धूप में झुलसती वर्दी: कराहता आमजन; हेलमेट अभियान बना हीट टेस्ट
KHULASA FIRST
संवाददाता

सड़क पर खड़े जवानों की सेहत दांव पर, तपती धूप में हेलमेट की कार्रवाई से लोग भी हुए परेशान
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सड़क पर नियम तोड़ने वालों को सबक सिखाने के लिए खड़ी ट्रैफिक पुलिस आज खुद हालात की मार झेल रही है। चिलचिलाती धूप, सिर पर तपता सूरज और ऊपर से लगातार चालानी कार्रवाई का दबाव। शहर में हेलमेट अभियान अब कानून से ज्यादा कठिन परीक्षा बन गया है।
फर्क इतना है कि इस परीक्षा में फेल होने की कीमत पुलिसकर्मी अपनी सेहत से चुका रहे हैं। तपती धूप में हेलमेट की कार्रवाई से जहां आमजन भी परेशान हैं, वहीं, ट्रैफिक पुलिस भी पर्दे के पीछे से बोलने को मजबूर है कि कोई कार्रवाई बंद करवा दो, अब तो हम भी परेशान हो गए हैं। इंदौर के सारे जनप्रतिनिधि केवल झांकीबाजी के लिए बचे हैं। इस विषय पर कोई कुछ बोलने वाला नहीं है।
इंदौर में इन दिनों गर्मी अपने चरम पर है। दोपहर के वक्त सड़क पर खड़े होना किसी सजा से कम नहीं है, लेकिन ट्रैफिक विभाग के पुलिसकर्मियों के लिए यही रोजमर्रा की ड्यूटी बन चुकी है। हेलमेट न पहनने वालों के खिलाफ चल रहे विशेष अभियान ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
घंटों तक बिना छांव के खड़े रहकर चालान बनाना, वाहनों को रोकना और बहस झेलना, यही सब अब उनकी दिनचर्या का हिस्सा बना हुआ है। हालांकि पर्दे के पीछे की सच्चाई और भी कड़वी है। कई पुलिसकर्मियों ने नाम न छापने की शर्त पर खुलासा फर्स्ट से अपनी पीड़ा जाहिर की है। उनका कहना है कि अफसरों के लिए आदेश देना आसान है, लेकिन सड़क पर खड़े होकर उसे लागू करना कितना मुश्किल है यह वही जानता है जो धूप में जल रहा है।
जवानों का कहना है कि लगातार गर्मी में ड्यूटी करने से बीमार होने का खतरा बढ़ गया है। लू लगने, डिहाइड्रेशन और थकान जैसी समस्याएं आम हो गई हैं।
उम्रदराज पुलिसकर्मियों की हालत और खराब...कुछ पुलिसकर्मी तो भरी धूप में ड्यूटी को ‘सजा’ तक करार दे रहे हैं। उनका कहना है कि युवा कर्मचारी तो किसी तरह हालात झेल लेते हैं, लेकिन उम्रदराज पुलिसकर्मियों के लिए यह ड्यूटी बेहद कठिन हो गई है।
परिवार के लोग भी उनकी सेहत को लेकर चिंतित रहते हैं, लेकिन मजबूरी ऐसी है कि ड्यूटी से पीछे हटने का विकल्प नहीं।
चुभती है जनप्रतिनिधियों की चुप्पी... दबी जुबान में पुलिसकर्मियों का कहना है कि सबसे ज्यादा चुभने वाली बात यह है कि इस मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी बनी हुई है। छोटी-छोटी बातों पर सड़क पर उतरने वाले नेता इस मामले में खामोश हैं।
पुलिसकर्मियों का कहना है कि अगर उनकी परिस्थितियों को समझा जाए तो इस अभियान में कुछ राहत दी जा सकती है, जैसे कुछ महीनों के लिए राहत या अन्य वैकल्पिक व्यवस्था। अगर हालात ऐसे ही रहे तो यह हेलमेट अभियान सड़क सुरक्षा से ज्यादा मानव सहनशक्ति की परीक्षा बनकर रह जाएगा।
करोड़ों कमा चुके, अब तो बस करो
पुलिस का ट्रैफिक को लेकर अभियान चल रहा है। हाल ही में हेलमेट को लेकर जागरूकता रैली निकाली गई थी, लेकिन इस पूरे अभियान में एक और पहलू सामने आ रहा है। लोगों को हेलमेट पहनाने पर तुले पुलिस अफसर अब धीरे-धीरे आम जनता और मातहत पुलिसकर्मियों की नाराजगी के पात्र बन रहे हैं।
जहां लोग बार-बार चालान से परेशान हैं, वहीं पुलिसकर्मी खुद इस कार्रवाई से राहत चाहते हैं। उनका साफ कहना है कि हेलमेट का नियम जरूरी है, लेकिन इस भीषण गर्मी में लगातार अभियान चलाना अमानवीय हो रहा है। आंकड़े भी इस अभियान की तीव्रता को बयां करते हैं।
साल 2025-26 में हफ्तेभर पहले तक बिना हेलमेट के ही 1,80,307 चालान बनाए जा चुके हैं। कुल मिलाकर 2,54,894 चालान काटे गए, जिनसे 10 करोड़ 3 लाख रुपये से ज्यादा की वसूली हुई। ये चालान तेज गति, गलत पार्किंग, मोबाइल उपयोग, सीट बेल्ट और अन्य उल्लंघनों पर भी बड़ी संख्या में कार्रवाई करते हुए बनाए गए। आंकड़े बताते हैं कि सड़कों पर सख्ती कितनी ज्यादा है और इसी सख्ती का सबसे बड़ा बोझ ट्रैफिक पुलिस के कंधों पर है।
कोने में खड़े थे, मिल गई सजा
पुलिसकर्मियों का कहना है कि पिछले दिनों अफसरों ने ड्रोन से मॉनिटरिंग कराई थी। इसमें चार ट्रैफिक जवान यातायात संभालने की बजाय धूप से परेशान होकर कोना पकड़कर खड़े हो गए थे। डीसीपी ट्रैफिक राजेश कुमार त्रिपाठी ने ड्रोन से मॉनिटरिंग के बाद चारों को पकड़ने के बाद 11 अप्रैल को उन्हें सजा दी थी।
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