मसीहा बनकर शिक्षाविद् मौत के मुंह से खींच लाई जिंदगी: गहरे गड्ढे में तड़पती रहीं दो बेटियां; भीड़ बनी रही तमाशबीन
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर-उज्जैन रोड पर कल सुबह इंसानियत शर्मसार होती रही और संवेदनाएं दम तोड़ती नजर आईं। करीब चार फीट गहरे गड्ढे में गिरी दो युवतियां दर्द से चीखती-कराहती रहीं, लेकिन भीड़ सिर्फ तमाशा देखती रही।
दुर्घटना में दोनों युवतियों के पैर टूट चुके थे। तभी एक महिला शिक्षाविद् और उनके बेटे ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए हालात अपने हाथ में लिए और जो किया, उसने मौत के मुंह से दो जिंदगियां छीन लीं।
जानकारी के अनुसार पिता की तबीयत खराब होने के चलते भीलवाड़ा (राजस्थान) में कार्यरत शिक्षाविद् कुसुम नवाल कुछ दिनों से बेटे हर्ष (माहेश्वरी) के साथ इंदौर आई हुई है। कल सुबह कुसुम, बेटे हर्ष, मुंहबोली बेटी पूजा ठाकुर और उनकी बच्ची के साथ महाकाल दर्शन के लिए अपनी कार से उज्जैन के लिए निकली थी।
चारों इंदौर-उज्जैन रोड पर तपोवन चौराहे के पास पहुंचे थे कि वहां इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप के साथ निर्माणाधीन पुल के पास डायवर्शन के मोड पर सड़क किनारे लोगों की भीड़ देखी। किसी के साथ हुए संभावित हादसे की संभावना के चलते कुसुम और हर्ष कार से उतरे तो देखा करीब चार फीट गहरे गड्ढे में दो युवतियां दर्द से कराह रही हैं।
उनके पास जुपिटर गाड़ी (मोपेड) गड्ढे में ही आड़ी पड़ी थी। उससे लगातार पेट्रोल रिस रहा था। पूछताछ में पता चला करीब 20 मिनट पहले युवतियां अनियंत्रित होकर मोपेड सहित गड्ढे में जा गिरी थीं। दोनों मदद का रास्ता देख रही थीं, लेकिन कोई उन्हें गड्ढे में उतरकर निकाल नहीं रहा था।
ऐसे में कुसुम नवाल और बेटे हर्ष माहेश्वरी ने मोर्चा संभाला। एक युवती के घुटने के नीचे का मांस बुरी तरह फटकर लटक गया था। दूसरी युवती के एक पैर घुटने के नीचे से पूरी तरह मुड़ चुका था। दूसरे पैर में भी फ्रैक्चर नजर आ रहा था। उन्होंने लोगों से तत्काल एंबुलेंस को सूचना देने को कहा।
हालांकि, इस बीच एंबुलेंस का इतंजार करने के बजाय कुसुम नवाल ने उपलब्ध संसाधनों का उपयोग किया। उन्होंने अपनी कार से बेडशीट निकलवाई और पेट्रोल पंप से गत्ते (कार्ड बोर्ड) मंगवाकर घायल युवतियों के अंगों को सुरक्षित किया, ताकि अस्पताल ले जाते समय स्थिति और न बिगड़े।
जिसके घुटने का मांस पूरी तरह लटक गया था। उसकी आंखों पर पट्टी बांधी गई। इसके बाद लोगों की मदद से दोनों को गड्ढे से बाहर निकाला गया। इस दौरान सड़क पर वाहनों की कतार लगने लगी और लोगों की भीड़ भी जुट गई। यह देख हर्ष माहेश्वरी ने मोर्चा संभालते हुए ट्रैफिक कंट्रोल और यातायात सुचारू कराया।
इस बीच कुसुम नवाल ने एम्बुलेंस चालक से निरंतर संपर्क बनाए रखा। उन्होंने अपनी कार में हमेशा रखी जाने वाली मेडिकल किट बुलवाई और बहुत ही प्राथमिक उपचार करते हुए युवतियों को हिम्मत बंधाई। एंबुलेंस आने पर दोनों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया और जब तक उनका इलाज शुरू नहीं हुआ।
वहीं पर मौजूद रही। इलाज शुरू होने के बाद ही कुसुम नवाल परिवार सहित वहां से रवाना हुई। इस दौरान राहगीरों और प्रत्यक्षदर्शियों ने कुसुम नवाल और हर्ष माहेश्वरी के तुरंत लिए निर्णय और सेवा भावना की प्रशंसा भी की।
एंबुलेंस बुलाना ही काफी नहीं, धैर्य और सूझबूझ भी जरुरी
कुसुम नवाल ने खुलासा फर्स्ट को बताया कि संकट के समय केवल एंबुलेंस बुलाना ही काफी नहीं होता, बल्कि चिकित्सा सहायता मिलने तक धैर्य और सूझबूझ से किया गया प्राथमिक उपचार ही गंभीर घायल की जान बचा सकता है। घायल युवतियां नौकरीपेशा हैं।
एक का नाम यशी है, जिसके दोनों पैर फ्रैक्चर हो गए हैं। वहीं दूसरी का नाम आंचल है, उसका एक पैर फ्रैक्चर हुआ है। दोनों युवतियां दिल्ली की थीं और उज्जैन घूमने आई थीं। महाकाल दर्शन के बाद दोनों ओंकारेश्वर भी दर्शन करके आ चुकी थीं और उज्जैन के अन्य दर्शन स्थलों को देखने के लिए दोनों ने उज्जैन से ही मोपेड किराए से ली थी।
सूचना पर यशी के परिवार से उसका भाई फ्लाइट से उज्जैन आ गया था। फिलहाल दोनों युवतियां एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है।
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