टैंक में अनधिकृत पोटेशियम क्लोराइड डालने का आरोप: भागीरथपुरा मामले में जांच आयोग को मिला एक महीना; हाई कोर्ट का रवैया सख्त
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों की गुरुवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। जांच आयोग ने प्रारंभिक रिपोर्ट पेश की। कोर्ट ने आयोग को विस्तृत रिपोर्ट देने के लिए 30 दिन का समय दिया है। अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया ने अतिरिक्त तथ्यों के साथ आवेदन पेश किया। इसमें दावा किया भागीरथपुरा के वार्ड 11 के ओवरहेड टैंक में कथित तौर पर पोटैशियम क्लोराइड की टैबलेट डाली गई थीं।
यह टैबलेट नगर निगम की अधिकृत खरीद प्रक्रिया के बाहर एक निजी दुकान से खरीदी गईं और मौखिक निर्देश पर टैंक में डाली गईं। पोटेशियम क्लोराइड पीने के पानी को शुद्ध करने के लिए स्वीकृत रसायन नहीं है।
अगर ओवरहेड टैंक में इसका इस्तेमाल हुआ है तो इसे पेयजल आपूर्ति में गंभीर और अनधिकृत हस्तक्षेप माना जाएगा। शहर में पेयजल सप्लाई मुख्य रूप से तीन स्रोतों से होती है नर्मदा जल योजना, यशवंत सागर बांध और बिलावली तालाब। पानी को जलूद वाटर स्टेशन सहित अन्य जलशोधन केंद्रों पर साफ करने के बाद शहर के करीब 108 से 110 ओवरहेड टैंकों तक भेजा जाता है और फिर पाइपलाइन से अलग-अलग इलाकों में सप्लाई किया जाता है।
जलूद से आने वाली वितरण लाइन में तीसरे आखिरी टैंक तक पानी पूरी तरह मानक के अनुरूप मिला, जबकि उसी लाइन के दूसरे आखिरी और आखिरी टैंक से आने वाला पानी दूषित पाया गया। इन्हीं टैंकों से भागीरथपुरा क्षेत्र में पानी की सप्लाई होता था।
पांच लोगों की हो जांच
कोर्ट को बताया गया ओवरहेड टैंक की देखरेख के लिए पांच लोग जिम्मेदार हैं, जिनमें तीन नगर निगम के कर्मचारी और दो निजी कंपनी रामकी इंडस्ट्रीज से जुड़े बताए गए हैं। इनकी निष्पक्ष पुलिस जांच की मांग की गई। याचिका में कहा गया है इलाके के लोगों ने पानी में दवा जैसी गंध आने और रंग गंदा होने की शिकायत की थी। कुछ लोगों के बयान रिकॉर्ड कर पेन ड्राइव में सुरक्षित हैं, जिन्हें अदालत के सामने पेश किया जाएगा।
जांच समिति को उपलब्ध कराएं सभी रिकॉर्ड
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिया इस मामले से जुड़े सभी जरूरी रिकॉर्ड 10 दिनों के भीतर जांच समिति को उपलब्ध कराए जाएं। इससे पहले हुई सुनवाई में भी हाई कोर्ट ने शासन और नगर निगम की रिपोर्ट पर नाराजगी जताते हुए उसे आई-वॉश करार दिया था। साफ कहा था स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना नागरिकों के जीवन के अधिकार से जुड़ा गंभीर मामला है।
गुप्ता आयोग भी कर रहा जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस सुशीलकुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय स्वतंत्र जांच आयोग गठित किया है, जो पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपेगा।
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