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कोरोना के बाद अब इस वायरस का कहर: 80 मौतों से मचा हड़कंप; WHO ने घोषित की ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी

KHULASA FIRST

संवाददाता

17 मई 2026, 12:39 pm
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कोरोना के बाद अब इस वायरस का कहर

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
कांगो के पूर्वी इतुरी प्रांत में इबोला वायरस ने एक बार फिर भयावह रूप ले लिया है। अब तक 80 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 246 संदिग्ध मामलों ने स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्थिति को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है, हालांकि इसे फिलहाल महामारी की श्रेणी में नहीं रखा गया है।

8 मामलों की पुष्टि हो चुकी
कांगो के स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल-रोजर कंबा के अनुसार, इस संक्रमण का पहला मामला एक नर्स से जुड़ा माना जा रहा है, जिसकी 24 अप्रैल को मौत हुई थी। जांच में अब तक इबोला के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के 8 मामलों की पुष्टि हो चुकी है।

स्ट्रेन पहले के जायरे स्ट्रेन से अलग
बीमारी तेजी से बुनीया, रवामपारा और मोंगवालू इलाकों में फैल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार सामने आया बुंडीबुग्यो स्ट्रेन पहले के जायरे स्ट्रेन से अलग है, जिससे चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि मौजूदा कई टीके और उपचार जायरे स्ट्रेन को ध्यान में रखकर विकसित किए गए थे।

डरावने होते जा रहे हैं हालात
स्थानीय लोगों के मुताबिक, हालात बेहद डरावने होते जा रहे हैं। बुनीया निवासी जीन मार्क असिम्वे ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में लगातार मौतें हो रही हैं और कई बार एक ही दिन में कई अंतिम संस्कार करने पड़ रहे हैं।

पड़ोसी देशों तक पहुंचने लगा खतरा
हालांकि बाजार और सार्वजनिक गतिविधियां अभी भी सामान्य रूप से जारी हैं। इबोला का खतरा अब पड़ोसी देशों तक पहुंचने लगा है। युगांडा में कांगो से जुड़े एक संक्रमित मरीज की मौत हो चुकी है, जबकि दक्षिण सूडान और केन्या ने भी सतर्कता बढ़ा दी है।

पहली बार 1976 में सामने आया था वायरस
केन्या सरकार ने सभी एंट्री पॉइंट्स पर निगरानी तेज कर दी है और विशेष स्वास्थ्य टीमें तैनात की हैं। इबोला वायरस पहली बार 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। यह संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी और शरीर के अन्य तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है।

11 हजार से अधिक लोगों की गई थी जान
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बीमारी में मृत्यु दर 25% से 90% तक हो सकती है। 2014-16 के पश्चिम अफ्रीका इबोला प्रकोप को अब तक का सबसे घातक माना जाता है, जिसमें 11 हजार से अधिक लोगों की जान गई थी। अब नए स्ट्रेन के सामने आने से वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां फिर अलर्ट मोड में हैं।

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