वरिष्ठ पत्रकार ने मोटर वाहन कानून में संशोधन का प्रस्ताव भेजा: लोकसभा की याचिका समिति के समक्ष उठाई ये मांग
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सड़क दुर्घटनाओं में बिना बीमा या फर्जी बीमा वाले वाहनों से प्रभावित परिवारों को लंबे कानूनी संघर्ष से राहत दिलाने के उद्देश्य से वरिष्ठ पत्रकार एवं विश्लेषक कुलदीप शर्मा ने लोकसभा की याचिका समिति के समक्ष एक नीतिगत प्रस्ताव प्रस्तुत किया है।
तत्काल प्राथमिक मुआवजा उपलब्ध कराया जाए
प्रस्ताव में मांग की गई है कि ऐसे मामलों में मृतक के आश्रितों या गंभीर रूप से घायल पीड़ितों को राज्य सरकार की ओर से तत्काल प्राथमिक मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।
इसके बाद प्रशासनिक और राजस्व वसूली तंत्र के माध्यम से दोषी वाहन मालिक से यह राशि वसूल करने की व्यवस्था की जाए।
क्या है प्रस्ताव?
वरिष्ठ पत्रकार एवं विश्लेषक कुलदीप शर्मा की याचिका में मोटर वाहन अधिनियम में आवश्यक संशोधन कर ऐसी व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया गया है, जिसमें बिना बीमा अथवा कथित बोगस बीमा वाले वाहन से दुर्घटना होने पर पीड़ित परिवार को मुआवजे के लिए वर्षों तक इंतजार न करना पड़े।
प्रस्ताव के मुताबिक
दुर्घटना के बाद पात्र आश्रितों को राज्य सरकार की ओर से प्राथमिक मुआवजा दिया जाए। बाद में दोषी वाहन मालिक से पूरी राशि की वसूली की जाए।
इसके लिए राज्य के प्रशासनिक एवं राजस्व वसूली तंत्र का इस्तेमाल किया जाए। परिवहन एवं गृह मंत्रालय को इस संबंध में स्पष्ट नीतिगत दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
याचिका में न्यायिक देरी का मुद्दा
याचिका में कहा गया है कि बिना बीमा या कथित फर्जी बीमा वाले मामलों में पीड़ित परिवारों के सामने मुआवजा हासिल करने की प्रक्रिया लंबी हो सकती है।
MACT की कार्यवाही, वाहन मालिक से वसूली और आगे की कानूनी प्रक्रिया में समय लगने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि दुर्घटना के बाद परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता मिले और बाद में सरकार दोषी पक्ष से राशि की वसूली करे, तो पीड़ित परिवार को शुरुआती संकट से राहत मिल सकती है।
2019 में सुप्रीम कोर्ट में भी उठाया था मुद्दा
याचिका के मुताबिक, कुलदीप शर्मा ने इस विषय को वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी उठाने का प्रयास किया था। दस्तावेज में आवक संख्या 70120/2019 का उल्लेख किया गया है।
याचिका के अनुसार, 21 जनवरी 2020 को मामले को यह कहते हुए नस्तीबद्ध किया गया कि विषय पीआईएल दिशानिर्देशों के अंतर्गत नहीं आता और यह नीतिगत विषय है।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के समक्ष भी प्रस्ताव भेजा। दस्तावेज में CPGRAMS पंजीकरण संख्या MORTH/E/2026/0028840, दिनांक 30 जुलाई 2026, का उल्लेख है।
याचिका के अनुसार, मंत्रालय की ओर से 16 अगस्त 2026 को इसे बड़े नीतिगत बदलाव से जुड़ा विषय बताते हुए मौजूदा वैधानिक प्रावधानों का हवाला दिया गया।
मौजूदा कानून में भी है दुर्घटना निधि का प्रावधान
मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में मोटर वाहन दुर्घटना निधि का प्रावधान मौजूद है। अधिनियम की धारा 164B के तहत यह फंड सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए अनिवार्य बीमा कवर से संबंधित उद्देश्यों के लिए बनाया गया है और इसमें दुर्घटना पीड़ितों से संबंधित कुछ भुगतान का प्रावधान है।
धारा 164ए केंद्र सरकार को अंतरिम राहत के लिए योजनाएं बनाने की शक्ति भी देती है।इसी मौजूदा ढांचे को बिना बीमा के और फर्जी-बीमा मामलों में किस तरह अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है, यह प्रस्ताव का महत्वपूर्ण नीतिगत पहलू है।
लोकसभा की याचिका समिति क्या कर सकती है?
लोकसभा की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, Committee on Petitions सामान्य जनहित के मामलों से संबंधित याचिकाओं पर विचार कर सकती है।
समिति संबंधित मंत्रालय से तथ्य और टिप्पणियां मांग सकती है तथा जरूरत पड़ने पर याचिकाकर्ता और मंत्रालय के प्रतिनिधियों को सुन सकती है।
समिति का एक कार्य भविष्य में ऐसी समस्याओं को रोकने के लिए remedial measures सुझाना भी है।
हालांकि, लोकसभा के नियमों के तहत Petition की औपचारिक प्रस्तुति और admissibility की प्रक्रिया अलग है।
आधिकारिक संसदीय जानकारी के अनुसार, Petition सदन में प्रस्तुत होने के बाद Committee on Petitions को भेजी जाती है और प्रस्तुति के लिए सदस्य की प्रक्रिया निर्धारित है।
मांग का उद्देश्य
याचिकाकर्ता का कहना है कि सड़क दुर्घटना में कमाने वाले सदस्य की मृत्यु के बाद परिवार को मुआवजे के लिए वर्षों तक अदालतों और कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
प्रस्ताव का मूल उद्देश्य “पहले पीड़ित को राहत, बाद में दोषी से वसूली” की व्यवस्था विकसित करना है।
याचिका के साथ सुप्रीम कोर्ट और MoRTH से संबंधित पत्राचार तथा ‘खुलासा फर्स्ट’ में 27 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित विशेष विश्लेषणात्मक लेख को भी संलग्न किए जाने की जानकारी दी गई है।
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