम संस्कार (अंत्येष्टि) की नौबत असमय ही आ जाती है। इसलिए, आज समय की मांग है कि यातायात नियम पालन को 17वां और अनिवार्य संस्कार माना जाए।
यह संस्कार डर से नहीं, चालान के भय से नहीं, बल्कि जीवन के प्रति सम्मान के भाव से आना चाहिए। जिस तरह हम बच्चे को बोलना, चलना और बड़ों का आदर करना सिखाते हैं, उसी तरह सड़क पर चलते समय हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट लगाना, और गति सीमा का पालन करना भी घुट्टी में पिलाना होगा।
अभिभावकों से यक्ष प्रश्न: क्या हम स्वयं अपनी संतानों की मौत का कारण बन रहे हैं? अखबार की सुर्खियाँ चीख-चीख कर पूछ रही हैं ये किस नशे में तेज रफ्तार पर सवार हो मेरे बच्चों? आज हर माता-पिता से कुछ कड़वे सवाल पूछने का समय आ गया है:-
आचरण बनाम उपदेश: आप अपने बच्चों को झूठ न बोलने और चोरी न करने का संस्कार देते हैं, लेकिन जब आप स्वयं लाल बत्ती तोड़ते हैं, बिना सीट बेल्ट के गाड़ी चलाते हैं, गलत दिशा में वाहन दौड़ाते हैं या नशे में वाहन चलाते हैं, तो बच्चा क्या सीखता है? याद रखिए, बच्चे आपके उपदेश नहीं सुनते, वे आपका आचरण देखते हैं। यदि आप सड़क पर अनुशासनहीन हैं, तो आप नैतिक रूप से अपने बच्चे को सुरक्षित ड्राइविंग का पाठ पढ़ाने के अधिकारी नहीं हैं।
लाइसेंस या डेथ वारंट? 18 साल का होते ही (या कई बार उससे पहले ही) हम बच्चों की जिद के आगे झुककर उन्हें तेज रफ्तार बाइक या कार थमा देते हैं। क्या आपने कभी यह सुनिश्चित किया कि घर बैठे लायसेंस बनवाने से पहले उन्हें विधिवत ड्राइविंग ट्रेनिंग› मिली है? क्या उन्हें पता है कि 100 की रफ्तार पर गाड़ी मात्र 3 सेकंड में मौत का सबब बन सकती है? बिना कठोर प्रशिक्षण और संस्कारों के हाथ में गाड़ी थमाना, बच्चे के हाथ में लोडेड बंदूक देने जैसा है।
संसाधन और निगरानी: संपन्नता बुरी नहीं है, लेकिन निगरानी विहीन संपन्नता घातक है। बच्चे देर रात कहाँ जा रहे हैं, किस हालत में लौट रहे हैं, और उनकी गाड़ी में क्या सामग्रियां (जैसे शराब की बोतलें) मिल रही हैं, यह देखना पुलिस का काम बाद में है, पहले माता-पिता का धर्म है।
मेरा बच्चा ऐसा नहीं कर सकता इस भ्रम से बाहर निकलिए। जब कोई दुर्घटना होती है, तो हमारी पहली प्रतिक्रिया सहानुभूति की होती है। हम होनहार हो गई, भाग्य का खेल कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं। लेकिन, सहानुभूति यदि सच्चाई से मुंह मोड़ ले, तो वह समाज के लिए घातक है।
हालिया इंदौर हादसे की रिपोर्टिंग हमें एक आईना दिखाती है। मीडिया रिपोर्ट्स में स्पष्ट आया कि कार की गति अत्यंत तेज थी, उसमें शराब की बोतलें मिलीं और सीट बेल्ट का उपयोग संभवतः नहीं हुआ था (क्योंकि शव बोनट तक आ गिरे थे)।
हमें स्वीकार करना होगा कि नशा+रफ्तार= मौत: विमान हादसों के बाद ब्लैक बॉक्स का विश्लेषण इसलिए नहीं किया जाता कि पायलट को दोषी ठहराया जाए, बल्कि इसलिए ताकि भविष्य की उड़ानें सुरक्षित हों। ठीक उसी तरह, सड़क हादसों के कारणों चाहे वह शराब हो, मोबाइल का उपयोग हो, या सीट बेल्ट का न होना- पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए।
यह मृतकों का अपमान नहीं, बल्कि जीवितों को बचाने का प्रयास है। यदि हम अपने बच्चों को यह सच नहीं बताएंगे कि देखो, एक छोटी सी गलती ने कैसे तीन घरों के चिराग बुझा दिए, तो वे कभी नहीं सीखेंगे।
संबंधित समाचार

स्कूल निरीक्षण पर बवाल:सीजेपी प्रवक्ता से मारपीट; अभिजीत दीपके का 48 घंटे का अल्टीमेटम

पिस्टल लेकर स्कूल पहुंचा छात्र:चेकिंग में हथियार मिला; युवक गिरफ्तार, पुलिस जांच में जुटी

पीएम के फ्लैट बने दुकान और तबेला:15 आवास सीलकर नगर निगम ने जब्त किया सामान

साधना का सफर थमा, स्मृतियां रह गईं:साध्वी निर्मलाजी को नम आंखों से दी अंतिम विदाई, 1994 में ली थी जैन भगवती दीक्षा

फैक्ट्री के लिए आर-पार की लड़ाई:पटवारी बोले- एक लाख किसान करेंगे आंदोलन; राहुल गांधी ने कहा- मैं भी आऊंगा

रील के चक्कर में ट्रैफिक से खिलवाड़:वाहनों के आगे जेब्रा क्रॉसिंग पर लेटी इंफ्लुएंसर; पुलिस करेगी कार्रवाई

मोड़ पर अनियंत्रित होकर खाई में लटकी बस:बड़ा हादसा टला; सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाला

पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल:82 निरीक्षकों के तबादले, तीन की नई पदस्थापना शहर में

छात्र संघ चुनाव को लेकर कांग्रेस की तैयारी तेज:भोपाल और इंदौर समेत अलग-अलग जिलों के लिए जिम्मेदारियां तय; प्रदेश कांग्रेस ने जारी किया आदेश

वीडियो देखिये, फर्श पर सिसक रही थीं दृष्टिहीन वृद्धा:जीआरपी ने थामा हाथ; आश्रम में मिला नया घर

जमीन दिखाई कुछ, निकली कुछ और:कोर्ट ने 31 लाख लौटाने का दिया आदेश; ब्याज भी लगेगा

फर्जी ट्रांजिट पास से लकड़ी का खेल:टिम्बर मार्केट में राज्य स्तरीय उड़न दस्ते की दबिश; दो वाहन जब्त

‘मुख्यमंत्री से ले लेना…’:ऑडियो वायरल; छात्र से विवाद के बाद प्राचार्य का तबादला

साफ पानी की शिकायत दबाना पड़ा भारी:सब इंजीनियर सस्पेंड, इंजीनियर बर्खास्त, विभागीय जांच शुरू

नाना पटवारी के मोबाइल से मिली सट्टेबाजों की आईडी:ऑनलाइन सट्टा केस में तीन गिरफ्तार; आरोपी दो दिन की पुलिस रिमांड पर

पटवारी के बयान से गरमाई सियासत:सिंधिया पर इशारों में निशाना; सरकार को भी घेरा

स्कूलों में बिजली-पानी तक नहीं:हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब; चार सप्ताह की दी मोहलत

आयशर ने बाइक सवार को रौंदा:पीछे से मारी टक्कर; पहिया ऊपर से गुजरने से मौत

CFL बदलते समय हादसा:करंट लगने से व्यक्ति की मौत; पत्नी ने बेसुध हालत में देखा

गांजा तस्करी की सप्लाई चैन का खुलासा:मुख्य आरोपी समेत तीन गिरफ्तार; ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत कार्रवाई
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!