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भोजशाला पर फैसले के बाद अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा: हिंदू पक्ष ने केविएट दाखिल की; अब एकतरफा आदेश पर रोक

KHULASA FIRST

संवाददाता

16 मई 2026, 2:49 pm
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भोजशाला पर फैसले के बाद अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भोजशाला मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद कानूनी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। हिंदू पक्ष ने संभावित चुनौती को भांपते हुए सर्वोच्च न्यायालय में केविएट याचिका दाखिल कर दी है, ताकि किसी भी अपील पर सुनवाई से पहले उनका पक्ष भी अनिवार्य रूप से सुना जाए।

यह केविएट ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ की ओर से, राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री के मार्गदर्शन में, वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के माध्यम से 15 मई को दाखिल की गई। इसकी पुष्टि अधिवक्ता विनय जोशी ने की है। केविएट दाखिल होने का सीधा अर्थ यह है कि यदि मुस्लिम पक्ष हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देता है, तो सुप्रीम कोर्ट बिना हिंदू पक्ष को सुने कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं करेगा।

दरअसल, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने हाल ही में भोजशाला मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार प्रदान किया था और वर्ष 2003 के उस आदेश को निरस्त कर दिया था, जिसके तहत परिसर में नमाज की अनुमति दी गई थी। इस फैसले के बाद से ही दोनों पक्षों में कानूनी हलचल तेज हो गई थी।

मुस्लिम पक्ष पहले ही संकेत दे चुका है कि वह हाईकोर्ट के विस्तृत, लगभग 240 पन्नों के निर्णय का अध्ययन करने के बाद सर्वोच्च न्यायालय का रुख करेगा। इसी संभावना को देखते हुए हिंदू पक्ष ने त्वरित रणनीति अपनाते हुए 24 घंटे के भीतर केविएट दाखिल कर दी, जिससे किसी भी एकपक्षीय आदेश की संभावना समाप्त हो गई है।

फैसले में एएसआई द्वारा कराए गए 98 दिवसीय वैज्ञानिक सर्वेक्षण और ऐतिहासिक साक्ष्यों को अहम आधार माना गया था। हिंदू पक्ष का दावा है कि भोजशाला प्राचीन काल में मां वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर और संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। अब इस मामले में आगे की दिशा सुप्रीम कोर्ट में होने वाली संभावित सुनवाई पर निर्भर करेगी, जहां दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ अदालत के समक्ष प्रस्तुत होंगे।

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