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आधी रात को ‘वर्दी’ बनी भगवान: बस स्टैंड पर बिलखती मां; गोद में मासूम बच्चे को छोड़कर भागा पति

KHULASA FIRST

संवाददाता

05 मार्च 2026, 1:51 pm
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आधी रात को ‘वर्दी’ बनी भगवान

छोटी ग्वालटोली थाने के दो आरक्षकों ने हिम्मत देकर सुरक्षित घर भिजवाया

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पुलिस पर हमेशा ही उलटे सीधे आरोप लगते रहते हैं, लेकिन कल रात जो हुआ उससे दो माह के बच्चे को गोद में लिए बिलखती एक मां के लिए वर्दी भगवान बन गई। मामूली बात पर हुए झगड़े के बाद पति, मां-बेटे को छोड़कर भाग गया। ऐसे में देर रात छोटी ग्वालटोली थाने के दो आरक्षकों ने महिला को ढाढ़स बंधाई और इंदौर से सकुशल घर के लिए रवाना कर दिया।

जाते समय महिला ने मुक्तकंठ से इंदौर पुलिस की प्रशंसा की। जानकारी के अनुसार विगत रात करीब 12.30 बजे सरवटे बस स्टैंड क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान छोटी ग्वालटोली के आरक्षक राजेंद्र जामलिया और आरक्षक दीपक भदौरिया को एक महिला के बारे में बताया। महिला उदास, घबराई और अकेली थी। वहीं, तीन-चार बड़े-बड़े बैग लिए बैठी महिला की गोद में दो माह का दूधमुंहा था।

पुलिसकर्मियों के पूछने पर महिला ने अपना नाम मृणाली पति संदीप माथे निवासी ग्राम दुपाड़ी, पूणे बताया। बताया कि वह पति के साथ बेटे के मुंडन और महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन आई थी। वहां से लौटते वक्त इंदौर पहुंचे और ट्रेन से जाने वाले थे। भूख लगने पर सरवटे बस स्टैंड की एक होटल पर खाना खाने पहुंचे।

इससे पहले पति ने शराब पी ली थी। खाने के दौरान पति वेटर से किसी बात को लेकर गुस्सा हो गया। वह उसे उल्टा सीधा करने लगा, जब उसने पति को ऐसा करने से टोका तो पति उस पर ही भड़क गया। कहासुनी हुई और गुस्से में पति उसे व बच्चे को चार बैग सहित वहीं छोड़कर चला गया।

हालात समझते ही दोनों पुलिसकर्मियों ने पहले महिला को ढांढस बंधाया। भरोसा दिलाया कि वह अकेली नहीं है। इसके बाद शुरू हुआ मदद का सिलसिला। टीआई संजू कांबले के संज्ञान में पूरा मामला लाने के बाद आरक्षक उसे रेलवे स्टेशन ले गए। पता चला कि ट्रेन निकल चुकी थी।

अगली ट्रेन सुबह करीब 7 बजे खंडवा से मिलेगी। दोनों रात की चिंता और मासूम की हालत को देखते हुए महिला को सरवटे बस स्टैंड ले गए। वहां से खंडवा जाने वाली बस में सुरक्षित बैठाया। इस दौरान बस के कंडक्टर, ड्राइवर और खंडवा जाने वाली अन्य सवारियों को पूरी स्थिति समझाकर महिला की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी। यात्रियों को अपने, थाना का मोबाइल नंबर दे दिया। महिला के भाई से बात होने के बाद उसका भी नंबर ले लिया, ताकि आगे की यात्रा में महिला को कोई परेशानी न हो।

इंदौर पुलिस बहुत अच्छी है...
बस में बैठते समय महिला की आंखें नम थीं। उसने दोनों पुलिसकर्मियों से कहा कि इंदौर पुलिस बहुत अच्छी है, बिना सोचे-समझे मदद के लिए आगे आती है। इन शब्दों ने एक बात तो साबित कर दी कि आधी रात में जब एक मां खुद को बेसहारा समझ रही थी, तब वर्दी ने सिर्फ कानून नहीं, भरोसा भी निभाया।

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