पुरातत्वविद् डॉ. विष्णु वाकणकर ने पुरातत्व को बनाया जन आंदोलन: उज्जैन में 14 जनवरी से प्रारंभ होगा महाकाल महोत्सव
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सुप्रसिद्ध पुरातत्वविद् डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर का भारतीय पुरातत्व के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान रहा है। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर ने पुरातत्व को जन आंदोलन बना दिया था।
यह उनके व्यक्तित्व और संप्रेषण का ही प्रभाव था कि उज्जैन का जन-जन अपने परिवेश को पुरातत्व की दृष्टि से देखने लगा था। पुरातत्व को लोक रुचि का विषय बनाने का डॉ. वाकणकर का प्रयास अद्भुत और अनुकरणीय था।
पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर अनेक प्रतिभाओं के धनी थे। उन्होंने सितार वादन, मूर्ति कला, चित्रकला, काव्य लेखन एवं संगीत के माध्यम से भारतीय संस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाया। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर के परिश्रम और प्रयासों से काल गणना के केंद्र डोंगला की खोज हुई।
उन्होंने बताया कि पृथ्वी की दीर्घकालीन घूर्णन धुरी में परिवर्तन के कारण उज्जैन में होने वाला शून्य देशांतर-रेखा और कर्क रेखा का मिलन उत्तर की ओर खिसक कर डोंगला में हुआ।
पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर ने उज्जैन क्षेत्र में गहन सर्वेक्षण किया था। शंकु की सहायता से उन्होंने कर्क रेखा की नई स्थिति का पता लगाया। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर ने शिलाओं और गुफाओं में छिपे प्रमाणों के माध्यम से भारतीय सभ्यता की उस कहानी को दुनिया के सामने रखा, जो लिखित इतिहास से भी पहले की है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में 19वें डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान समारोह और राष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारंभ अवसर पर यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पद्मश्री से सम्मानित डॉ. प्रो. यशोधर मठपाल को शॉल-श्रीफल और भू वराह की प्रतिकृति तथा 2 लाख रुपये का चैक भेंट कर 19वें डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान वर्ष 2022-2023 से सम्मानित किया।
समारोह में अंतरराष्ट्रीय सितार वादक सुश्री स्मिता नागदेव एवं कवि लेखक राहुल शर्मा ने सितार और कविता की जुगलबंदी से डॉ. वाकणकर द्वारा रचित कविता “इतिहास के पटल पर” का राग बैरागी भैरव में गायन प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया तथा डॉ. वाकणकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार उज्जैन में 14 जनवरी से महाकाल महोत्सव की शुरुआत करने जा रही है। राज्य सरकार उज्जैन में पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर की स्मृतियों और उनके द्वारा एकत्रित पुरातत्व ऐतिहासिक महत्व की वस्तुओं का संरक्षण करते हुए संग्रहालय को भी वर्तमान तकनीकी व्यवस्थाओं से लैस कर रही है।
दुर्लभ अभिलेख और छाया चित्रों की प्रदर्शनी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने “20वीं सदी में मध्यप्रदेश में स्वाधीनता आंदोलन 1920-1947, दुर्लभ अभिलेख और छाया चित्रों की प्रदर्शनी” पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदर्शनी का शुभारंभ कर अवलोकन किया तथा एक स्टॉल पर कुम्हार के चाक पर स्वयं शिवलिंग की प्रतिकृति का निर्माण कर भारतीय संस्कृति, कला एवं शिल्प परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त किया। संचालनालय पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय का तीन दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन 11 जनवरी तक चलेगा।
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