एक-एक वोट के लिए रातभर चली जोड़तोड़: जिला कोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव का महायुद्ध कल; काले कोट की सियासत चरम पर
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर जिला कोर्ट बार एसोसिएशन का चुनाव इस बार किसी विधानसभा चुनाव से कम नजर नहीं आ रहा। अदालत परिसर में कानूनी दलीलों की जगह अब चुनावी रणनीतियों, वोटों के गणित और जीत-हार के समीकरणों ने ले ली है।
काले कोट की सियासत अपने चरम पर पहुंच चुकी है। सोमवार को नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनाव प्रचार का आज अंतिम दिन बचा है और सभी प्रत्याशी आखिरी क्षण तक समर्थन जुटाने में लगे हैं।
बार रूम, कैंटीन, कोर्ट परिसर, चैंबर, गलियारों और वॉट्सएप ग्रुपों में सिर्फ एक ही चर्चा है, कौन बनेगा बार का नया अध्यक्ष, किसके हाथ आएगी सचिव की कमान और कौन कब्जा करेगा कार्यकारिणी की सीटों पर।
लगातार घनघनाते रहे मोबाइल
कल रात तक उम्मीदवारों और उनके समर्थकों ने जनसंपर्क का पूरा दम लगा दिया। मोबाइल फोन लगातार चुनावी संदेशों, वीडियो अपीलों और समर्थन मांगने वाली कॉलों से गूंजते रहे। कई वरिष्ठ अधिवक्ता तो देर रात तक अपने-अपने पैनल और प्रत्याशियों के पक्ष में समीकरण साधते नजर आए।
कल सुबह 11 बजे से मतदान
बार एसोसिएशन चुनाव के लिए मतदान कल सुबह 11 बजे से शुरू होकर शाम 5 बजे तक चलेगा। मतदान समाप्त होते ही शाम 6 बजे से मतगणना प्रारंभ कर दी जाएगी। चुनाव अधिकारियों के अनुसार अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे प्रमुख पदों के परिणाम रात लगभग 11 बजे तक घोषित होने की संभावना है, जबकि कार्यकारिणी सदस्य पद पर उम्मीदवारों की अधिक संख्या होने के कारण उसके परिणाम देर रात अथवा अगले चरण में घोषित किए जा सकते हैं।
इस बार बार एसोसिएशन चुनाव में कुल 5461 मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। यही मतदाता अगले कार्यकाल के लिए बार के नेतृत्व का चयन करेंगे।चुनाव समिति ने मतदान को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए 7 मतदान केंद्र (बूथ) बनाए हैं। इनमें बूथ क्रमांक 1 और 2 पर वरिष्ठ अधिवक्ता मतदान करेंगे, जबकि बूथ क्रमांक 7 विशेष रूप से महिला अधिवक्ताओं के लिए आरक्षित रहेगा।
फर्जी वोटर पर रहेगी कड़ी नजर
चुनाव समिति ने साफ कर दिया है कि मतदान प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति फर्जी मतदान करते हुए या किसी अन्य के नाम पर वोट डालने का प्रयास करते पकड़ा गया तो उसे सीधे पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा। इसके लिए विशेष निगरानी व्यवस्था भी की गई है।
अध्यक्ष पद पर बड़ा मुकाबला
इस बार चुनाव का सबसे बड़ा आकर्षण अध्यक्ष पद है। बार के इतिहास में शायद पहली बार अध्यक्ष पद पर इतने बड़े स्तर पर दावेदारी देखने को मिल रही है। अध्यक्ष पद के लिए वर्तमान अध्यक्ष एलएल यादव, पूर्व अध्यक्ष गोपाल कचोलिया, पूर्व अध्यक्ष रवींद्र सिंह गौड़, श्रीराम सिंह भदौरिया, राकेश पाल, राजेश खंडेलवाल, राजेंद्र यादव और मनोज वर्मा मैदान में हैं।
8 उम्मीदवारों की मौजूदगी ने मुकाबले को पूरी तरह त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय नहीं, बल्कि बहुकोणीय बना दिया है। जानकारों का मानना है कि वोटों का बंटवारा परिणाम को बेहद रोचक बना सकता है।
उपाध्यक्ष पद पर सात दावेदार
उपाध्यक्ष पद पर भी मुकाबला कम दिलचस्प नहीं है। इस पद के लिए सुरेंद्र सिंह शेरा, संतोष पांडे, सुनील पटेल, पुरुषोत्तम सोमानी, संतोष ठाकुर, जितेंद्र निम और हरीश कंदावड़े चुनाव मैदान में हैं।
सात उम्मीदवारों के बीच चल रही जोरदार प्रतिस्पर्धा ने इस पद को भी चर्चा का केंद्र बना दिया है। अंतिम समय तक सभी उम्मीदवार व्यक्तिगत संपर्क और समूह बैठकों के माध्यम से वोट साधने में लगे हुए हैं।
सचिव पद पर कांटे की टक्कर
बार एसोसिएशन में सचिव पद को सबसे प्रभावशाली और सक्रिय पदों में गिना जाता है। इस पद के लिए अमित पाठक, रोहित दांतरे, भूपेंद्र साहू, धर्मेंद्र गुर्जर और विशाल रामटेके के बीच सीधा मुकाबला है। सचिव पद के उम्मीदवारों ने पिछले कई दिनों से लगातार संपर्क अभियान चलाया है और इस मुकाबले को भी बेहद रोचक माना जा रहा है।
5 महिला उम्मीदवारों में मुकाबला
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत इस बार कोषाध्यक्ष पद महिलाओं के लिए आरक्षित है। इस पद के लिए पिंकी सुनहरे, पिंकी हरिवंशी, पल्लवी अध्यरू, पुष्पांजलि द्विवेदी और सविता तिवारी मैदान में हैं।
महिला अधिवक्ताओं के बीच इस चुनाव को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है और महिला मतदाताओं की भूमिका भी निर्णायक मानी जा रही है।
कार्यकारिणी के लिए संघर्ष
सबसे कठिन मुकाबला कार्यकारिणी सदस्य पद पर है। यहां सिर्फ 6 सीटों के लिए 21 उम्मीदवार मैदान में हैं।कार्यकारिणी सदस्य पद के लिए आयुष, सुधीर व्यास, अजय बैंडवाल, पुष्पांजलि सोनी, शैलेंद्र बैरागी, दिनेश नरेंद्र अमोदे, ममता बिल्लौर, नितिन परमार, श्याम वर्मा, दीपा सोनकर, शकुंतला, प्रकाश यादव, राकेश अहिरवार, प्रखर चौहान, पारस जैन, ऋषिवन चौहान, कन्हैया चौहान, पी. शिवराज, गगनदीप सिंह सहित अन्य उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
युवा और अनुभवी अधिवक्ताओं के इस मिश्रण ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। यहां व्यक्तिगत संबंध, बार में सक्रियता और वर्षों से बनी छवि निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
चुनाव प्रचार का बदला चेहरा
इस बार का चुनाव पूरी तरह डिजिटल रंग में भी रंगा दिखाई दिया। वॉट्सएप ग्रुप, फेसबुक पोस्ट, वीडियो संदेश और डिजिटल अपीलों ने प्रचार के पुराने तौर-तरीकों को पीछे छोड़ दिया। सुबह से लेकर देर रात तक अधिवक्ताओं के मोबाइल चुनावी संदेशों से भरे रहे। कई प्रत्याशियों ने तो बाकायदा अपने समर्थकों की टीमें बनाकर वार रूम की तर्ज पर चुनावी रणनीति तैयार की और हर मतदाता तक व्यक्तिगत पहुंच बनाने का प्रयास किया।
प्रतिष्ठा, प्रभाव की परीक्षा
बार के वरिष्ठ अधिवक्ताओं का मानना है कि यह चुनाव सिर्फ पदों का नहीं बल्कि बार में प्रभाव, स्वीकार्यता और नेतृत्व क्षमता की भी परीक्षा है। यही कारण है कि इस बार मुकाबला पहले के मुकाबले कहीं अधिक प्रतिष्ठापूर्ण बन गया है।
अब सारी निगाहें कल के मतदान और शाम से शुरू होने वाली मतगणना पर टिकी हैं। 5461 मतदाताओं के फैसले के बाद देर रात तक यह साफ हो जाएगा कि आखिर काले कोट की इस सियासी जंग का नया सरताज कौन बनेगा।
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