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हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला में गूंजा भक्ति का स्वर: श्रद्धालुओं को मिला निर्बाध दर्शन का अवसर; मां वाग्देवी की पूजा

KHULASA FIRST

संवाददाता

16 मई 2026, 1:04 pm
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हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला में गूंजा भक्ति का स्वर

खुलासा फर्स्ट, धार।
भोजशाला को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के अहम फैसले के बाद शनिवार सुबह परिसर में धार्मिक गतिविधियां तेज हो गईं। अदालत ने भोजशाला-कमाल मौला परिसर को राजा भोज के काल का वाग्देवी (मां सरस्वती) मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया है। फैसले के कुछ ही घंटों बाद श्रद्धालु और विभिन्न समितियों के पदाधिकारी शांतिपूर्ण माहौल में भोजशाला पहुंचे और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ भी किया गया, जिससे पूरा परिसर भक्ति में सराबोर नजर आया।

सुबह से ही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। भोज उत्सव समिति और भोजशाला मुक्ति यज्ञ से जुड़े पदाधिकारियों—विश्वास पांडे, गोपाल शर्मा, श्रीश दुबे, केशव शर्मा और अशोक जैन ने मां वाग्देवी के गर्भगृह स्थल और यज्ञ कुंड के पास पुष्प अर्पित कर दंडवत प्रणाम किया। लंबे समय से विवाद के केंद्र रहे इस स्थल पर वर्षों बाद खुले तौर पर पूजा होने से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया।

हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन ने बताया कि हाईकोर्ट ने 7 अप्रैल 2003 के एएसआई आदेश को आंशिक रूप से निरस्त कर दिया है। इसी आदेश के तहत मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को सीमित समय के लिए नमाज की अनुमति दी गई थी। वहीं एएसआई की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता Aviral Vikas Khare ने स्पष्ट किया कि भोजशाला 1904 से संरक्षित स्मारक है और इसका प्रशासन, नियंत्रण व देखरेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पास ही रहेगा।

अदालत ने अपने निर्णय में ऐतिहासिक तथ्यों और पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर माना है कि इस स्थल का निर्माण भोज-परमार वंश के काल में हुआ था। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि संरक्षित स्मारक होने के बावजूद धार्मिक गतिविधियों के प्रबंधन के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा।

दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों बाद उन्हें बिना किसी बाधा के पूजा करने का अवसर मिला है। भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा कि भोजशाला का कण-कण यह प्रमाणित करता है कि यह मंदिर है। उन्होंने मुस्लिम पक्ष की संभावित कानूनी कार्रवाई पर कहा कि उन्हें सर्वोच्च न्यायालय जाने की स्वतंत्रता है, लेकिन आस्था के स्तर पर भोजशाला मंदिर था, है और रहेगा।

इस बीच, मुस्लिम पक्ष द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की संभावनाओं को देखते हुए हिंदू पक्ष ने अग्रिम रूप से दो कैविएट याचिकाएं दाखिल की हैं, ताकि किसी भी एकतरफा आदेश से पहले उनका पक्ष सुना जा सके। साथ ही वाग्देवी की मूल प्रतिमा, जो लंदन के एक संग्रहालय में होने की बात कही जाती है, उसे भारत वापस लाने के मुद्दे पर भी कानूनी और कूटनीतिक स्तर पर पहल की चर्चा तेज हो गई है।

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