उत्तराखंड में बह रही भक्ति की अविरल धारा: चारधाम यात्रा में 104 श्रद्धालु गंवा चुके हैं जान
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, देहरादून।
उत्तराखंड चारधाम की यात्रा पूरे शबाब पर चल रही है। वर्तमान में अब तक करीब 24 लाख श्रद्धालु चारधाम के दर्शन कर चुके हैं। यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, उसी रफ्तार से यात्रा मार्गों पर हो रहे श्रद्धालुओं के मौतों का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है।
चारधाम यात्रा मार्गों पर लगातार बढ़ रहे श्रद्धालुओं के मौतों के आंकड़े ने राज्य सरकार की चिंता को और ज्यादा बढ़ा दिया है। जहां एक ओर स्वास्थ्य विभाग अपनी व्यवस्थाओं को बेहतर बताते हुए श्रद्धालुओं को सावधानियां बरतने की बात कह रहा है, तो वहीं बीकेटीसी इसे प्राकृतिक घटना बता रही है।
उत्तराखंड चारधाम यात्रा 2026 का आगाज 19 अप्रैल को गंगोत्री-यमुनोत्री धाम की कपाट खोलने के साथ हो गया था। यात्रा शुरू होने के बाद 27 मई तक 104 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है, तो वहीं अकेले 26 मई को 7 श्रद्धालुओं की हृदय गति रुकने से मौत हुई है।
उत्तराखंड राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक, केदारनाथ यात्रा मार्ग पर सबसे ज्यादा 49 श्रद्धालुओं, बदरीनाथ धाम में 30 श्रद्धालुओं, यमुनोत्री धाम में 15 श्रद्धालुओं और गंगोत्री धाम में 10 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। उत्तराखंड चारधाम यात्रा में बढ़ती तीर्थयात्रियों की संख्या के साथ ही श्रद्धालुओं के मौतों का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है।
यमुनोत्री यात्रा में एक और श्रद्धालु की मौत: यमुनोत्री धाम के दर्शन कर लौट रहे एक श्रद्धालु की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि झारखंड निवासी संजय कुमार गुप्ता (उम्र 44 वर्ष) यमुनोत्री धाम के दर्शन कर वापस लौट रहे थे।
यात्रा मार्ग में उनकी अचानक तबीयत बिगड़ गई और वो अचेत हो गए। इसके बाद परिजन और साथ आए रिश्तेदारों ने तत्काल उन्हें उपचार के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जानकीचट्टी पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जानकीचट्टी के चिकित्साधिकारी डॉ. अखिल राणा ने बताया कि श्रद्धालु की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो चुकी थी। मामले की सूचना पुलिस को दे दी गई है और अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।
बताया जा रहा है कि चारधाम यात्रा के दौरान लगातार बढ़ रही भीड़, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी, थकान और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते कई श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ रही है। यात्रियों को स्वास्थ्य जांच कराने, पर्याप्त आराम करने और यात्रा के दौरान सावधानी बरतने की अपील लगातार की जा रही है।
चारधाम यात्रा मार्ग पर 47 चिकित्सा इकाइयां काम कर रहीं... उत्तराखंड चारधाम यात्रा में लगातार बढ़ रहे श्रद्धालुओं के मौतों के आंकड़ों के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि इस साल चारधाम यात्रा में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बेहतर की गई हैं। चारधाम यात्रा मार्ग पर 47 चिकित्सा इकाइयां काम कर रही हैं।
इसके अलावा हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, हाइपरटेंशन और शुगर से होने वाली मौत से निपटने के लिए 180 डॉक्टरों को श्रीनगर मेडिकल कॉलेज और दून मेडिकल कॉलेज में तीन चरणों में ट्रेनिंग दिलवाई गई है। उन्होंने आगे कहा कि इसके अलावा बद्रीनाथ धाम में 50 बेड और केदारनाथ धाम में 17 बेड का अस्पताल भी शुरू करने जा रहे हैं।
चारधाम में बड़ी संख्या में विशेषज्ञ डॉक्टर की भी तैनाती की गई है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती के लिए 15 दिन का रोस्टर बनाया गया है, जिसके आधार पर डॉक्टरों को भेजा जा रहा है।
इसके अलावा चारधाम यात्रा मार्गों पर जो एक्सीडेंटल जोन है, वहां पर ट्रॉमा सेंटर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन चारधाम की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जो हेल्थ एडवाइजरी जारी की गई थी, वो काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है।
एडवाइजरी में इस बात का जिक्र किया गया है कि जो हाईपरटेंशन के मरीज हैं, शुगर के मरीज हैं, हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं, उन लोगों को यात्रा शुरू करने से पहले हेल्थ चेकअप कराना चाहिए। इसके लिए जगह-जगह पर हेल्थ कैंप लगे हुए हैं।
ऐसे में जरूरत है कि जो श्रद्धालु इन बीमारियों से ग्रसित हैं, वो हेल्थ चेकअप कराने के बाद ही अपनी यात्रा शुरू करें, लेकिन लोग राज्य सरकार की ओर से जारी हेल्थ एडवाइजरी को नजरअंदाज करते हैं। जब श्रद्धालु पैदल चलते हुए थक जाता है, तो वो बहादुरी दिखाते हुए आराम करने की बजाय आगे बढ़ जाता है, जो श्रद्धालुओं के मौतों का एक बड़ा कारण है। - सुबोध उनियाल, स्वास्थ्य मंत्री, उत्तराखंड
एचारधाम यात्रा मार्ग पर राज्य सरकार की ओर से की गई स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर है। ऐसे में यात्रा मार्गों पर जिन श्रद्धालुओं की मौत हुई है, वो प्राकृतिक घटनाएं हैं, लेकिन प्रबंधन की ओर से व्यवस्थाओं को बेहतर करने में कोई ढिलाई नहीं बरती गई है।
चारधाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ऐसे में चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु सरकार की ओर से जारी दिशा निर्देशों का कड़ाई से पालन करें। हालांकि, दर्शन के लिए वहां पर वेटिंग भी लग रही है, लेकिन सभी श्रद्धालु दर्शन करे इसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है। - हेमंत द्विवेदी, अध्यक्ष, बीकेटीसी
कंधों पर चढ़कर बनाई जा रही रील बीकेटीसी-प्रशासन पर उठ रहे सवाल
केदारनाथ धाम, जहां हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों को पार कर अपने आराध्य बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वही पवित्र धाम अब सोशल मीडिया रीलबाजी और वायरल कंटेंट की होड़ के कारण चर्चा का केंद्र बनता जा रहा है।
धाम से आई कुछ वायरल तस्वीरों और वीडियो ने ना केवल धार्मिक भावनाओं को आहत किया है, बल्कि मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं और अनुशासन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कुछ युवक मंदिर परिसर के आसपास अपने साथियों के कंधों पर चढ़कर रील बनाते नजर आ रहे हैं।
कोई फिल्मी स्टाइल में वीडियो शूट कर रहा है, तो कोई बाबा केदार के धाम को सोशल मीडिया कंटेंट का बैकग्राउंड बनाकर लाइक्स और फॉलोअर्स की दौड़ में शामिल दिखाई दे रहा है।
धार्मिक आस्था और सनातन परंपराओं के प्रतीक माने जाने वाले केदारनाथ धाम में इस प्रकार की गतिविधियों ने श्रद्धालुओं में भारी नाराजगी पैदा कर दी है।
लोगों का कहना है कि बाबा केदार का धाम कोई मनोरंजन स्थल, शूटिंग लोकेशन या सोशल मीडिया स्टूडियो नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है।
यहां इस प्रकार की हरकतें धाम की गरिमा और धार्मिक मर्यादाओं के खिलाफ हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर मंदिर परिसर में अनुशासन बनाए रखने और धार्मिक मर्यादाओं का पालन कराने के लिए बनाए गए नियम-कानून कहां गायब हो गए?
जब यात्रा शुरू होने से पहले बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) की ओर से रील, डांस वीडियो और अशोभनीय गतिविधियों पर रोक लगाने के दावे किए जाते हैं, तो फिर इस प्रकार की घटनाएं खुलेआम कैसे हो रही हैं?
श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर परिसर में हर समय पुलिस, सुरक्षा बलों और सीसीटीवी निगरानी की बात कही जाती है, लेकिन वायरल हो रहे वीडियो यह बताने के लिए काफी हैं कि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं कितनी प्रभावी हैं।
मामले को लेकर स्थानीय तीर्थ पुरोहितों और धार्मिक संगठनों में भी भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। तीर्थ पुरोहित संतोष त्रिवेदी, हिमांशु तिवारी एवं गौरव तिवारी ने कहा कि बाबा केदार धाम का मजाक बनाकर रख दिया गया है।
उन्होंने कहा कि जिस धाम में लोग श्रद्धा और भक्ति लेकर पहुंचते हैं, वहां कंधों पर चढ़कर रील बनाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने मांग की कि ऐसे मामलों में बीकेटीसी और प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति धार्मिक मर्यादाओं के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके।
वहीं इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बीकेटीसी सदस्य विनीत पोस्ती ने कहा कि इस समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए धाम पहुंच रहे हैं और समिति लगातार श्रद्धालुओं को सुगम एवं व्यवस्थित दर्शन कराने में जुटी हुई है।
उन्होंने कहा कि भीड़ के बीच कुछ लोग कंधों पर चढ़कर रील बना रहे हैं, जो उचित नहीं है। ऐसे मामलों में आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
गौरतलब है कि पहले ही केदारनाथ यात्रा में भारी भीड़, वीआईपी संस्कृति, ट्रैफिक जाम, महंगाई और अव्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में अब धाम में वायरल हो रही रीलबाजी ने प्रशासन और बीकेटीसी की कार्यप्रणाली पर एक और बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
साधना के बाद गुफा से बाहर आए पंडित धीरेंद्र शास्त्री
बाबा बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के 21 दिन की साधना के बाद गुफा से बाहर निकले। गुफा से बाहर निकलने के बाद उन्होंने साधना के दौरान के अपने दिव्य अनुभवों को बारे में बताया। हालांकि उन्होंने कहा कि वह अपने अनुभवों को लोगों के साथ कथा के दौरान बांटेंगे।
कल से सत्यनारायण कथा का शुभारंभ बदरीनाथ धाम में हो गया है। कथा में शामिल होने के लिए बाबा के भक्त बदरीनाथ धाम में पहुच रहे है। इसके साथ ही कथा स्थल में श्रद्धालु पहुंचकर बाबा की कथा का श्रवण कर रहे हैं।
उन्होंने पहले दिन बदरीनाथ की महिमा के बारे में बताया। कथा सुनने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंच गए हैं। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि साधना का फल राष्ट्र के लिए समर्पित है। यह देश और सनातन के काम आए यही हमारी कामना है।
21 दिन की साधना में कई तरह के अनुभव हुए हैं। उन्होंने कहा कि नर-नारायण पर्वत की परिक्रमा के दौरान वह मौत के मुंह से बचकर आ गए। यह सारे अनुभव भक्तों को सुनाएंगे। धीरेंद्र शास्त्री ने बदरीनाथ धाम में 21 दिन की साधना की।
साधना संपन्न होने के बाद उन्होंने कहा कि उन्होंने 13 घंटे पैदल चलकर नीलकंठ पर्वत के किनारे से नारायण पर्वत की परिक्रमा की। खड़ी चढ़ाई कठिन मार्ग पर चलते हुए वे मौत के मुंह से निकलकर आए हैं। प्रशासन के सहयोग से देवताल भी गए।
भीषण गर्मी से मिलेगी राहत, कल से चार दिन तक बारिश का हुआ अलर्ट
प्रदेश में पड़ रही झुलसाने वाली गर्मी से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), देहरादून द्वारा जारी किए गए पूर्वानुमान के अनुसार, आगामी दिनों में राज्य के विभिन्न जनपदों में बारिश, गर्जन, आकाशीय बिजली चमकने, ओलावृष्टि और तेज झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना है।
28 मई को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जनपदों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में कहीं-कहीं गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने, ओलावृष्टि और 40-50 किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़कर 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक की गति से तेज हवाएं चलने की आशंका है।
संबंधित समाचार

पुलिस की बड़ी कार्रवाई:गांजे के साथ तस्कर गिरफ्तार; बिना नंबर की बाइक से कर रहा था सप्लाई

जल संकट के बीच पानी की बर्बादी:सड़क पर बहता रहा हजारों लीटर; लोगों में नाराजगी, निगम पर लापरवाही के आरोप

बियाबानी टू छावनी मनमानी:बिना मुआवजे के इंदौर जैसी तोड़फोड़ देश में और कहीं देखी-सुनी

केदारनाथ यात्रा व्यवस्था पर उठे सवाल:8-10 घंटे तक दर्शन का इंतजार; रातभर ट्रेकिंग से बढ़ रही चिंता, क्षमता के अनुसार ही श्रद्धालुओं को अनुमति देनी चाहिए
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!