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निगम अफसरों की मिलीभगत से खड़ा हुआ अवैध साम्राज्य: इलाज में लापरवाही और कमीशनखोरी के आरोपों के बीच प्रमिला हॉस्पिटल से जुड़े अवैध निर्माण पर बड़ा खुलासा

KHULASA FIRST

संवाददाता

30 अप्रैल 2026, 7:02 pm
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निगम अफसरों की मिलीभगत से खड़ा हुआ अवैध साम्राज्य

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
द्रविड़ नगर जोन स्थित प्रमिला हॉस्पिटल एंड आईवीएफ सेंटर एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गया है। अस्पताल संचालक डॉ. भरत जैन और डॉ. मून जैन दंपति पर पहले महापौर के रिश्तेदार के इलाज में लापरवाही और कमीशनखोरी के आरोप का खुलासा हुआ, वहीं अब भ्रष्ट कमाई के दम पर नियमों को ताक में रख अवैध व्यावसायिक भवन खड़ा करने के आरोप भी तेज हो गए हैं।

आरोप है कि हॉस्पिटल के ठीक पीछे स्थित प्लॉट पर आवासीय अनुमति लेकर व्यावसायिक उपयोग के लिए चार मंजिला भवन तान दिया गया, जबकि निर्माण की शुरुआत से ही यह परियोजना विवादों में रही।

नक्शा आवासीय, निर्माण व्यावसायिक
द्रविड़ नगर जोन-15, वार्ड-83 गुमास्ता नगर स्थित प्लॉट नंबर-16 पर शंकरलाल पिता पन्नालाल गुप्ता के नाम से आवासीय नक्शा स्वीकृत कराया गया था। यह अनुमति 31 मार्च 2023 को निगम अधिकारी परसराम आरोलिया द्वारा जारी की गई थी। आरोप है कि स्वीकृत नक्शे की आड़ में व्यावसायिक उपयोग के लिए विशाल भवन निर्माण कर लिया गया और निगम के जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे रहे।

कार्रवाई के निर्देश मिले हैं: भवन अधिकारी
जोन-15 के भवन अधिकारी वैभव देवलासे ने स्वीकार किया कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रमिला हॉस्पिटल से जुड़े निर्माण पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण पाए जाने पर बीआई अनुभूति मंडवे को नोटिस जारी करने और अतिक्रमण कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

70 लोगों की जान जोखिम में डाल खोदी गई थी नींव
इस विवादित निर्माण की नींव खुदाई के दौरान पास स्थित गोविंद विहार बिल्डिंग के करीब 14 परिवारों की जान खतरे में पड़ गई थी। स्थानीय रहवासियों के अनुसार बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों सहित लगभग 70 लोगों की सुरक्षा दांव पर लगाकर निर्माण कार्य किया गया। उस समय भवन की खुदाई से समीपस्थ संरचनाओं की नींव प्रभावित होने का खुलासा हुआ था।

सवालों के घेरे में निगम की कार्यप्रणाली
पूरा मामला निगम की कार्यप्रणाली और भ्रष्ट तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जब शुरुआती स्तर पर ही निर्माण को लेकर शिकायतें, सुरक्षा खतरे और नियम उल्लंघन का खुलासा किया गया था, तब आखिर किसके संरक्षण में यह चार मंजिला निर्माण पूरा होने दिया गया? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो न केवल नियमों की धज्जियां उड़ने से रोकी जा सकती थीं, बल्कि लोगों की जान को खतरे में डालने वाली स्थिति भी पैदा नहीं होती।

फरवरी 2025 में खुलासा, फिर भी नहीं रुका निर्माण
मामले का खुलासा फरवरी 2025 में किया गया था। तब तत्कालीन भवन अधिकारी सुनीलसिंह जादौन ने निर्माण रुकवाने की बात कही थी व दावा किया था कि बिल्डिंग की नींव सुधारने का कार्य कराया जा रहा है तथा भवन मालिक से वैध अनुमतियां मांगी गई हैं।

यह भी खुलासा हुआ था कि अनुमति केवल आवासीय निर्माण की थी और स्वीकृति के विपरीत निर्माण पाए जाने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। अब तस्वीर बिलकुल उलट दिखाई दे रही है।

आरोप है कि निगम अधिकारियों की मिलीभगत से न केवल निर्माण पूरा हो रहा, बल्कि अब इस अवैध भवन का उपयोग हॉस्पिटल विस्तार के लिए किए जाने की तैयारी भी चल रही है।

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