समाज से एक परिवार के निष्कासन का आरोप: इन बातों पर लगाई रोक; जानिये अपनी शिकायत किससे की, किस बात की दी चेतावनी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, उज्जैन।
जिले की बड़नगर तहसील के ग्राम बंगरेड में यादव (अहीर) समाज के एक परिवार को कथित रूप से समाज से निष्कासित करने का मामला सामने आया है। पीड़ित नरेंद्र यादव ने मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई और आरोप लगाया कि समाज के पंचों द्वारा उन्हें और उनके परिवार को सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है। युवक ने चेतावनी दी कि यदि न्याय नहीं मिला तो वह परिवार सहित धर्म परिवर्तन करने को मजबूर होगा।
नरेंद्र यादव के अनुसार विवाद की शुरुआत डॉक्टर विष्णु प्रसाद यादव के यहां आयोजित एक विवाह समारोह से हुई। समारोह में समाज की ओर से तय 5100 की बजाय 11 हजार चंदे और धर्मशाला किराए को लेकर समाज के वाट्सएप ग्रुप में चर्चा चल रही थी। इसी दौरान नरेंद्र ने ग्रुप में टिप्पणी करते हुए सुझाव दिया कि यदि किसी से गलती हुई है तो उसे स्वीकार कर राशि वापस कर देना चाहिए।
आरोप है कि इस टिप्पणी के बाद समाज के एक पंच के भाई ईश्वरलाल यादव ने उन्हें वाट्सएप कॉल कर अपशब्द कहे और समाज छोड़ने तक की धमकी दी। नरेंद्र का कहना है कि उन्होंने इस व्यवहार की जानकारी ग्रुप में साझा की, लेकिन किसी ने विरोध नहीं किया। इसके बाद अन्य पदाधिकारियों द्वारा भी फोन पर गाली-गलौज और धमकियां देने का आरोप लगाया गया है।
पीड़ित के मुताबिक, बिना उनका पक्ष सुने और बिना निष्पक्ष बैठक किए समाज के वाट्सएप ग्रुप में उनके परिवार को निष्कासित करने का संदेश जारी कर दिया गया। साथ ही गांव में होने वाले सामाजिक कार्यक्रमों और गतिविधियों में उनके परिवार के शामिल होने पर भी रोक लगा दी गई।
नरेंद्र यादव ने यह भी आरोप लगाया कि समाज की धर्मशाला के किराए और चंदे में कथित वित्तीय अनियमितताओं का विरोध करने के कारण कुछ प्रभावशाली लोग उनसे नाराज हो गए थे। उन्होंने बताया कि मामले की शिकायत पहले एसपी कार्यालय में भी की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बाद में समाज की बैठक हुई, लेकिन उसमें उन्हें बुलाया तक नहीं गया और केवल चंदे की राशि वापस कर मामले को खत्म मान लिया गया।
लगातार सामाजिक बहिष्कार और मानसिक दबाव से परेशान नरेंद्र यादव ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यदि उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान वापस नहीं मिला और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे न्यायालय का सहारा लेने के साथ परिवार सहित धर्म परिवर्तन पर विचार करेंगे। फिलहाल जिला प्रशासन ने शिकायत को जांच में लेकर उचित वैधानिक कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
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