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प्रमिला हॉस्पिटल एंड आईवीएफ सेंटर पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप: स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का आरोप

KHULASA FIRST

संवाददाता

29 अप्रैल 2026, 7:06 pm
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प्रमिला हॉस्पिटल एंड आईवीएफ सेंटर पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप

कार्रवाई का दबाव, लिखित शिकायत नहीं: सीएमएचओ

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के प्रमिला हॉस्पिटल एंड आईवीएफ सेंटर पर केंद्र और राज्य स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के खुले उल्लंघन के आरोप लगे हैं। अस्पताल प्रबंधन पर मरीजों के इलाज में लापरवाही, अवैध निर्माण, दवाइयों में कमीशनखोरी और प्रशासनिक नियमों की अनदेखी जैसे गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। मामले में नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई जा रही है।

अवैध निर्माण और पार्किंग उपयोग पर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार किसी भी अस्पताल के संचालन के लिए सीएमएचओ कार्यालय से अनुमति जारी की जाती है, जिसमें बेड क्षमता, ऑपरेशन थिएटर, प्रशिक्षित स्टाफ और वैध भवन संबंधी दस्तावेज अनिवार्य होते हैं। आरोप है कि डॉ. भरत जैन और डॉ. मून जैन दंपति द्वारा इन मानकों की अनदेखी की जा रही है।

अस्पताल भवन को लेकर यह भी आरोप लगाए गए हैं कि नगर निगम से स्वीकृत नक्शा, संपत्ति कर रसीद और कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र जैसे दस्तावेजों के बावजूद भवन में कई अवैध निर्माण किए गए हैं। पार्किंग की जगह का उपयोग अन्य गतिविधियों में किए जाने से नगर निगम की तलघर और पार्किंग में अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं।

महापौर परिवार ने भी लगाए गंभीर आरोप
मामला उस समय और चर्चा में आ गया, जब शहर के प्रथम नागरिक यानी महापौर के परिवार ने भी अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। जानकारी के अनुसार महापौर की मौसी 80 वर्षीय नंदकुंवर शर्मा को इलाज के लिए प्रमिला हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था।

परिजन का आरोप है कि इस दौरान लिया गया यूरिन सैंपल लैब तक पहुंचा ही नहीं, बावजूद इसके मरीज का यूटीआई संक्रमण का उपचार नहीं किया गया। केवल सोडियम का इलाज कर दो दिन में छुट्टी दे दी गई। बाद में हालत बिगड़ने पर दोबारा भर्ती करना पड़ा, तब संक्रमण की पुष्टि हुई। आरोप है कि मरीज करीब 20 दिनों तक परेशानी झेलती रही।

औपचारिक आवेदन प्राप्त नहीं हुआ
सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने बताया कि पीड़ित परिवार को लिखित शिकायत देने के लिए कहा गया था, लेकिन अब तक कोई औपचारिक आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि कभी कार्रवाई करने और कभी कार्रवाई नहीं करने का दबाव बनाया जा रहा है। डॉ. हसानी ने कहा कि अस्पताल संचालन के लिए बेड क्षमता से लेकर ऑपरेशन थिएटर निर्माण तक सभी मानक तय हैं और उनका पालन करना अनिवार्य है। नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जाएगी।

‘अवैध निर्माण देखना नगर निगम का कार्य’
अस्पताल भवन के अवैध निर्माण संबंधी सवाल पर सीएमएचओ ने कहा कि यह नगर निगम का विषय है। स्वास्थ्य विभाग को निगम से स्वीकृत नक्शा, टैक्स रसीद और पूर्णता प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज प्रस्तुत किए जाते हैं, जिनके आधार पर अस्पताल संचालन की अनुमति दी जाती है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रमिला हॉस्पिटल को 50 बेड की अनुमति प्राप्त है और सामने आए आरोपों तथा अनियमितताओं की जांच कराई जाएगी। पूर्व में यदि कोई शिकायत दर्ज हुई होगी तो उसकी भी जानकारी निकाली जाएगी।

जेनेरिक दवाइयों को महंगे दामों पर बेचने का आरोप- परिजन ने अस्पताल प्रबंधन पर जेनेरिक दवाइयों को ऊंचे दामों पर बेचने और मरीजों से आर्थिक शोषण करने के आरोप भी लगाए। घटना के बाद अस्पताल में घंटों हंगामा होने की बात सामने आई। बताया गया कि मेडिकल संचालक और अस्पताल प्रबंधन के बीच सांठगांठ कर मरीजों से अधिक राशि वसूली जा रही है।

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