निगम अधिकारियों की शह पर खड़ा हुआ अवैध निर्माण का साम्राज्य: नक्शे के विपरीत बना दी गई दो बड़ी इमारतें
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
एयरपोर्ट रोड स्थित गुरु कृपा कॉलोनी में नगर निगम जोन क्रमांक 16 के अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध निर्माण का बड़ा खेल सामने आया है। गुरु कृपा पेट्रोल पंप के पीछे कसेरा बंधुओं द्वारा किए जा रहे निर्माण ने स्थानीय निवासियों के लिए गंभीर संकट पैदा कर दिया है।
यहां नगर निगम के तमाम सुरक्षा और निर्माण संबंधी नियमों को ताक पर रखकर दो विशाल बिल्डिंगें खड़ी कर दी गई हैं। ये इमारतें न केवल स्वीकृत नक्शे के विपरीत हैं, बल्कि सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग का भी बड़ा उदाहरण बन गई हैं।
कॉलोनी के रहवासियों का आरोप है कि निर्माणकर्ता कसेरा बंधुओं ने पिछले कई महीनों से सार्वजनिक मार्ग को अपना गोदाम बना रखा है। सड़क पर निर्माण सामग्री के अवैध जमावड़े के कारण आम नागरिकों का निकलना दूभर हो गया है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस क्षेत्र में पहले से ही पेयजल की भारी किल्लत है, वहां इन अवैध इमारतों के निर्माण में पानी का बेतहाशा दोहन किया जा रहा है।
रहवासियों ने इस संबंध में जोन के भवन अधिकारी को कई बार मौके पर जाकर और फोन के माध्यम से मौखिक शिकायतें की हैं, लेकिन इसके बावजूद निगम अधिकारी लगातार मामले से अनभिज्ञता जता रहे हैं।
हर बार शिकायत पर केवल 'जांच करवाने' का कोरा आश्वासन दिया जाता है, जबकि हकीकत यह है कि अधिकारी आज तक एक बार भी मौके पर मुआयना करने नहीं पहुंचे हैं।
क्षेत्रीय निवासियों का स्पष्ट आरोप है कि बिना निगम अधिकारियों की साठगांठ के इतनी बड़ी अवैध बिल्डिंगें रातों-रात बनकर तैयार नहीं हो सकतीं। निर्माण कार्य के शुरुआती दौर से ही शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन जिम्मेदारों ने आंखों पर पट्टी बांधे रखी और अब निर्माण कार्य अंतिम चरण में है।
नक्शे के विपरीत किए गए इस निर्माण ने न केवल क्षेत्र की व्यवस्था बिगाड़ दी है, बल्कि भविष्य में यहां रहने वाले लोगों और आसपास के निवासियों के लिए सुरक्षा का बड़ा खतरा भी पैदा कर दिया है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या नगर निगम के नियम केवल आम आदमी के लिए हैं? रसूखदारों के आगे बेबस दिख रहा निगम अमला अपनी कार्यप्रणाली पर खुद ही सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोग अब इस मामले में जिला प्रशासन और वरिष्ठ निगम अधिकारियों से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
यदि तत्काल प्रभाव से इन अवैध निर्माणों को चिन्हित कर ध्वस्त नहीं किया गया, तो यह न केवल निगम के भ्रष्टाचार की पुष्टि करेगा, बल्कि शहर में अवैध निर्माण को बढ़ावा देने वालों के हौसले भी बुलंद करेगा। देखना यह है कि प्रशासन कब तक आंखें मूंदे रहता है और कब इन इमारतों पर कानून का शिकंजा कसता है।
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